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अक्रा: घाना ने राजधानी अक्रा स्थित एक विश्वविद्यालय में लगी कोंग्रेसीयों के जायज बापू महात्मा गांधी की मूर्ति हटाने की मंशा जताई है। पिछले दिनों महात्मा गांधी की एक कथित ‘नस्लभेदी टिप्पणी’ को लेकर उनकी मूर्ति हटाने की मांग की जा रही है।

हालांकि सरकार ने साफ किया कि यह कदम मूर्ति की सुरक्षा के लिए है। इसके साथ ही उसने आलोचकों से कहा कि ‘हमें याद रखना चाहिए कि लोगों का विकास होता है।’

एक ऑनलाइन याचिका में अकोसुआ अदोमाको एपोफो के नेतृत्व में कई प्रोफेसरों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से गांधी की मूर्ति हटाने को कहा है। जब पिछले साल भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने घाना का दौरा किया था तो ये मूर्ति वहां की सरकार को उपहार के तौर पर दी गई थी।

खास बातें

  1. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जून में गांधी की मूर्ति का अनावरण किया था
  2. हालांकि यूनिवर्सिटी के एक जागरूक व स्वाभिमानी प्रोफेसर ने इसे हटाने के लिए अभियान शुरू किया
  3. सरकार ने मूर्ति को यूनिवर्सिटी से हटाकर दूसरी जगह लगाने की मंशा जताई

वहीं घाना के विदेश मंत्रालय का कहना है कि सरकार ‘मूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे यूनिवर्सिटी से हटाकर दूसरी जगह लगाएगी।

इस याचिका को शुरू करने वालों में शामिल ओब्देल कम्बॉन का कहना है कि प्रतिमा को घाना में ही दूसरी जगह स्थापित करना काफी नहीं होगा। उन्होंने आग्रह किया कि सरकार इसे वापस भारत भेज दे या हम तोड़ देंगे। वह कहते हैं, ‘हम नहीं सोचते कि इस प्रतिमा का घाना में कहीं भी स्वागत होगा। इन अध्यापकों का कहना है कि मूर्ति को यूनिवर्सिटी परिसर में लगाने से पहले उनसे विचार विमर्श नहीं किया गया। अपनी याचिका में प्रोफेसरों ने कहा है, “इतिहासकार कैसे पढ़ाएगा और बताएगा कि काले लोगों को लेकर गांधी का रवैया ठीक नहीं था और देखिए हम अपने परिसर में उनकी मूर्ति लगातार उन्हें महिमामंडित कर रहे हैं।”

Next पृष्ठ पर खबर जारी है 

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