‘बाहुबली’ के बाद 600 करोड़ की ‘महाभारत’ से हिला बॉलीवुड, ये सितारे करेंगे कृष्ण और अर्जुन का रोल

कुछ फिल्में इतनी जबर्दस्त होती है कि वर्षों बाद भी हमारे जहन में उससे जुड़ी हुई बातें बस जाती है, जैसे फिल्म ‘शोले’ को ही लीजिए. शोले के डायलॉग अभी भी हिट है जिसका इस्तेमाल हम अपनी जिंदगी में अक्सर करते हैं। इसी तरह 90 के दशक में टीवी पर ‘महाभारत’ सीरियल आता है, जिसकी टीआरपी आसमान छूती थी। हालांकि, इसके बाद ‘महाभारत’ को कई प्रोडक्शन हाउस ने बनाया लेकिन जो धमाकेदार सफलता बीआर चोपड़ा की महाभारत को मिली वो किसी महाभारत को नहीं मिल पाई। टीवी सीरियल के बाद अब महाभारत फिल्म के रूप में आपके सामने होगी। इस फिल्म को पेश करेंगे बाहुबली के निर्देशक एस.एस राजमौली। ‘बाहुबली-2’ इसी साल 28 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म के रिलीज के बाद राजमौली महाभारत फिल्म पर काम शुरू करेंगे।

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जानिये आखिर क्यों मुस्लिम महिलाएं इस्लाम छोड़कर अपना रही है हिन्दू धर्म ?

आजकल ये बहुत देखने को मिल रहा है कि मुस्लिम महिलायें इस्लाम छोड़कर हिन्दू धर्म अपना रही है। आखिर ऐसा क्या है इस्लाम में जो उन्हें धर्म परिवर्तन अपनाने के लिए मजबूर कर रहा है। हाल ही में गाजियाबाद की शबनम नाम की मुस्लिम महिला हिन्दू धर्म अपनाकर दामिनी बन गई। दामिनी के बाद अब और भी पीड़ित मुस्लिम महिलाओं का हौसला बढ़ा है और वे हिन्दू धर्म कि ओर बढ़ रही है।

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शबनम क्यों बनी दामिनी ?
तीन तलाक और हलाला के नियम से दुखी शबनम ने हिंदू धर्म अपना कर दामिनी बन गई। दामिनी इस्लाम धर्म के नाम पर हो रही महिलाओं की दुर्दशा पर खुलकर उद्गार व्यक्त किए। 25 वर्षीय दामिनी ने कहा कि इस्लाम धर्म के नाम पर लगभग सभी मुस्लिम महिलाएं किसी न किसी प्रकार से यातनाएं झेल रही हैं।

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कम उम्र में उनका निकाह कर दिया जाता है, फिर उन पर जल्दी जल्दी बच्चे पैदा करने का दबाव दिया जाता है। बच्चा न पैदा होने पर उन्हें तमाम शारीरिक यातनाएं दी जाती हैं और छोटी छोटी बातों पर तलाक दे दिया जाता है। तलाक देने के बाद महिलाओं की स्थिति और भी बदतर हो जाती है।

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दामिनी का कहना है कि तलाक के बाद शौहर से दोबारा निकाह करने के लिए मुस्लिम समाज द्वारा चलाई गई प्रथा हलाला से गुजरना होता है। उसने बताया कि तलाक के बाद उसके शौहर ने फिर से साथ रहने के लिए उसका हलाला भी कराया और दोस्त के हवाले कर दिया। तीन महीने बाद जब वह पति के पास पहुंची तो उसे स्वीकार करने के बजाय पति ने वेश्यावृत्ति में धकेल दिया।

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बीजेपी केवल राम के नाम से वोट लेती रही उधर नवाज शरीफ पाकिस्तान में श्रीराम मंदिर बनवा रहे हैं।

विवादों से चोली दामन का साथ रखने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अपनी इमेज को बदलने का प्रयास शुरू कर दिया है।

नवाज शरीफ ने  पंजाब प्रांत में ऐतिहासिक कटासराज राम मंदिर के दौरे के दौरान कहा कि पाकिस्तान का प्रधानमंत्री होने के नाते मेरे लिए हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और अन्य सभी लोग मेरे लिए बराबर हैं।

नवाज ने कहा कि हम पाकिस्तान की इमेज को माइनॉरिटी फ्रेंडली देश के रूप में बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

इतना ही नहीं नवाज ने कटासराज राम मंदिर में लोगों का अभिवादन करते हुए कहा, सलाम, नमस्ते, सतश्री अकाल, गुड मॉर्निंग मेरे भाइयो। नवाज ने मंदिर परिसर में वॉटर फिल्ट्रेशन प्लांट का उद्‌घाटन किया और कटासराज मंदिर का जीर्णोद्धार करवाने का भी आदेश दिया है।

उन्होंने मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों की मेजबानी, सुरक्षा और उनके पूजा स्थलों के विस्तार के लिए अधिकारीयों को निर्देश भी दिए।

बता दें कि पाकिस्तान स्थित 900 साल पुराना कटासराज राम मंदिर दक्षिण एशिया में हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।

भगवान श्रीकृष्ण ने बसाई थी ये तीन नगरी……

द्वारका- भारत के पश्चिम में समुन्द्र के किनारे पर बसी है। आज से हजारों वर्ष पूर्व भगवान कॄष्ण ने इसे बसाया था। कृष्ण मथुरा में उत्पन्न हुए, गोकुल में पले, पर राज उन्होंने द्वारका में ही किया। यहीं बैठकर उन्होंने सारे देश की बागडोर अपने हाथ में संभाली। द्वारका उस जमाने में देश की राजधानी बन गई थीं। बड़े-बड़े राजा यहां आते थे और बहुत-से मामले में भगवान कृष्ण की सलाह लेते थे। इस जगह का धार्मिक महत्व तो है ही, रहस्य भी कम नहीं है। कहा जाता है कि कृष्ण की मृत्यु के साथ उनकी बसाई हुई यह नगरी समुद्र में डूब गई। आज भी यहां उस नगरी के अवशेष मौजूद हैं।

इंद्रप्रस्थ- प्राचीन भारत के राज्यों में से एक था इंद्रप्रस्थ। महान भारतीय महाकाव्य महाभारत के अनुसार यह पांडवों की राजधानी थी। यह शहर यमुना नदी के किनारे स्थित था। वर्तमान में यह स्थान राजधानी दिल्ली में स्थित है। महाभारत काल में इसे पांडव पुत्रों के लिए बनवाया गया था। द्वारिका की तरह ही इस नगर का निर्माण भी मय दानव और भगवान विश्वकर्मा से ही संभव हो पाया था। पांडवों ने श्रीकृष्ण के साथ मय दानव की सहायता से उस शहर का सौन्दर्यीकरण किया। वह शहर एक द्वितीय स्वर्ग के समान हो गया।

बैकुंठ- बैकुंठ धाम को भगवान श्रीकृष्ण का धाम कहा जाता है। इस धार्मिक स्थान को कई नाम से जाना जाता है जैसे साकेत, गोलोक, परमधाम, ब्रह्मपुर आदि। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने अरावली की पहाड़ी पर कहीं छोटा-सा नगर बसाया था। भू-शास्त्र के अनुसार भारत का सबसे प्राचीन पर्वत अरावली का पर्वत है। मान्यता है कि यहीं पर श्रीकृष्ण ने बैकुंठ नगरी बसाई थी।

देखें: 90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इस देश में हैं राम की एक और अयोध्या!

Indonesian people participate in “Indonesia Menari”, an Indonesian dance event, in Jakarta on November 24, 2013. The event is held to encourage people to dance. PHOTO / ADEK BERRY (Photo credit should read ADEK BERRY/AFP/Getty Images)

मुस्लिमों की सबसे बड़ी आबादी वाले देश इंडोनेशिया की ये बातें जानते हैं आप?

इंडोनेशिया एक ऐसा देश है जिसकी कई ऐसी बातें हैं जो आप नहीं जानते होंगे। यहां मुस्लिमों की सबसे ज्यादा जनसंख्या बसती है। ऐसी ही कई बातें जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें…

कितने दिनों तक बाणों की शय्या पर रहे गंगा पुत्र भीष्म, क्या जानते हैं आप?

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत ग्रंथ में कई प्रमुख पात्र हैं, भीष्म पितामाह भी उनमें से एक हैं। भीष्म पितामाह एकमात्र ऐसे पात्र हैं जो महाभारत की शुरूआत से अंत तक इसमें बने रहे। धर्म ग्रंथों के अनुसार, 21 फरवरी, शनिवार को भीष्म पितामाह की जयंती है। इस अवसर पर हम आपको भीष्म पितामह से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं, जो कम लोग ही जानते हैं-

भीष्म पितामाह से जुड़ी रोचक बातें जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

केरल में हिन्दू आस्था का अंतिम सशक्त केन्द्र अब इस्लामी व इसाईओं के निशाने पर….

केरल में बचा रह गया हिन्दू आस्था का अंतिम सशक्त केन्द्र

ब्लॉग : (केशर देवी) सबरीमाला : केरल में बचा रह गया हिन्दू आस्था का अंतिम सशक्त केन्द्र क़ौमी-इस्लामी-इसाई दुरभिसन्धि के निशाने पर है। कुछ दिनों पहले एक मित्र केरल गये थे तो उनके एक स्टेटस पर मैंने पूछा था – वहाँ के 54% हिन्दू कहाँ हैं? उत्तर यह है कि apartheid अर्थात नस्लभेद के केरलीय संस्करण के शिकार हो दोयम श्रेणी के नागरिक बन चुके हैं।

हिन्दुओं की जनसंख्या में 20% पिछड़े समुदाय से आने वाले एझावा हैं जिनसे कसाई-इसाई युति के सत्ताधारी इसलिये नाराज हैं कि ‘पिछड़े’ मोदी के उदय के साथ ही यह वर्ग राजनीतिक निष्ठा बदलने लगा। अस्तु।

वहाँ सबरीमाला एकमात्र स्थान है जो वर्ष में एक करोड़ श्रद्धालु आकृष्ट करता है। तमाम तीर्थों की तरह यह तीर्थ भी हिन्दू एकता को पुख्ता करने वाला केन्द्र है और इसलिये अयोध्या, काशी, मथुरा व प्रयाग की तरह इलहामियों की आँखों में खटकता रहा है। आधुनिक समय में धावा बोल मन्दिर तोड़ा तो नहीं जा सकता (तभी तक जब तक भारत में वे 1:2 अनुपाती अर्थात 33% नहीं हो जाते!) इसलिये क़ौमी विधि अर्थात कथित कुरीति गढ़ कर आक्रमण की नीति अपनायी गयी है।

सबरीमाला तमाम प्राचीन हिन्दू स्थानों की तरह ही नाक्षत्रिक प्रेक्षण का भी केन्द्र था। कारण – इसकी स्थिति, अक्षांश और ऊँचाई। हिन्दू धर्म में नाक्षत्रिक घटनाओं को धार्मिक रूपक के साथ सुरक्षित कर दिया जाता है, यहाँ भी वही हुआ। शीत अयनांत अर्थात 22 दिसम्बर के आसपास प्राची में उष:काल के समय अभिजित (Vega) नक्षत्र का उदय प्रारम्भ होता जिसका कि उस ऊँचाई से प्रेक्षण आसान होता।

मकर संक्रांति तक आते आते एक घटना और होती, हमारे रुद्र देवता अर्थात लुब्धक नक्षत्र (Sirius) ब्रह्म मुहुर्त में पश्चिम में अस्त होते और विष्णु स्वरूप अभिजित नक्षत्र पूरब में उसी समय उदित होते। इन दो का दर्शन ‘मकर ज्योति’ का दर्शन कहा जाता और इस तरह सबरीमाला वैष्णव और शैव दोनों का समन्वय स्थान हो हिन्दू आस्था के विराट केन्द्र के रूप में उभरा।

केरल बहुत पहले से गणित ज्योतिष का केन्द्र रहा है, यहाँ तक कि कुछ विद्वान आर्यभट को भी केरल से जोड़ते हैं क्योंकि प्रमाण हैं। जैसा कि शेष भारत में हुआ, सैद्धांतिक ज्योतिष के प्रभाव में हमलोग आकाश निहारना भूलते गये और सबरीमाला में भी मकरज्योति मनुष्यों द्वारा दूर ऊँचे स्थान पर जला कर दिखाई जाने लगी। 2011 में इस पर विवाद भी हुआ था।

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क्या है पंचाग, जानें किस अंग्रेजी माह के साथ होता है कौन सा हिंदू महीना

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हिंदू पंचांग हिंदू धर्म के लोगों द्वारा माना जाने वाला कैलेंडर है। पंचांग का अर्थ है, पांच अंग। ये पांच अंग हैं, तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इसकी गणना के आधार पर हिंदू पंचांग की तीन धराए हैं- पहली चंद्र आधारित, दूसरी नक्षत्र आधारित और तीसरी सूर्य आधारित कैलेंडर पद्धति।

 

अलग-अलग रूप में यह पूरे भारत में माना जाता है। एक साल में 12 महीने होते हैं। हर महीने में 15 दिन के दो पक्ष होते हैं- शुक्ल और कृष्ण। 12 मास का एक वर्ष और 7 दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से शुरू हुआ।

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सबसे पहले इन्होंने किया था मृत्युंजय मंत्र का जप, जानें इतिहास के अनोखे बच्चों के बारे में

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Inspirational story of kinds in Hindu religion

कहते हैं बच्चे साक्षात ईश्वर का स्वरूप होते हैं, क्योंकि उनके मन में किसी के लिए भी बुरे विचार नहीं होते। उनका मन एकदम साफ होता है। वो जो भी कहते हैं या करते हैं सच्चे मन से करते हैं। किसी बच्चे को खुशी देकर हम ईश्वर को प्रसन्न कर सकते हैं।

हमारे धर्म ग्रंथों में ऐसे अनेक बच्चों के बारे में बताया गया है जिन्होंने कम उम्र में ही कुछ ऐसे काम किए, जिन्हें करना किसी के बस में नहीं था, लेकिन अपनी ईमानदारी, निष्ठा व समर्पण के बल पर उन्होंने मुश्किल काम भी बहुत आसानी से कर दिए। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ बच्चों के बारे में ….

मार्कण्डेय ऋषि

धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्कण्डेय ऋषि अमर हैं। आठ अमर लोगों में मार्कण्डेय ऋषि का भी नाम आता है। इनके पिता मर्कण्डु ऋषि थे। मर्कण्डु ऋषि को जब कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने सपत्नीक भगवान शिव की आराधना की। तपस्या से प्रकट हुए शिव ने उनसे पूछा कि वे गुणहीन दीर्घायु पुत्र चाहते हैं या गुणवान 16 साल का अल्पायु पुत्र। तब मर्कण्डु ऋषि ने दूसरी बात को चुना, यानी गुणी अल्पायु पुत्र।

बड़ा होने पर मार्कण्डेय को जब यह बात पता चली तो वे शिव भक्ति में लीन हो गए। इस दौरान सप्तऋषियों की सहायता से ब्रह्मदेव से उनको महामृत्युंजय मंत्र की दीक्षा मिली। इस मंत्र का प्रभाव यह हुआ कि जब यमराज उनकी मृत्यु के नियत दिन उन्हें लेने आए तो स्वयं भगवान शिव ने यमराज के वार को बेअसर कर दिया और बालक मार्कण्डेय को दीर्घायु होने का वरदान दिया।

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कम्युनिस्ट इंशा अल्लाह क्यों बोलता है, मुझे उम्मीद है ये पोस्ट पढ़कर अब तक आपको समझ में आ गया होगा!

Chennai: Muslim children hug each other during the celebration of 'Eid-ul-Fitr' at a School ground in Chennai August 9, 2013. The Eid al-Fitr festival marks the end of the Islamic holy fasting month of Ramadan. ..Photo by SL Shanth Kumar

ब्लॉग : शरद श्रीवास्तव –  धर्म जनता के लिए अफीम है। ये मार्क्सवाद का मूलभूत सिद्धान्त है। लेकिन ये कभी भी आश्चर्य की बात नहीं रही की एक धर्म हीन कम्युनिस्ट कब कैसे और क्यों एक मुस्लिम कम्युनलिस्ट के साथ खड़ा मिलता है।

साम्प्रदायिकता से लड़ने वाले मुस्लिम सांप्रदायकिता से हाथ मिलाते हमेशा नजर आते हैं। तमाम सेक्युलरिज्म एक धर्म के आगे नतमस्तक नजर आता है।

हकीकत ये है की मार्क्सवाद और मुस्लिम साम्प्रदायिकता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों में बहुत सी समानताएं हैं। कॉमन गोल यानी उद्देश्य हैं। इसीलिए दोनों एक दूसरे के पूरक और सहायक हैं।

अब विस्तार से : मुस्लिम धर्म एक किताब कुरान से चलता है। कुरान में जो लिखा है वो बदला नहीं जा सकता उसमे कोई फेरबदल मुमकिन नहीं। मार्क्सवाद या कंम्युनिस्ट मार्क्स की किताब दास कैपिटल को वही दर्जा देते हैं। करीब डेढ़ सौ साल पहले लिखी किताब में कोई फेरबदल मुमकिन नहीं। पूर्णतया वैज्ञानिक लेखन। समस्त सृष्टि कैसे चले इसका पूरा विवरण कुरान और दास कैपिटल में मौजूद है।

यूँ तो बाकी लोगों को किसी विषय पर बात करने के लिए उसे समझना पड़ता है , पढ़ना पड़ता है। मेहनत करनी होती है। लेकिन एक मौलवी साहब और एक मार्क्सवादी साहब दुनिया में किसी भी विषय पर बोल सकते हैं , अपनी बात कह सकते हैं। बल्कि ये भी बता सकते हैं की जनता को उस विषय के बारे में क्या करना चाहिए।

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मौलवी साहब और मार्क्सवादी साहब दोनों लोग ये काम कुरान शरीफ और दास कैपिटल शरीफ की रौशनी में करते हैं। यकीन न हो तो आप किसी भी विषय पर इनकी राय लेकर देख लीजिये , एक फतवा देगा दूसरा जनता को होने वाली तकलीफो के बारे में बताएगा।

अगर आप एक मुस्लिम भाई से इस बारे में चर्चा करना चाहेंगे वो कहेगा की पहले कुरान पढ़कर आओ। यही बात आपसे कम्युनिस्ट भाई भी कहेगा , जाओ पहले मार्क्स को पढ़कर आओ।

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