कभी चलाते थे किराने की दुकान और आज हैं 104 सैटेलाइट लांच टीम के साइंटिस्ट

 

रायपुर : जिंदगी में सपने तो हम सभी देखते हैं, लेकिन क्या हर कोई उसे पूरा कर पाता है। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने सपने को हकीकत का रूप दे पाए। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे है उनकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

छत्तीसगढ़ के छोटे से शहर कोरबा के गांव में किराने की दुकान चलाने वाले एक युवक ने इसरो का एग्जाम दिया और पांचवीं रैंक हासिल कर साइंटिस्ट बने। बुधवार को इसरो ने जिस रॉकेट से 104 सैटेलाइट भेजकर रिकार्ड बनाया, उसे बनाने में इस युवक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। काेरबा शहर के बालगी इलाके में पुश्तैनी किराना दुकान चलाने वाले विकास अग्रवाल ने मेहनत के दम पर ऊंची उड़ान भरी है।

6वीं कक्षा से किराना दुकान में लोगों को सामान बेचते हुए खाली समय में सेल्फ स्टडी करने वाले विकास ने साइंटिस्ट बनने का सपना देखा था। लगातार कड़ी मेहनत के दम पर पिछले साल वो सपने को हकीकत में बदलने में कामयाब रहे। अब वे इसरो में साइंटिस्ट हैं।इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने बुधवार को एक साथ 104 उपग्रह लॉन्च कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। पीएसएलवी 37 के तहत यह उपग्रह लॉन्च किए गए।

देश की साख बढ़ाने वाले इस मिशन में प्रदेश के 26 साल के यंग साइंटिस्ट विकास अग्रवाल का भी कॉन्ट्रीब्यूशन रहा है। विकास इन दिनों इसरो के त्रिवेंद्रम सेंटर में हैं। यहां सैटेलाइट को लेकर जाने वाले रॉकेट तैयार किए जाते हैं।

अगस्ता-वेस्टलैंड घोटाले से भारत ने लिया सबक, अब देश में बनेंगे वीवीआईपी हेलिकॉप्टर

अगस्ता-वेस्टलैंड घोटाले से भारत ने लिया सबक, अब देश में बनेंगे वीवीआईपी हेलिकॉप्टर

कांग्रेश द्वारा अगस्ता-वेस्टलैंड घोटाले के बाद अब वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीद घोटाले के दाग धोने और भविष्य में ऐसे विवादों की जमीन खत्म करते हुए भारत ने अब देसी वीवीआईपी हेलीकॉप्टर निर्माण शुरु कर दिया है। रक्षा उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इस नए हेलीकॉप्टर को तैयार कर रहा है जिसे नाम दिया गया है इंडियन मल्टीरोल हेलीकॉप्टर।

बंगलोर में 11वें एयरो-इंडिया शो के दौरान एचएएल ने आइएमआरएच के एक लाइफ लाइज मॉडल को पेश किया।

रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने मंगलवार को वायुसेना स्टेशन येलहंका पर नए हेलीकॉप्टर के मॉकअप मॉडल का मुआयना किया. माना जा रहा है कि सबकुछ ठीक चला तो अगले पांच सालों में यह हेलिकॉप्टर तैयार हो जाएगा.

एचएएल के मुताबिक कंपनी की योजना 12 टन श्रेणी का एक ऐसा हेलिकॉप्टर तैयार करने की है जो 20 हजार फुट की ऊंचाई पर 3500 किलो वजन के साथ आसानी से उड़ान भर सके. इस तरह के हेलिकॉप्टर का सैन्य इस्तेमाल के लिए भी किया जा सकेगा.

एचएएल अधिकारियों के अनुसार इस नए हेलिकॉप्टर का उपयोग दुर्गम इलाकों में सैनिकों को पहुंचाने के लिए, युद्ध के दौरान खोज और बचाव अभियानों में, एंटी सर्फेज ऑपरेशन, वीआईपी परिवहन और एअर एंबुलेंस के तौर पर किया जा सकेगा। सेना और वायुसेना के लिए तैयार किए जाने वाले हेलिकॉप्टरों में अधिक ऊंचाई पर और ज्यादा भार ले जानी की क्षमता होगी। वीआईपी वर्जन जहां 18 लोगों को ले जा सकेगा।

वहीं सैन्य संस्करण 24 सैनिकों को ले जाने की क्षमता वाला होगा। नया हेलिकॉप्टर एक बार में 500 किमी तक सफर कर सकेगा।

इसका एक संस्करण खासतौर पर नौसेना के लिए भी तैयार करने की योजना है। नए उड़नखटोलों को समंदर की गहराइयों में छुपी पनडुब्बियों को खोजकर खत्म करने की खूबियों से लैस किया जाएगा।

अब चीन और पाक की नापाक हरकत पर रहेगी अवाक्‍स की निगाह

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नई दिल्ली (13 फरवरी) : अगर देश की आसमानी सरहद से दुश्मन का कोई लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल या फिर ड्रोन देश में घुसने या फिर हमला करने की कोई भी नापाक कोशिश करे तो उसकी अब खैर नहीं होने वाली क्योंकि अब उसकी ऐसी नापाक हरकत का जवाब देने के लिए भारतीय वायुसेना को देसी आसमानी दिव्य आंख मिलने जा रही है।

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वायुसेना को मिलने जा रहा “एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम” यानी अवाक्‍स करीब 400 किलोमीटर तक दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखेगा। बेंगुलरु में शुरू होने जा रहे एयररो इंडिया शो में इसे भारतीय वायुसेना में शामिल कर लिया जाएगा। 14 फरवरी को डीआरडीओ की ओर से वायुसेना को इससे अच्छा वैलेंटाइन गिफ्ट कुछ और नहीं हो सकता है! ऐसे और दो सिस्टम वायुसेना में शामिल होंगे।

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यह अवाक्‍स पूरी तरह से देश में ही बना स्वदेशी प्रोडक्ट है। इसमें कई ऐसे अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं जो देश में ही बनकर तैयार हुए हैं। इसी साल 26 जनवरी को राजपथ पर भी देसी “अवाक्स” की उड़ान लाखों लोग देख चुके हैं। इसके आने से पाकिस्तान और चीन से मिलने वाली आसमानी चुनौती से निपटना पहले से बहुत आसान हो जाएगा क्योंकि इसके आने से वायुसेना का सुरक्षा घेरा काफी मजबूत हो जाएगा। एयरबोर्न निगरानी सिस्टम से हवाई युद्ध में काफी असर पड़ेगा।

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विश्व रिकॉर्ड: एक साथ 115 सैटेलाइट लांच करेगा भारत का ISRO, दुनिया में कोई यहां तक नहीं पहुंचा

ISRO एक साथ लांच करेगा 115 सैटेलाइट, बनेगा कभी ना टूटने वाला विश्व रिकॉर्ड

बंगलुरु : Indian Space Research Organisation (ISRO) आने वाली 15 फरवरी को इतिहास बनाने की तैयारी कर रहा है। क्योंकि इस दिन ISRO 104 सैटेलाइट लांच करेगा जोकि World Record होगा।

खबर के मुताबिक, ये लांचिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेसकोर्ट से होगी। इसरो ने खुद इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि हमने एक साथ 104 सैटेलाइट को 15 फरवरी सुबह 9 बजे सूर्य के समकालिक कक्ष में भेजने का फैसला लिया है।

ये दूरी पृथ्वी से करीब 500 किमी दूर है। इन सैटेलाइटों में से तीन भारतीय, 88 यूएस और बाकी की इस्राइल, कजाखस्तान, नीदरलैंड, स्विटजरलैंड, यूनाइटेड अरब अमीरात से होंगी।

बता दें कि एक 320 टन के रॉकेट (PSLV-C37) की मदद से इन सैटेलाइटों को लांच किया जाएगा। इसमें 1500 किलो का अतिरिक्त भार भी शामिल होगा। जिसमें 650 किलो के रिमोट sensing Cartosat-2 और दो (IA and IB) 15-15 किलो के नैनो सैटेलाइट शामिल होगें।

हालांकि, इंडियन स्पेस एजेंसी 22 जून को एक साथ 20 सैटेलाइट लांच कर चुकी है। जबकि 15 फरवरी को एक साथ 104 मिसाइल लांच होने से जून 2014 में 37 सैटेलाइट एक साथ लांच होने का रिकॉर्ड टूट जाएगा। इससे पहले साल 2013 में अमेरिका की नासा ने 29 सैटेलाइट एक साथ लांच कर रिकॉर्ड बनाया था।

गणतंत्र दिवस के मौके पर – टाटा ने बनाई दुनिया की सबसे घातक तोप , खासियत पढ़कर होश उड़ जाएंगे

vvvvvvvvvदिल्ली- भारत के सबसे प्रतिष्ठित समूह टाटा ने दुनिया की सबसे बेहतरीन तोप बनाकर एक इतिहास रच दिया है | इस तोप के आने के बाद पूरी दुनिया के हथियार बाजार में खलबली मच गयी है | टाटा की यह तोप दुनिया की सबसे बेहतरीन मानी जाने वाली बोफोर्स से लगभग दो गुनी दूरी तक मार करने में सक्षम है |

तोप ने मचा दी खलबली –
टाटा समूह ने समूह ने देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के हथियार बाजार में 155 एमएम की 52 कैलीबर वाली तोप उतार कर खलबली मचा दी है | बोफोर्स तोपों से अधिक क्षमता रखने वाली यह तोप देश के निजी क्षेत्र की ओर से रक्षा बाजार में एक मजबूत दावेदारी के रूप में सामने आई है |

दुश्मनों की नींद उड़ाने आ गया आईएनएस खांदेरी

आईएनएस खांदेरी

नई दिल्ली : समुद्र के भीतर भारत की Killer tiger Shark को देखकर आपका सीना भी गर्व से चौड़ा हो जाएगा। DNA में 2 मई 2016 को हमने आपको समुद्र में भारत की सबसे नई ताकत.. INS कलवरी Submarine के पहले Sea Trial के बारे में बताया था। INS कलवरी पनडुब्बी भारत के दुश्मनों के लिए खौफ का दूसरा नाम बनी हुई है.. लेकिन अब भारत की एक और Submarine दुश्मनों की नींद उड़ाने के लिए समुद्र में उतर चुकी है। इस पनडुब्बी का नाम है INS खांदेरी ।

भारतीय नौसेना को मजबूत बनाने की दिशा में आज देश को एक बड़ी कामयाबी मिली है। मुंबई के मझगांव डॉक पर तैयार की गई कलवरी क्लास की दूसरी Submarine खांदेरी को अपने पहले Sea Trial के लिए उतार दिया गया है। आज से करीब 8 महीने पहले मई 2016 में पहली कलवरी Submarine INS कलवरी को मुंबई के मझगांव डॉक से ही Launch किया गया था। और अब कलवरी की Partner In Sea यानी समुद्र की साथी.. INS खांदेरी को भी Launch कर दिया गया है। वर्ष 2005 में इस प्रोजेक्ट की शुरूआत हुई थी और आज भारत की ये दोनों Killer Sharks.. दुश्मनों को मारने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ा चुकी है।

कलवरी…Scorpene Class की Submarines हैं.. जिन्हें पहली बार भारत में.. फ्रांस के सहयोग से बनाया जा रहा है। INS खांदेरी कलवरी क्लास की दूसरी सबमरीन है। आप सोच रहे होंगे कि यहां कलवरी क्लास का क्या मतलब है…तो हम आपको बता दें कि नौसेना की प्रथा के मुताबिक नए डिजाइन के युद्ध पोत या पनडुब्बी को पहले एक नाम दिया जाता है। और बाद में उसी डिजाइन पर बनने वाले दूसरे युद्ध पोतों और पनडुब्बियों को उस क्लास का माना जाता है । जैसे कलवरी अपनी श्रेणी की पहली सबमरीन थी और अब कलवरी क्लास की दूसरी पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है।

खांदेरी एक Island का नाम है। जिस पर 17वीं शताब्दी में मराठा योद्धाओं ने एक किले का निर्माण किया था ..इससे मराठा योद्धाओं को दुश्मनों पर काफी बढ़त मिल जाती थी और इसी Island के नाम पर इस पनडुब्बी को ये नाम मिला है। INS खांदेरी भी भारतीय नौसेना के लिए एक तैरते हुए किले की तरह होगी .. जिससे दुश्मन पर हमला करना भारत की नौसेना के लिए बाएं हाथ का खेल होगा। INS खांदेरी  Guided Weapons के दम पर दुश्मन पर सटीक वार कर सकती है । ये Submarine, Torpedo और WLT यानी Weapons Launching Tubes की मदद से दुश्मन पर हमला कर सकती है ।

  • Stealth feature की वजह से ये Submarine अपने दुश्मन को किसी तरह की आहट नहीं देती और जब तक दुश्मन को कुछ समझ में आता है ये उसका काम तमाम कर देती है।
  • INS  खांदेरी  किसी भी मौसम में काम कर सकती है, और इसमें संचार के सभी आधुनिक उपकरण लगे हुए हैं।
  • इस Submarine को एक विशेष तरह के स्टील से तैयार किया गया है ताकि ये समुद्र की गहराई में भारी से भारी दबाव को भी सह सके।
  • भारत कुल मिलाकर 6 कलवरी क्लास पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है..जिसमें से 2 का Sea Trial शुरू हो चुका है। इन Submarines को फ्रांस के सहयोग से बनाया जा रहा है। जहां इस श्रेणी की पनडुब्बियों को Scorpene Submarine कहा जाता है।

वैसे भारत सरकार को उम्मीद है कि भारत जल्द ही ऐसा देश बन जाएगा जो ना सिर्फ खुद पनडुब्बियों का निर्माण करेगा.. बल्कि दूसरे देशों को पनडुब्बियां बेच भी पाएगा INS खांदेरी को भारतीय नौसेना के अच्छे दिन वाले भविष्य के तौर पर देखा जा रहा है… इसलिए आज आपको ये पता होना चाहिए…कि समुद्र के अंदर भारत की ताकत किन गहराइयों को नाप रही है..

किसान को महीने में डेढ़ लाख की कमाई, खेती में अगर फायदा ना हो रहा हो तो अपना…..

खेती में अगर फायदा ना हो रहा हो तो अपना तरीका बदलो।

राजस्थान : किसान को अगर खेती में फायदा नहीं हो रहा हो तो आप अपना व्यवसाय नहीं बल्कि अपना तरीका बदल लो। फिर देखो किसान परिवार की किस्मत बदलते देर नहीं लगती। इस बात का ताजा उदाहरण है राजस्थान के सीकर जिले के खाचरियावास का किसान भगवान सहाय धायल।

कुएं में पाताल की राह पकड़ चुका भूजल स्तर धायल के सामने बड़ी समस्या था। 

किसान भगवान सहाय धायल को खेती से जीवन यापन करना मुश्किल हो पा रहा था, क्योंकि फसलों के लिए पानी की कमी पडऩे लगी थी। ऐसे में किसान भगवान सहाय धायल ने थाइलैण्ड से इजरायली बोर की पौध मंगवाकर खेत में झाडिय़ां लगा दी। नतीजा यह रहा कि कम समय और कम पानी में ही बम्पर पैदावार व कमाई होने लगी।

आगे पढ़े > सात बीघा में  600 पौधे लगाए

विडियो देखे : ये हैं विश्व का सबसे बड़ा ट्रक जिसे देखकर आप चौक जाएंगे…

विडियो डेस्क : आपने दुनियाभर में कई बड़ी-बड़ी कार, बस, टैक्सी, ट्रक, गाड़ियां, ट्रेन, क्रेन, हवाई जहाज, पनडुब्बी आदि देखी ही होगी। दुनिया में हर गाड़ी अपने अलग-अलग तरिके की बनी होती हैं और ज्यादातर गाड़ीयों की लंबाई भी अलग-अलग होती हैं।

आज हम आपको दुनिया का सबसे बड़ा लंबा वाला ट्रक दिखाएंगे। दुनिया का सबसे बड़ा व लंबा ट्रक अॉस्ट्रेलिया में हैं।

ये ट्रक काफी बड़ा हैं। इस ट्रक की खासियत ये हैं कि ये ट्रक 200 टन तक वजन ले जाने की क्षमता रखता हैं। साथ ही ये ट्रक 110 अतिरिक्त व्हील उठा सकता हैं।

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