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hello ….हाँ सर…आप 10 हज़ार दवाइयों के 100 कार्टन बनवा कर भिजवा दो … मेरा मार्केट अच्छा है …सारी बिकवा दूंगा!! hello ..हाँ …. मै बोल रहा था कि यहाँ के सारे डॉक्टर अपने ही बन्दे है …. आधी दवाइयां तो हमारे गली चौराहा वाले डॉक्टर है खुराना साब लिख द्नेगे आपकी ..बिकुल चिंता मत करो ….100 % माल खप जाएगा आपका”

तो मित्रो ये हाल है हमरे देश में डोक्टारो का ….आज हमारे देश के 80 प्रतिशत से ज्यादा डॉक्टर पैसे लेते है दवा कंपनियों से दवा लिखने के …..
इतना ही नहीं इन्हें विदेशी ट्रिप और festival गिफ्ट्स भी मिलते है

इसके नतीजे – पूरे देश में मरीजों को जबरदस्ती दवा ठूंस दी जाती है ..उसे रोग हो या नहीं …मित्रो इस बात को 100 प्रतिशत दावे के साथ कहूँगा …आपके पर्चे में लिखी आधी दवाइयां सिवाय ढकोसले के कुछ नहीं होती ….क्यूँकी देश में ये पता लगाने वाला कोई नहीं है (सरकारी स्तर पर) कि कौन सा डॉक्टर क्या दावा लिख रहा है ..वो सही है या नहीं

और देश में लाखो लोग सिर्फ दवाई लेकर मारे जाते है ….

डॉक्टर मरीज़ के लिए भगवान् है …पर सरकार ने उसे अपना भगवान् क्यूँ बना रखा है ये नहीं पता!! मित्रो आज देश में जहा होनहार चिकित्सको को PG में एडमिशन नहीं मिल रहा वही …कुछ घूसखोर मालदार और जुगाडू किस्म के चिकित्सक इस न्रशंस हत्य्कांड में शामिल है !!

इसका क्या समाधान है —डॉक्टर दवा कंपनी का ब्रांड नाम न लिखे सिर्फ दवा की साल्ट का नाम लिखे पर्चे पर ..और मेडिकल स्टोरों पर registered फार्मासिस्ट को ही दवा देने का अधिकार हो ….. और वो ही तय करे वो कौन सा ब्रांड देना है मरीज़ को …
इससे ना सिर्फ डोक्टर कम से कम दवा लिखेंगे मरीज़ को ..बल्कि सही भी लिख्नेगे!!
और मरीज़ अनाप शनाप दवा हपकने से बचा जाएगा ..शायद फिर वो बीमारी के बहाने दवा से न मरे !!

जय हिन्द

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