इस्लाम मजहब से जुड़ जाते ही एक दो पीढ़ियों के व्यक्ति की सोच में ही कैसा फर्क पड़ता है ?

लेकिन यही हिन्दू जब मुसलमान बन गए तो ५:४८ या १३:३१ में कही यही बात को पूर्ण और अंतिम सत्य तो मानते ही हैं।

ब्लॉग: ( केशर देवी, एडिटर – यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) अगर कोई कृष्णभक्त कहे कि कृष्ण ने कहा है कि मैं चाहता तो हर किसी को मेरा भक्त ही पैदा करता लेकिन तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए अलग अलग बनाए हैं। जो मुझे नहीं मानेंगे उनपर विपदाओं के पहाड़ टूटेंगे ये मेरा वादा रहा। पता नहीं कितने हिन्दू उसकी सुनते और पता नहीं कितने हिन्दू उसे क्या क्या सुनाते। इतना तो अवश्य सुनाते कि ये तेरा कृष्ण कैसा भगवान है रे, जो दुनिया में लोगों के बीच अपने को ही भगवान मानने के लिए खूनखराबा करवा रहा है ? खुद ही सब को अपना भक्त बनाकर न भेजता ? जो मारे जा रहे हैं उनके घरवालों की हाय का भागी कौन ?

लेकिन यही हिन्दू जब मुसलमान बन गए तो कुरान की आयात ५:४८ या १३:३१ में कही यही बात को पूर्ण और अंतिम सत्य तो मानते ही हैं और उसे सत्य कराने के लिए हथियार भी उठाते हैं और खुद से हथियार न उठे तो जो उठाये उनके लिए अपना धन लुटा रहे हैं क्योंकि वे कुरान आयात ९:३५ से ९:४० को भी इतना ही अंतिम सत्य मानते हैं।

कैसा फर्क पड़ता है व्यक्ति के सोच में, एक दो पीढ़ियों में ही ? कितनी प्रोग्रामिंग होती होगी दिमाग की जो तर्क और तथ्य से चलना छोड़ देता है आदमी ?

यहाँ वो बंदरों वाले प्रयोग का किस्सा याद आता है जहाँ उंचाई पर टंगे केले के घड को एक भी बन्दर के छूते ही सब पर जोर से पानी की धार मारी जाती थी। इसके चलते सब के दिमागों में ये बात प्रोग्राम हो गई कि केले के घड को छूना नहीं है। यहाँ तक कि जब धार मारना बंद हो गया तब भी वे सब न खुद छूते थे न किसी दूसरे बन्दर को छूने देते थे, उस पर हमला कर देते थे। एक एक करके सब बन्दर बदल दिए गए, लेकिन सब में यही भाव बना रहा, कोई भी बन्दर दूसरे बन्दर को केले के घड को छूने से रोकता ही था।

देखने लायक बात यह थी कि बाकी बातों में बन्दर नार्मल थे, बस वो ऊपर टंगे केले के घड़े के बारे में सोचने से भी खुद को ही रोक रहे थे।

कुछ ऐसी ही बात हिन्दू के सेक्युलर हो जाने से होती है जो वो भी ऐसी बातों पर सवाल उठाने से डरता है। हाँ, वेद, पुराण, उपनिषदादि पर आलोचना करते वक्त उसको कोई रोक नहीं सकता, खुद का घोर अज्ञान भी नहीं।

डार्विन बाबा बन्दर को मानव का पूर्वज मानते थे आप को पता ही होगा! और हाँ, मदारियों का धर्म या मजहब क्या होता है यह भी देखिये कभी नाम पूछकर ?

कुछ कहेंगे ? सहमत हैं तो शेयर या कोपी पेस्ट का अनुरोध तो है ही ….