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दुनियाभर में लगभग 2 अरब 10 करोड़ लोग मोटापे के शिकार हैं, जो चिंता का विषय है। मोटापे के प्रकोप और खतरे को देखते हुए 15 से 19 अक्तूबर तक विश्व मोटापा जागरूकता सप्ताह मनाया जाता है। ऐसे में इस समस्या के बारे में जानना बेहत जरूरी है। जानकारी दे रही हैं शमीम खान
मोटापा एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें शरीर पर वसा की परतें इतनी मात्रा में जम जाती हैं कि ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाती हैं। आज दुनिया की कम-से-कम 20 प्रतिशत आबादी मोटापे से ग्रस्त है। मोटापे को बीमारी नहीं माना जाता, लेकिन माना जाता है कि यह 53 बीमारियों की वजह बन सकता है। इसकी वजह से डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हार्ट फेलियर, अस्थमा, कोलेस्ट्रॉल, अत्यधिक पसीना आना, जोड़ों में दर्द, बांझपन आदि का खतरा बढ़ जाता है। खान-पान की गलत आदतें, जीवनशैली में बदलाव और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण यह समस्या लगातार गंभीर हो रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार भारत में स्कूल जाने वाले 20 प्रतिशत बच्चे ओवरवेट हैं।
मोटापे के कारण
तनाव
तनाव के कारण शरीर में कई हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है, जिनमें एड्रीनलीन और कार्टिसोल प्रमुख हैं। इससे शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और पाचन तंत्र गड़बड़ा जाता है, जिससे मोटापा बढ़ता है।
गर्भावस्था
गर्भावस्था के दौरान बच्चे के विकास के कारण महिलाओं का भार बढ़ जाता है। बच्चे के जन्म के बाद भी कई महिलाओं को भार कम करना मुश्किल लगता है और वे मोटापे की शिकार हो जाती हैं।
हार्मोन असंतुलन
हार्मोन असंतुलन पुरुषों और महिलाओं में मोटापे का एक और प्रमुख कारण है, लेकिन यह महिलाओं को अधिक प्रभावित करता है, क्योंकि उनमें हार्मोन असंतुलन अधिक होता है। तनाव, अनिद्रा, गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन और मेनोपॉज के कारण महिलाओं में हार्मोन्स के स्तर में तेजी से बदलाव आता है, जिस कारण पेट के आसपास चर्बी बढ़ जाती है।
बीमारियां
कई बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, कैंसर, हाइपर थारॉइडिज्म और शरीर में कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर भी मोटापे का कारण होते हैं।
दवाओं के दुष्प्रभाव
कुछ दवाएं जैसे गर्भनिरोधक गोलियां, स्टेरॉयड हार्मोन, डायबिटीज, अवसाद और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली दवाओं के कारण भी भार बढ़ जाता है।
अनिद्रा
अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि नींद की कमी मोटापे को बढ़ा देती है। जो लोग सामान्य से कम सोते हैं, वे अधिक कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन खाने को प्राथमिकता देते हैं, जो मोटापा बढ़ने का एक कारण बन जाता है।
शारीरिक सक्रियता की कमी
गैजेट्स के बढ़ते चलन ने शारीरिक सक्रियता में अत्यधिक कमी ला दी है। लोग ऑफिस और घरों में पूरा दिन कम्प्यूटर या टीवी के सामने बिताते हैं, सीढियां चढ़ने के बजाय लिफ्ट का उपयोग करते हैं, पैदल चलने या साइकिल चलाने के बजाय गाडियों में सफर करते हैं, आउटडोर गेम खेलने के बजाय वीडियो गेम खेलना या टीवी देखना पसंद करते हैं। यह मोटापा बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण है।
उम्र बढ़ना
उम्र बढ़ने का मोटापे से सीधा संबंध है। उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे उनकी कैलोरी जलाने की क्षमता प्रभावित होती है। यह समस्या उन लोगों में और बढ़ जाती है, जो शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं होते।
आनुवंशिक कारण
मोटापा बढ़ाने में आनुवंशिक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता मोटे हैं, जिनकी मेटाबॉलिज्म की दर धीमी है या जिनको डायबिटीज है, उनके मोटापे की चपेट में आने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
कैसे घटाएं बढ़ा हुआ वजन
खाली पेट कतई न रहें। हर तीन या साढ़े तीन घंटे में भोजन करें। अनाज अधिक मात्रा में खाएं। कोशिश करें कि ओट, बाजरा, गेहूं आपकी खुराक में शामिल हों।
हरी सब्जियां जैसे पालक, मेथी और सरसों खूब खाएं। जितनी बार भोजन करें, उतनी बार आपकी थाली में एक ऐसा पकवान जरूर हो, जिसमें प्रोटीन पाया जाता हो।
पेट और कमर की चर्बी को कम करने के लिए पवनमुक्तासन, जानुशिरासन, पश्चिमोतानासन, मण्डूकासन, उष्ट्रासन,धनुरासन, भुजंगासन, उतानपादासन, नौकासन तथा शशांकासन करें।
घरेलू नुस्खे
रोज सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिला कर पिएं।
एक गिलास पानी में अदरक के कुछ टुकड़े डाल कर उबाल लें, इस पानी को निथार लें। इसमें दो चम्मच नीबू का रस डाल कर पी लें। यह भूख कम करता है।
एक कप गरम पानी में तीन चम्मच नीबू का रस, 0.25 चम्मच काली मिर्च और एक चम्मच शहद मिला कर दिन में एक बार तीन महीने तक पिएं।
ग्रीन टी भी वजन कम करने के लिए बहुत अच्छी है।
मोटापे के दुष्प्रभाव
ऐसे लोगों को चलने, सांस लेने और बैठने में परेशानी होती है।
शरीर में वसा की मात्रा अधिक होने पर सोडियम इकट्ठा हो जाता है। इससे रक्त का दबाव बढ़ जाता है। यह दिल के लिए काफी नुकसानदेह होता है।
मोटापा टाइप टू डायबिटीज की मुख्य वजह है। वसा की मात्रा अधिक होने पर शरीर इंसुलिन के प्रति रेजिस्टेंट हो जाता है।
ब्रेन स्ट्रोक और कार्डिएक अरेस्ट की आशंका बढ़ जाती है।
शरीर के मध्य भाग में अतिरिक्त भार होना पेल्विस को आगे की ओर खींचता है और कमर के निचले हिस्से पर दबाव डालता है। इस अतिरिक्ति भार को संभालने के लिए कमर आगे की ओर झुक जाती है।
वजन अधिक बढ़ने से रीढ़ की हड्डी के छोटे-छोटे जोड़ों में टूट-फूट जल्दी होती है और डिस्क भी जल्दी खराब हो जाती है।
क्या है उपचार
वजन घटाने का सबसे कारगर तरीका खान-पान को नियंत्रित रखना और नियमित रूप से व्यायाम करना है, लेकिन जिन लोगों के लिए यह उपाय कारगर नहीं होते या जो अत्यधिक मोटे हैं, उनके लिए मोटापा कम करने के लिए कई उपचार भी हैं।
वेरी लो कैलोरी डाइट (वीएलसीडी)
इसमें एक दिन में 1,000 से भी कम कैलोरी का सेवन किया जाता है। इससे भार तो तेजी से कम होता है, लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त और सुरक्षित नहीं है। इसलिए किसी डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
टमीटक (एब्डोमिनोप्लास्टी)
इसकी सलाह उन्हीं लोगों को दी जाती है, जिनका स्वास्थ्य अच्छा होता है। यह उन लोगों के लिए कारगर है, जिनके पेट पर अत्यधिक मात्रा में वसा जमी है या वजन कम करने के कारण पेट की त्वचा ढीली पड़ गई है। सर्जरी के द्वारा अतिरिक्त वसा, त्वचा, मांसपेशियां, ऊतकों को निकाल दिया जाता है।
गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी
वेट-लॉस सर्जरियों को सामूहिक रूप से बैरियाटिक सर्जरी कहते हैं। इसमें से गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी सबसे अधिक प्रचलित है, क्योंकि इसमें दूसरी सर्जरियों की तुलना में जटिलताएं कम होती हैं। यह दो प्रकार से की जाती है। एक तो आपके भोजन की मात्रा को नियंत्रित करके, दूसरा जो भोजन आप खाते हैं, उसमें से पोषक तत्वों का अवशोषण कम करके या दोनों के द्वारा।
लिपोसक्शन
इसमें त्वचा में एक छोटा-सा कट लगा कर एक पतली और छोटी सी टय़ूब को डाला जाता है। डॉंक्टर इस टय़ूब को त्वचा के अंदर शरीर के उन भागों में घुमाते हैं, जहां वसा का जमाव अधिक है। आधुनिक तकनीकों ने लिपोसक्शन को पहले से अधिक सुरक्षित, आसान और कम पीड़ादायक बना दिया है।
वजन नियंत्रित कैसे रखें
नाश्ता नहीं करना मोटापे का एक प्रमुख कारण है। नाश्ता न करने से वजन को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल होता है।
ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर का एक निश्चित समय बना लें। इससे शरीर इस रूटीन को फॉलो करने लगेगा।
सुबह उठने के बाद ज्यादा देर तक भूखे न रहें और रात को सोने से दो घंटा पहले खाना खा लें।
सब्जियां और फल खाएं। इससे आपका पेट भी भरा हुआ लगेगा और खाने में कैलोरी भी कम आएगी।
मेगा मील की बजाय मिनी मील खाएं। हर तीन-चार घंटे में कुछ खाते रहें। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि उन लोगों में वसा का जमाव ज्यादा होता है, जो कम बार में अधिक भोजन खाते हैं।
फाइबर मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखता है, भूख को कम करता है। भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ा दें।
व्यायाम-योग से मोटापे को काबू में रखा जा सकता है। इससे पाचन दुरुस्त रहता है, वसा कम होती है।
ऐसी चीजें जिनमें स्टार्च हो जैसे आलू, मटर या कॉर्न का सेवन कम करें। एक दिन में लगभग छह सौ ग्राम हरी सब्जियां खाने की कोशिश करें।
दिन के पहले हिस्से में ही फल खाएं। ज्यादा मिठास वाले फलों से परहेज करें।

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