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स्त्रोत – रिपब्लिक हिन्द

नई दिल्ली – भारत के मूल इतिहास को पिछले 67 सालों से चली आ रही काँग्रेस सरकार ने कब्र में दफन कर दिया था। अब केन्द्र में नई सरकार बनने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने देश की मूल इतिहास को कब्र से निकालने का बीड़ा उठा लिया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग ने इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू भी कर दिया है। आने वाले समय में हमारे देश के लोगों को भारत के गौरवपूर्ण इतिहास से साक्षात्कार हो सकेगा। शोधकर्ताओं ने ऐसी उम्मीद जताई है।

 

गौरतलब है कि आजादी के बाद से ही प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू की सरकार ने सारे मूल पुस्तकों को अँधेरे कोठरी में डालकर तथाकथित शिक्षा विभाग वामपंथियों के हवाले कर दिया था। इन लोगों ने भारतीय इतिहास के तौर पर केवल मध्यम भारत का इतिहास को प्रमुखता से आगे बढ़ाया जिसमें कि सिर्फ मुगलों द्वारा भारत पर आक्रमण की दास्ता लिखी गई है। इन लोगों ने भारत पर जिन आक्रांताओं ने कब्जा किया था, उनके बहादुरी के कलमें पढ़ें और उनके शासन के गुणगान किये। शेष भारतीय सभ्यता और संस्कृति को दूषित कर उन्हें खण्डित करने में कोई कसर नहीं छोड़ा।

उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक जो ज्यादातर आजकल पढ़ाएँ जाते हैं, उसमें लिखा है कि एक वक्त मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसी जगहों पर सिंधु घाटी सभ्यता फूल-फल रही थी। आज से करीब 3,500 साल पहले घुमंतू आर्यों के कबीले जब पहाड़ों को पार कर भारत आए और उसके बाद सिंधु घाटी सभ्यता का पतन शुरू हो गया।

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