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जानिए सनातन धर्म के ‘सूर्य’ जैसा हजारों वर्षों में धरती पर नहीं जन्मा ऐसा 'महापुरुष'

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आदि शंकराचार्य

शंकराचार्य पद्धति को सनातन धर्म का सर्वोच्च ‘पीठ’ समझा जाता है लेकिन इस महान परम्परा की शुरुआत किसने की व कौन थे वो आइये जानते हैं उन महान व्यक्तित्व के बारे में जो संसार में ‘आदि शंकराचार्य’ के नाम से प्रसिद्ध हुए,

आदि शंकर का जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी तिथि ई. पू. ५०९ को तथा मोक्ष ई. पू. सन् ४७७ को केरल के कलाडी नामक स्थान पर स्वीकार किया जाता है। उनके पिता शिव गुरु तैतिरीय शाखा के यजुर्वेदी ब्राह्मण थे। वह अपने ब्राह्मण माता-पिता की एकमात्र सन्तान थे। बचपन मे ही उनके पिता का देहान्त हो गया था । शंकर की रुचि आरम्भ से ही सन्यास की तरफ थी। अल्पायु मे ही आग्रह करके माता से सन्यास की अनुमति लेकर गुरु की खोज मे निकल पडे।। वेदान्त के गुरु गोविन्द पाद से ज्ञान प्राप्त करने के बाद उन्होंने सारे देश का भ्रमण किया। मिथिला के प्रमुख विद्वान मण्डन मिश्र को शास्त्रार्थ मे हराया। परन्तुं मण्डन मिश्र की पत्नि भारती के द्रवारा पराजित हुए। दुबारा फिर रति विज्ञान मे पारंगत होकर भारती को पराजित किया।

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