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पटना : राजद के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन और तीन अन्य दोषियों को बिहार के सीवान जिले में 11 वर्ष पहले तेजाब डालकर दो भाइयों की नृशंस हत्या के मामले में एक जिला अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने वर्ष 2004 के इस मामले में शहाबुद्दीन और उनके तीन सहयोगियों राजकुमार शाह, शेख असलम और आरिफ हुसैन को उम्र कैद की सजा मुकर्रर की। 97021-mohammad-shahabuddin

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अदालत ने बुधवार को चारों आरोपियों को भादंसं की धारा 302 (हत्या), 364 ए (फिरौती के लिए अपहरण), 201 (अपराध से जुड़े साक्ष्यों को छिपाने या गलत सूचना देने) और 120 (आपराधिक साजिश रचने) के तहत दोषी ठहराया था। शहाबुद्दीन और अन्य लोगों की मौजूदगी में आज सजा तय की गयी। अदालत ने इस मामले में शहाबुद्दीन पर 20,000 रूपये का आर्थिक दंड भी लगाया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार 16 अगस्त, 2004 को चंद्रशेखर प्रसाद के तीन बेटों को उनके गौशाला रोड स्थित मकान से राजकुमार शाह, शेख असलम और आरिफ हुसैन ने अगवा किया और उन्हें प्रतापपुर गांव लेकर गये जहां गिरीश और सतीश पर तेजाब उड़ेला गया जिससे उनकी मौत हो गयी थी। उनका एक बेटा राजीव रोशन भागने में सफल रहा था। दोनों भाइयों के शवों को बरामद नहीं किया जा सका था। पीड़ितों की मां कलावती देवी ने अपने बेटों की हत्या के लिए शहाबुद्दीन के तीन सहयोगियों पर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी थी।

16 अगस्त 2004 को सिवान शहर के गौशाला रोड निवासी चंद्रशेखर प्रसाद के तीन पुत्रों को राजकुमार साह, शेख असलम और आरिफ हुसैन ने अपrत किया और हुसैनगंज थाना अंतर्गत प्रतापपुर गांव ले गए। तीनों में से दो गिरीश और सतीश के शरीर पर तेजाब उड़ेल दिए जाने से उनकी मौत हो गई जबकि तीसरा राजीव रोशन फरार होने में सफल रहा। गिरीश और सतीश के शव बरामद नहीं हो सके थे। इस मामले में मृतकों की मां कलावती ने शहाबुद्दीन पर उनके तीनों पुत्रों के अपहरण और उनमें से दो की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए पूर्व सांसद और उनके तीनों साथियों राजकुमार साह, शेख असलम और आरिफ हुसैन के खिलाफ स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस घटना के एक मात्र चश्मदीद गवाह राजीव रोशन ने अदालत के समक्ष पेश होकर इस मामले में गवाही दी थी लेकिन फिर राजीव की गत वर्ष 16 जून को अज्ञात हमलावरों द्वारा हत्या कर दी गई थी। उल्लेखनीय है कि हत्या सहित अन्य आपराधिक मामलों में शहाबुद्दीन पिछले कई वर्षों से सिवान केंद्रीय कारागार में बंद हैं।

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