हिन्दुओं के रक्त में सेक्युलर नामक वायरस घुस गया है, इसलिए हिन्दू रामनवमी कैसे मनाएंगे ?

बहिष्कृत सिंधी शिया मुस्लिम साईं बाबा ने दिखाया था जो इसे भगवान् ही मान लिया ?

ब्लॉग : ( वैष्णवी कुमारी, यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) :- अजमेर में स्थित सूफ़ी संत हजरत मोईनुद्दीन चिस्ती की दरगाह को कोई मुसलमान अल्लाह मानकर नहीं पूजता, बल्कि अल्लाह का बंदा मानकर ही पूजते है।

सतयुग में ऋषि विश्वामित्र ने तो अपने योग बल से एक नकली स्वर्ग ही बना दिया था। इतना सामर्थ्य होने के बाद भी उन्हें केवल एक बहुत बड़ा योगी ही माना जाता है, भगवान् नहीं! अगस्त्य मुनि ने पूरे खारे सागर को ही पी लिया था (कुम्भोदार अगस्त्य मुनि) लेकिन इतना महान चमत्कार दिखाने के बाद भी अगस्त्य को ईश्वर या ब्रह्म नहीं माना गया!

प्रश्न ये है कि इनमें से कौनसा चमत्कार इस बहिष्कृत सिंधी शिया मुस्लिम साईं बाबा ने दिखाया था जो इसे भगवान् ही मान लिया ? अगर चमत्कार दिखाया भी होता तो इसे केवल एक महान योगी और ईश्वर भक्त ही माना जा सकता था, ईश्वर तो स्वप्न में भी नहीं ?

अब अगर वेदों में प्रतिपादित भगवान् विष्णु हमारी लौकिक और तुच्छ मनोकामनाओं को फटाफट पूर्ण न कर सकें तो कोई बात नहीं; हम हिन्दू सौदेबाज लम्पट हैं। हमारे भगवान् वही है जो हमारी इच्छाओं को पूर्ण करे। फिर चाहे हमें पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आये मानसिक बीमार मुस्लिम चाँद मियाँ उर्फ साई को ही क्यों न पूजना हो; जिसे उसकी बिरादरी वालों ने इसलिए निकाल दिया था कि वो ‘अनलहक अनलहक'(मैं अल्लाह हूँ, मैं अल्लाह हूँ) बकता रहता था। वही चाँद मियाँ महाराष्ट्र के शिरडी प्रान्त में मस्जिद में जैसे तैसे जीवन काटता था छोटे मोटे चमत्कार पाखंड दिखाकर। विचित्र है कि जो बात उसकी कौम वालों ने नहीं मानी वो आज के सेक्युलर हिन्दू मूर्ख तुरंत मान गए (कि वो भगवान् है)।

वैसे भी आज के वर्तमान हिन्दू समाज में किसी भी तरह की कोई लाज/शर्म तो है ही नहीं ! क्योंकि वैसे भी हज़ारों सालों से गुलामी के आदि हो चुके हैं। अब आज के सेक्युलर हिन्दू के पास स्वाभिमान नाम जैसा कुछ बचा नहीं है; सो हम इस कौम से बेदखल किये हुए साई बाबा को अपने नए भगवान् के रूप में पूजें। और हाँ इस मुस्लिम, अवैदिक, अपौरानिक साई बाबा को पूजने के बाद भी हम हिन्दू धर्मावलंबी ही कहलायेंगे और हिंदुओं के माथे पर काला दाग लगाएंगे!

अब और क्या बचा है? राम नवमी को हम अयोध्या या फिर राम मंदिर नहीं जाएंगे बल्कि नवविकसित तीरथ शिरडी जायेंगे और राम की जगह इस शिया मुस्लिम साई को साई ॐ साई राम (अर्थात माता जानकी के पति) कहकर पूजेंगे। हम हिन्दु इस ‘निष्कासित सिन्धी मुस्लिम साईबाबा’ को तो अब ‘भगवान् राम जो कि सनातन परब्रह्म है’ – उनके रूप में पूज रहे हैं न!