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80 से 90 प्रतिशत बालक विशेषकर दाँत के रोगों से, उसमें भी दंतकृमि के पीड़ित होते हैं। बालकों के अलावा और लोगों में भी दाँत के रोग वर्तमान में विशेष रूप से देखने को मिलते हैं।

–          खूब ठंडा पानी अथवा ठंडे पदार्थ खाकर गरम पानी अथवा गरम पदार्थ खाया जाय तो दाँत जल्दी गिरते हैं।

–          अकेला ठंडा पानी और ठंडे पदार्थ तथा अकेले गरम पदार्थ तथा गरम पानी के सेवन से भी दाँत के रोग होते हैं। इससे ऐसे सेवन से बचना चाहिए।

  • भोजन करने के बाद दाँत साफ करके कुल्ले करने चाहिए। अन्न के कण दाँत में फँस तो नहीं गये इसका ध्यान रखना चाहिए।

  • महीने में एकाध बार रात्रि को सोने से पूर्व नमक एवं सरसों का तेल मिलाकर, उससे दाँत घिसकर, कुल्ले करके सो जाना चाहिए ऐसा करने से वृद्धावस्था में भी दाँत मजबूत रहेंगे।

  • सप्ताह में एक बार तिल का तेल दाँतों पर घिसकर तिल के तेल के कुल्ले करने से भी दाँत वृद्धावस्था तक मजबूत रहेंगे।

  • आईसक्रीम, बिस्कुट, चॉकलेट, ठंडा पानी, फ्रिज के बासी पदार्थ, चाय, कॉफी आदि के सेवन से बचने से भी दाँतों की सुरक्षा होती है। सुपारी जैसे अत्यंत कठोर पदार्थों से खास बचना चाहिए।

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