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राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक देशभर में साल 2014 के दौरान लगभग 12,000 किसानों ने आत्महत्या कर ली. देश के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का कहना है कि “लोकतांत्रिक देश में अकाल जैसी परिस्थितियां नहीं पनप पाती”. लेकिन जिन लोगों के सगे-संबंधी अपनी खेती-बाड़ी, कर्ज और अनेक विकट परिस्थितियों के चलते जान दे चुके हैं, उनके परिवार के लिए क्या ये परिस्थितियां किसी अकाल से कम हैं?  1

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