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लाभः स्नायुमंडल को बल मिलता है।

चंचल मन एकाग्र होता है।

शारीरिक व मानसिक तनाव दूर करने में मदद मिलती है।

विधिः पद्मासन या सुखासन में बैठें। बायीं हथेली पर दायीं हथेली रखें। दोनों हाथों के अँगूठे तर्जनी (अँगूठे के नजदीक की उँगली) से मिलायें। सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी सीधी रेखा में रहें। आँखें और होंठ सहज रूप से बंद करें। मनःचक्षुशों के आगे अपने इष्टदेव,सदगुरुदेव की प्रतिमा को लायें।

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