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मोची की बेटी ने नंगे पैर दौड़ कर जीता था स्वर्ण पदक, अब साथ में दौड़ेगा हिन्दुस्तान

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यह कहानी एक ऐसी लड़की की है, जिसके हौसले को आज पूरा हिन्दुस्तान सलाम कर रहा है। उसने तमाम लोगों को यह सीख दी है कि तमाम अभावों के बाद भी अगर आपके पास कुछ कर दिखाने का जज्बा है, तो आप लाखों लोगों के प्रेरणासोत्र बन सकते हैं।

यह कहानी उस 14 साल की छोटी सी लड़की सयाली माहिशुने की है, जिसके पिता मंगेश माहिशुने मोची हैं। वह दिन-रात मेहनत कर के दूसरों के जूते मरम्मत तो करते हैं, लेकिन अपनी बेटी के लिए जूते खरीदने में भी असमर्थ हैं। लेकिन कहते हैं न कि उड़ने के लिए परों की नही, जज्बे की जरूरत होती है।

ठीक ऐसा ही हुआ। सयाली माहिशुने जब गर्म रेस के ट्रैक पर दौड़ी, तो उसके पांव में जूते नहीं थे। उसका अभाव उसके जज्बे के आगे ठंडा पड़ गया। उसे तो अभी उड़ना था।

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