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जी हां…सिंहस्थ में आए साधु-संतों के डेरे में एक हिरण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इन साधु-संतों की संगत में रहकर वह भी एक प्रकार का संत बन गया है।

उज्जैन। जी हां…सिंहस्थ में आए साधु-संतों के डेरे में एक हिरण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इन साधु-संतों की संगत में रहकर वह भी एक प्रकार का संत बन गया है। उपवास रखता है, एक दिन में एक किलो किशमिश खाता है। मराठी भाषा समझता है और संतों के अलावा उसे कोई दूसरा छुए तो मारने दौड़ता है।

मां से बिछड़ गया था – महाराष्ट्र के शूलबंजर गांव के घने जंगलों में अपनी मां से बिछड़ा सात दिन का हिरण (अब संतोषगिरि) भी संन्यासी जीवन अपना चुका है। नागा संन्यासियों के साथ एकादशी का व्रत रखने से लेकर नित्य पूजा और चैतन्य धूनी पर इनकी तप साधना में बैठना ही नित्य कर्म हो गया है। 

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