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बेसहारा ग़रीब बच्चों को नई जिन्दगी दे रहे हैं व्हीलचेयर पर चलने वाले कैप्टन नवीन गुलिया

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“एक व्यक्ति को सशक्त करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उससे सब कुछ छीन लें। जब आपके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचता, तो वहां कोई डर नही बचता।”

कैप्टन नवीन गुलिया व्हीलचेयर पर बैठे जब मुस्कुराते हुए ऐसा कहते हैं, तो विश्वास हो जाता है कि ऐसा कुछ भी नही है जो किया नहीं जा सकता। परिस्थितियां भले ही आपके अनुकूल न हो, लेकिन इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है।

कैप्टन गुलिया का बचपन से ही सपना था कि वह देश के लिए कुछ करें और उनका यही सपना उन्हें सेना में पैरा कमांडो की ट्रेनिंग की तरफ ले गया। लेकिन चार साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह एक प्रतियोगिता के दौरान अधिक ऊंचाई से गिर पड़े और इस दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई।

दो साल तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद जब डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि वह अब चल-फिर नहीं सकते। इसके बाद नवीन ने उन सारी सीमाओं को चुनौती दी, जो उनके देश के लिए कुछ कर गुज़रने के ज़ज़्बे के बीच में आई।

बेसहारा ग़रीब बच्चों को नई जिन्दगी दे रहे हैं व्हीलचेयर पर चलने वाले कैप्टन नवीन गुलियाcloudfront

हालांकि नवीन के कंधों के नीचे के हिस्से उनका भार सहने में सक्षम नही है, परंतु अपने व्हीलचेयर के जरिए वह ऐसे बच्चों का भार उठा रहे हैं, जिनका कोई नहीं। आज, नवीन उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणासोत्र हैं, जो किसी दुर्घटना की वजह से अक्षम हैं। नवीन कहते हैं किः “मैने अपने आप को सिखाया कि ‘मैं जो था उसपर मुझे गर्व होना चाहिए। फिर मैनें खुद को उस गौरव के लायक बनाने के लिए तरीके खोजने शुरू कर दिए।”

कैप्टन नवीन गुलिया ने एक संस्था ‘अपनी दुनिया, अपना आशियाना’ की शुरुआत की। नवीन का ऐसी संस्था शुरू करने के पीछे मकसद था कि उन सैकड़ों ग़रीब बच्चों के लिए न सिर्फ शिक्षा मुहैया कराया जाए, बल्कि उनको काबिल बनाने के लिए हर वह मदद प्रदान किया जाए, जो उन बच्चों के माता-पिता नही कर सकते थे। नवीन गुलिया इस संस्था के मकसद पर कहते हैंः 

“सर्दियों की एक धुंध भारी रात थी। मैनें सड़क पर एक 2 साल की बच्ची के रोने की अवाज सुनी। उसके शरीर पर नाम मात्र के कपड़े थे। उसको कुछ बच्चे अपने साथ लेकर आए थे, जो आसपास ही खेल रहे थे। मैनें उन बच्चों को खोजा और उनको डांट लगाई कि क्यों उन्होंने बच्ची को इस तरह छोड़ा हुआ है। बाद में वे उस बच्ची को लेकर वहां से चले गए। मैने सोचा कि क्यों न ऐसे बच्चों की मदद की जाए। उसी पल से मैने ठान लिया कि मैं गरीब बच्चों की देखभाल करूंगा।”

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