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उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था किस कदर चरमराई हुई है, हाल ही में इसका उदाहरण मथुरा में राम वृक्ष यादव के रूप में देखने को मिला था, जिससे सरकार को अपनी ही ज़मीन वापिस लेने के लिए बकायदा ऑपरेशन चलाना पड़ा। इस ऑपरेशन में पुलिस वालों सहित कई मासूमों की जाने गई थीं।  अगर पुलिस पहले से ही सचेत रहती तो शायद ये नौबत ही न आती! पर बरहाल यूपी पुलिस को राज्य के मंत्रीयों व मुल्लायम जी के करीबी चमचाओ की भैंसों को ढूंढने से फुरसत मिले तब ही तो वो किसी और जगह ध्यान दे।

अभी ताज़ा मामला है बकरी की किडनैपिंग का, जिसे सुलझाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस रात दिन एक किये हुए है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के मुताबिक नगला थकऔ क्षेत्र के रहने वाले देव सिंह ने अपनी बकरी के किडनैप होने की FIR लिखवाई है। ऊसराहार पुलिस के मुताबिक मामला उस समय का है, जब 17 अप्रैल को उनकी बकरी घास चर रही थी। तभी दो आदमी आये और बकरी को किडनैप कर लिया।

ऊसराहार थाने में तैनात नासिर हुसैन का कहना है कि IPC की धारा सेक्शन 379 के तहत केस को दर्ज कर लिया है। इस केस की जांच के लिए एक सब-इंस्पेक्टर की नियुक्ति भी की गई है। मामले की जांच के लिए पुलिस की एक टीम देव सिंह के घर का भी दौरा कर चुकी है, जहां उनके पड़ोसियों ने बताया कि दो आदमी बकरी को घास खिलाते हुए अपने साथ लेके जा रहे थे।

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के अनुसार उत्तर प्रदेश में अपराध की दर 33.4% है, जिसमें बलात्कार से लेकर मर्डर तक कई अपराधिक कृत्य शामिल हैं। पर प्रेदश पुलिस इन सब चीज़ों को छोड़ कर कभी भैंस तो कभी बकरी के केस सुलझाने में लगी है। अखबारों और न्यूज़ में दिखाई देने वाले मुख्यमंत्री के सारे दावों की पोल खोल रही है यह खबर।

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