दुनिया को थर्राने वाले दुर्दांत मुस्लिम आतंकी लादेन की सल्तनत अब उसके बेटे ने संभाल ली है और….

मुस्लिम आतंकी देन के बेटे हमजा बिन लादेन को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर दिया है।

नई दिल्ली। दुनिया को थर्राने वाले दुर्दांत आतंकी ओसामा बिन लादेन के बेटे हमजा बिन लादेन को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर दिया है। अमेरिका के मुताबिक हमजा बिन लादेन आतंकी संगठन अल कायदा को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है और वो दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। 2 मई 2011 के दिन पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी नेवी के सील कमांडो ने दुनिया के मोस्ट वांटेड आतंकी ओसामा बिन लादेन को मार गिराया। इस ऑपरेशन में भले ही ओसामा बिन लादेन और उसका बेटा खालिद मार गिराया गया था, लेकिन उस रोज हुई एक छोटी सी चूक आज अमेरिका को भारी पड़ रही है और उस चूक का नाम है हमजा बिन लादेन। ओसामा बिन लादेन का छोटा लड़का हमजा लादेन खानदान के सफाए के बावजूद बच गया था क्योंकि ये उस वक्त अपने परिवार के साथ था ही नहीं।

हमजा बिन लादेन उस वक्त 15-16 साल का रहा होगा। यानी अब उसकी उम्र 20-21 साल होगी, लेकिन इतनी सी उम्र में लादेन का ये खून अमेरिका के लिए अपने पिता से ज्यादा खतरनाक बन चुका है। अमेरिका ने हमजा को ग्लोबल टेररिस्ट यानी दुनिया का खतरनाक आतंकी घोषित किया है। ग्लोबल टेररिस्ट उसे घोषित किया जाता है, जिससे आतंकी हमलों की साजिश रचने, उसे अंजाम देने का खतरा हो। अमेरिका के मुताबिक हमज़ा बिन लादेन से अमेरिकी जनता की सुरक्षा को खतरा है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था को हमज़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

लेकिन, खतरा सिर्फ अमेरिका को नहीं है, हिंदुस्तान के लिए भी हमजा बिन लादेन एक नया खतरा बनकर उभर रहा है क्योंकि हमजा बिन लादेन उसी अल कायदा का आतंकी बन चुका है, जिसे पाकिस्तान शह देता आया है। पाकिस्तान की ये फितरत रही है कि वो हिंदुस्तान के खिलाफ खड़े होने वाले हर आतंकी गुट का समर्थन करता है। इसलिए अल कायदा और हमजा का मजबूत होना भारत के लिए भी खतरे की बात है। फिलहाल अमेरिका ने हमजा बिन लादेन को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करके उस पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं।

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कम्युनिस्ट इंशा अल्लाह क्यों बोलता है, मुझे उम्मीद है ये पोस्ट पढ़कर अब तक आपको समझ में आ गया होगा!

Chennai: Muslim children hug each other during the celebration of 'Eid-ul-Fitr' at a School ground in Chennai August 9, 2013. The Eid al-Fitr festival marks the end of the Islamic holy fasting month of Ramadan. ..Photo by SL Shanth Kumar

ब्लॉग : शरद श्रीवास्तव –  धर्म जनता के लिए अफीम है। ये मार्क्सवाद का मूलभूत सिद्धान्त है। लेकिन ये कभी भी आश्चर्य की बात नहीं रही की एक धर्म हीन कम्युनिस्ट कब कैसे और क्यों एक मुस्लिम कम्युनलिस्ट के साथ खड़ा मिलता है।

साम्प्रदायिकता से लड़ने वाले मुस्लिम सांप्रदायकिता से हाथ मिलाते हमेशा नजर आते हैं। तमाम सेक्युलरिज्म एक धर्म के आगे नतमस्तक नजर आता है।

हकीकत ये है की मार्क्सवाद और मुस्लिम साम्प्रदायिकता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों में बहुत सी समानताएं हैं। कॉमन गोल यानी उद्देश्य हैं। इसीलिए दोनों एक दूसरे के पूरक और सहायक हैं।

अब विस्तार से : मुस्लिम धर्म एक किताब कुरान से चलता है। कुरान में जो लिखा है वो बदला नहीं जा सकता उसमे कोई फेरबदल मुमकिन नहीं। मार्क्सवाद या कंम्युनिस्ट मार्क्स की किताब दास कैपिटल को वही दर्जा देते हैं। करीब डेढ़ सौ साल पहले लिखी किताब में कोई फेरबदल मुमकिन नहीं। पूर्णतया वैज्ञानिक लेखन। समस्त सृष्टि कैसे चले इसका पूरा विवरण कुरान और दास कैपिटल में मौजूद है।

यूँ तो बाकी लोगों को किसी विषय पर बात करने के लिए उसे समझना पड़ता है , पढ़ना पड़ता है। मेहनत करनी होती है। लेकिन एक मौलवी साहब और एक मार्क्सवादी साहब दुनिया में किसी भी विषय पर बोल सकते हैं , अपनी बात कह सकते हैं। बल्कि ये भी बता सकते हैं की जनता को उस विषय के बारे में क्या करना चाहिए।

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मौलवी साहब और मार्क्सवादी साहब दोनों लोग ये काम कुरान शरीफ और दास कैपिटल शरीफ की रौशनी में करते हैं। यकीन न हो तो आप किसी भी विषय पर इनकी राय लेकर देख लीजिये , एक फतवा देगा दूसरा जनता को होने वाली तकलीफो के बारे में बताएगा।

अगर आप एक मुस्लिम भाई से इस बारे में चर्चा करना चाहेंगे वो कहेगा की पहले कुरान पढ़कर आओ। यही बात आपसे कम्युनिस्ट भाई भी कहेगा , जाओ पहले मार्क्स को पढ़कर आओ।

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