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महान क्रांतिकारी मंगल पांडे ने साल 1857 में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था, जिससे एक महान क्रांति की नींव रखी गई।

अचानक हुई इस क्रान्ति की वजह से ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिल गई। यह पहला मौका था जब स्वतंत्रता संग्राम का जलजला अवाम के सिर चढ़ कर बोला।

मंगल पांडे ईस्ट इंडिया कंपनी की फ़ौज की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री में तैनात थे। इस सेनानी के मन में अंग्रेजों के खिलाफ धधक रही आग ने उस वक़्त विकराल रूप ले लिया, जब ब्रिटिश सेना में इनफील्ड पी-53 राइफल शामिल की गई। मंगल पांडे एनफील्ड पी-53 राइफल के विरोध में थे, क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाले कारतूस में सुअर और गाय की चर्बी लगी थी। इस कारतूस को दांतों से खोलना होता था।

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स्रोतtopyaps.com
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