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साल 2013 के आख़िर में भारत के जाने-माने एक्टिविस्ट-संपादक तरुण तेजपाल अपनी एक सहयोगी के यौन उत्पीड़न के आरोप में गोवा में गिरफ़्तार हुए थे. बाद में ये सामने आया कि तहलका पत्रिका 40 करोड़ रुपए के घाटे में थी. तहलका में तरुण का भी मालिकाना हक़ था. इस पत्रिका में कई लोगों ने निवेश किया था. इनमें एक सांसद भी थे.

सवाल उठता है कि ये निवेश क्यों?

हालांकि उस समय कवरेज यौन हमले पर केंद्रित थी, लेकिन तहलका मामले से मीडिया के स्वामित्व, ट्रेनिंग और नाकाम होते बिज़नेस मॉडल को लेकर कई सवाल उठे.

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