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(काश्मीर में भारतीय सेना और सुरक्षाबलों की शानदार कार्यवाही पर विश्वास और गर्व दिखाती मेरी नई कविता) रचनाकार- गौरव चौहान इटावा 9557062060

धन्य धन्य भारत के फौजी, धन्य तुम्हारी छाती है,
देख तुम्हारे भुजदंडों को, महबूबा शर्माती है,

बहुत सही थी बंदर घुड़की, इन आतंकी झुंडों की,
झेली हमने बहुत अभी तक, पत्थरबाजी,गुंडों की,

खुले आम भारत से नफरत, गद्दारी का साया है,
खुली बगावत के नारे हैं, संविधान घबराया है,

बुद्धिजीवियों का समूह, किस बिल में आज समाया है,
अब तक नही किसी ने कोई पुरस्कार लौटाया है,

आगे आप खुद विडियो में ही सुने 

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