CM योगी ने जो कहा वो हर हाल में हो कर रहेगा, विश्वास न हो तो ये वीडियो देखिये…

वीडियो डेस्क , आपने एक हिंदी फिल्म का एक मशहूर डायलोग तो सूना ही होगा की “एक बार जो मैंने कमिटमेंट कर दी फिर में अपने आप की नहीं सुनता” जहां तक हमारा मानना हैं वो तो फिल्म थी लेकिन अगर भारतीय राजनीति की बात करे तब यह डायलोग यूपी के अभी हाल ही में मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ जी के उपर बिलकुल फिट बैठता हैं |अब आपके दिमाग में एक सवाल आ सकता हैं की ये कैसे संभव हो गया तो आइये आपको बता दे की किसी फिल्म का यह मशहूर डायलोग योगी आदित्यनाथ जी पर फिट कैसे बैठ गया |

अब ज़रा याद कीजिये जब यूपी में विधानसभा के चुनाव होने वाले थे तब बीजेपी ने जनता से क्या क्या वादे किये थे | आज यूपी के सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ जी अपने सभी वादे पुरे करते दिखाई दे रहे है और जिस स्पीड से योगी आदित्यनाथ जी काम कर रहे हैं उसको देखकर लगता हैं की उत्तर प्रदेश अब विकास की ऐसी सीढ़िया चढ़ेगा की सम्पूर्ण संसार के सामने यदि इसका एक उदाहरण भी बन जाये तो इसमें कुछ आश्चर्य नही होगा | पीएम मोदी जी ने जनता से जो वादे किये थे आज योगी जी एक एक कर उनको पुरे करते दिखाई दे रहे हैं | अगले पेज पर वीडियो में देखिये कैसे सीएम योगी आदित्यनाथ करेंगे PM मोदी के सपनो को पूरा….

अगले पेज पर वीडियो में देखिये कैसे सीएम योगी आदित्यनाथ करेंगे PM मोदी के सपनो को पूरा…. 

पूरी खबर पढने के लिए अगले पेज पर जाए…

तारिक फ़तेह ने इस्लामिक धर्मगुरु जाकिर नाइक के बारे में कहा कुछ ऐसा जिसे सुन आप हो जायेंगे लोटपोट

वीडियो डेस्क. सोशल मिडिया से हम आज आपके लिए एक ऐसा वीडियो लाये हैं जिसको देखकर हम यकीं से कह सकते हैं आपका पेट हँसते हँसते दर्द करने लगेगा, इस वीडियो में तारेक फ़तेह साहब..| अब आपके दिमाग में ख्याल आएगा की तारेक फ़तेह साहब कोई कॉमेडियन तो हैं नहीं फिर हंसी कैसे आएगी..? आपका सोचना भी ठीक हैं क्युकी तारेक फ़तेह साहब अपनी बातो से हमेशा विवादों में रहते हैं और पाकिस्तान के निवासी तारेक फ़तेह साहब अपने देश में तो इतने विवादों में रहते हैं की उनको अपना देश तक छोड़ना पड़ गया था |

आज हम जो वीडियो सोशल मिडिया से आपके लिए लाये हैं यह सोशल मिडिया पर बहुत वायरल हो रहा हैं जिसमे तारेक फतेह विवादित जाकिर नाइक के उपर ऐसा कुछ कह रहे हैं जिसको सुनकर आपका हँसते हँसते पेट में दर्द हो जायेगा |हम बता दे हमारा मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं का मजाक बनाने का नहीं हैं हमको ये वीडियो सोशल मिडिया पर दिखाई दिया और इसमें ऐसा कुछ दिखाई दिया जिसको हम अपने दर्शको को दिखाने से खुद को नहीं रोक पाए | अगले पेज पर देखिये तारेक फ़तेह साहब का यह वीडियो जिसमे जाकिर नाइक के बारे में बोले…

 अगले पेज पर देखिये तारेक फ़तेह साहब का यह वीडियो जिसमे जाकिर नाइक के बारे में बोले…

पूरी खबर पढने के लिए अगले पेज पर जाए…

अब इजाज़त लेकर करेंगे श्रीराम की पूजा ? हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ आसान ?

ताल ठोक के: अब इजाज़त लेकर करेंगे श्रीराम की पूजा ? हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ आसान ?

बंगाल में आज होने वाले राम नवमी समारोह पर ममता सरकार ने बंगाल में रोक लगा दी थी| जिसके बाद लोग कलकत्ता हाईकोर्ट भी गए और कोर्ट ने इस रोक को खारिज कर दिया है| अब सवाल ये उठता है की ऐसी नौबत आई ही क्यों ? क्या ममता बनर्जी अपने हिसाब से लोगों के धर्म को चलाएंगी|

शर्मनाक: कृष्णा भगवान का ऐसा अपमान जिसे सुनकर हर हिन्दू का खून खौल जायेगा

मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए एंटी-रोमियो स्क्वॉड की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुली चुनौती दी है| भूषण ने योगी की सीएम योगी की आलोचना करते हुए अपनी गन्दी राजनीति में भगवान कृष्ण को भी खींच लिया है। भूषण ने शेक्सपियर के एक नाटक के पात्र रोमियो और भगवान श्रीकृष्ण की आपस में तुलना कर दी। भूषण ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, “रोमियो ने केवल एक लड़की से प्यार किया था जबकि भगवान कृष्ण तो लड़कियों को छेड़ने के लिए मशहूर थे।” भूषण ने आगे लिखा कि, “क्या आदित्यनाथ के अंदर हिम्मत है कि वो एंटी रोमियो स्क्वाड को एंटी कृष्ण स्क्वाड कहेंगे?”

भूषण के इस ट्वीट के बाद भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने उनके सवाल का जवाब भी एक ट्वीट के जरिए ही दे डाला। संबित ने भूषण के अंग्रेजी ट्वीट का जवाब हिंदी में देते हुए लिखा कि, “भगवान कृष्ण को समझने के लिए प्रशांत भूषण को कई जन्म लेने होंगे।” उन्होंने भूषण के ट्वीट की निंदा करते हुए आगे लिखा कि, “वह कितनी आसानी से कृष्ण जी को राजनीति में घसीट लाए हैं। भूषण का ऐसा करना बहुत ही दुख की बात है।”

बता दें कि योगी आदित्यनाथ के सीएम बनते ही एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन करते हुए लड़कियों को छेड़ने वाले मनचलों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मालूम हो कि भूषण से पहले भी कई लोग इस स्क्वॉड का नाम ऐंटी-रोमियो रखने पर आपत्ति जता चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि रोमियो शेक्सपियर के एक मशहूर नाटक का पात्र है और रोमियो-जूलियट की प्रेम कहानी अपने आपसी प्यार और समर्पण के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है।

हिन्दुओं के रक्त में सेक्युलर नामक वायरस घुस गया है, इसलिए हिन्दू रामनवमी कैसे मनाएंगे ?

बहिष्कृत सिंधी शिया मुस्लिम साईं बाबा ने दिखाया था जो इसे भगवान् ही मान लिया ?

ब्लॉग : ( वैष्णवी कुमारी, यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) :- अजमेर में स्थित सूफ़ी संत हजरत मोईनुद्दीन चिस्ती की दरगाह को कोई मुसलमान अल्लाह मानकर नहीं पूजता, बल्कि अल्लाह का बंदा मानकर ही पूजते है।

सतयुग में ऋषि विश्वामित्र ने तो अपने योग बल से एक नकली स्वर्ग ही बना दिया था। इतना सामर्थ्य होने के बाद भी उन्हें केवल एक बहुत बड़ा योगी ही माना जाता है, भगवान् नहीं! अगस्त्य मुनि ने पूरे खारे सागर को ही पी लिया था (कुम्भोदार अगस्त्य मुनि) लेकिन इतना महान चमत्कार दिखाने के बाद भी अगस्त्य को ईश्वर या ब्रह्म नहीं माना गया!

प्रश्न ये है कि इनमें से कौनसा चमत्कार इस बहिष्कृत सिंधी शिया मुस्लिम साईं बाबा ने दिखाया था जो इसे भगवान् ही मान लिया ? अगर चमत्कार दिखाया भी होता तो इसे केवल एक महान योगी और ईश्वर भक्त ही माना जा सकता था, ईश्वर तो स्वप्न में भी नहीं ?

अब अगर वेदों में प्रतिपादित भगवान् विष्णु हमारी लौकिक और तुच्छ मनोकामनाओं को फटाफट पूर्ण न कर सकें तो कोई बात नहीं; हम हिन्दू सौदेबाज लम्पट हैं। हमारे भगवान् वही है जो हमारी इच्छाओं को पूर्ण करे। फिर चाहे हमें पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आये मानसिक बीमार मुस्लिम चाँद मियाँ उर्फ साई को ही क्यों न पूजना हो; जिसे उसकी बिरादरी वालों ने इसलिए निकाल दिया था कि वो ‘अनलहक अनलहक'(मैं अल्लाह हूँ, मैं अल्लाह हूँ) बकता रहता था। वही चाँद मियाँ महाराष्ट्र के शिरडी प्रान्त में मस्जिद में जैसे तैसे जीवन काटता था छोटे मोटे चमत्कार पाखंड दिखाकर। विचित्र है कि जो बात उसकी कौम वालों ने नहीं मानी वो आज के सेक्युलर हिन्दू मूर्ख तुरंत मान गए (कि वो भगवान् है)।

वैसे भी आज के वर्तमान हिन्दू समाज में किसी भी तरह की कोई लाज/शर्म तो है ही नहीं ! क्योंकि वैसे भी हज़ारों सालों से गुलामी के आदि हो चुके हैं। अब आज के सेक्युलर हिन्दू के पास स्वाभिमान नाम जैसा कुछ बचा नहीं है; सो हम इस कौम से बेदखल किये हुए साई बाबा को अपने नए भगवान् के रूप में पूजें। और हाँ इस मुस्लिम, अवैदिक, अपौरानिक साई बाबा को पूजने के बाद भी हम हिन्दू धर्मावलंबी ही कहलायेंगे और हिंदुओं के माथे पर काला दाग लगाएंगे!

अब और क्या बचा है? राम नवमी को हम अयोध्या या फिर राम मंदिर नहीं जाएंगे बल्कि नवविकसित तीरथ शिरडी जायेंगे और राम की जगह इस शिया मुस्लिम साई को साई ॐ साई राम (अर्थात माता जानकी के पति) कहकर पूजेंगे। हम हिन्दु इस ‘निष्कासित सिन्धी मुस्लिम साईबाबा’ को तो अब ‘भगवान् राम जो कि सनातन परब्रह्म है’ – उनके रूप में पूज रहे हैं न!

इस्लाम मजहब से जुड़ जाते ही एक दो पीढ़ियों के व्यक्ति की सोच में ही कैसा फर्क पड़ता है ?

लेकिन यही हिन्दू जब मुसलमान बन गए तो ५:४८ या १३:३१ में कही यही बात को पूर्ण और अंतिम सत्य तो मानते ही हैं।

ब्लॉग: ( केशर देवी, एडिटर – यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) अगर कोई कृष्णभक्त कहे कि कृष्ण ने कहा है कि मैं चाहता तो हर किसी को मेरा भक्त ही पैदा करता लेकिन तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए अलग अलग बनाए हैं। जो मुझे नहीं मानेंगे उनपर विपदाओं के पहाड़ टूटेंगे ये मेरा वादा रहा। पता नहीं कितने हिन्दू उसकी सुनते और पता नहीं कितने हिन्दू उसे क्या क्या सुनाते। इतना तो अवश्य सुनाते कि ये तेरा कृष्ण कैसा भगवान है रे, जो दुनिया में लोगों के बीच अपने को ही भगवान मानने के लिए खूनखराबा करवा रहा है ? खुद ही सब को अपना भक्त बनाकर न भेजता ? जो मारे जा रहे हैं उनके घरवालों की हाय का भागी कौन ?

लेकिन यही हिन्दू जब मुसलमान बन गए तो कुरान की आयात ५:४८ या १३:३१ में कही यही बात को पूर्ण और अंतिम सत्य तो मानते ही हैं और उसे सत्य कराने के लिए हथियार भी उठाते हैं और खुद से हथियार न उठे तो जो उठाये उनके लिए अपना धन लुटा रहे हैं क्योंकि वे कुरान आयात ९:३५ से ९:४० को भी इतना ही अंतिम सत्य मानते हैं।

कैसा फर्क पड़ता है व्यक्ति के सोच में, एक दो पीढ़ियों में ही ? कितनी प्रोग्रामिंग होती होगी दिमाग की जो तर्क और तथ्य से चलना छोड़ देता है आदमी ?

यहाँ वो बंदरों वाले प्रयोग का किस्सा याद आता है जहाँ उंचाई पर टंगे केले के घड को एक भी बन्दर के छूते ही सब पर जोर से पानी की धार मारी जाती थी। इसके चलते सब के दिमागों में ये बात प्रोग्राम हो गई कि केले के घड को छूना नहीं है। यहाँ तक कि जब धार मारना बंद हो गया तब भी वे सब न खुद छूते थे न किसी दूसरे बन्दर को छूने देते थे, उस पर हमला कर देते थे। एक एक करके सब बन्दर बदल दिए गए, लेकिन सब में यही भाव बना रहा, कोई भी बन्दर दूसरे बन्दर को केले के घड को छूने से रोकता ही था।

देखने लायक बात यह थी कि बाकी बातों में बन्दर नार्मल थे, बस वो ऊपर टंगे केले के घड़े के बारे में सोचने से भी खुद को ही रोक रहे थे।

कुछ ऐसी ही बात हिन्दू के सेक्युलर हो जाने से होती है जो वो भी ऐसी बातों पर सवाल उठाने से डरता है। हाँ, वेद, पुराण, उपनिषदादि पर आलोचना करते वक्त उसको कोई रोक नहीं सकता, खुद का घोर अज्ञान भी नहीं।

डार्विन बाबा बन्दर को मानव का पूर्वज मानते थे आप को पता ही होगा! और हाँ, मदारियों का धर्म या मजहब क्या होता है यह भी देखिये कभी नाम पूछकर ?

कुछ कहेंगे ? सहमत हैं तो शेयर या कोपी पेस्ट का अनुरोध तो है ही …. 

इस प्रश्न को हिन्दू-मुस्लिम विवाद का रूप देने वालों को तत्काल जेल में बन्द कर देना चाहिए

यह शुद्ध रूप से राजनैतिक मसला हो गया है।नहीं तो वास्तविकता तो हर मुसलमान जनता है।आम मुसलमान भूमि छोड़ना भी चाहे तो कथित मुस्लिम धर्म ठीकेदार ऐसा नहीं होने देंगे।

ब्लॉग : विनय झा ( यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) :- बाबरी मस्जिद के नीचे विशाल हिन्दू मन्दिर के साक्ष्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने सर्वोच्च न्यायालय को सौंप दिया था जिसपर सर्वोच्च न्यायालय वर्षों से कुण्डली मारकर बैठी है और अब कहती है कि (इस पुरातात्विक साक्ष्य को किनारे करके) “बातचीत” द्वारा हल ढूँढना चाहिए !

सर्वोच्च न्यायालय ने ही रामजन्मभूमि मन्दिर के साक्ष्य माँगे थे जिसपर पहले तो मनमोहन सरकार ने कहा था कि राम जी काल्पनिक हैं, जिस कारण पुरातात्विक उत्खनन हुआ, और अब उस साक्ष्य को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ही अनदेखा किया जा रहा है ।

यही कारण है कि बाबरी एक्शन कमिटी को सर्वोच्च न्यायालय पर पूरा भरोसा है। क्या आप लोगों को सर्वोच्च न्यायालय पर पूरा भरोसा है ?

बाबरी एक्शन कमिटी का कहना है कि बातचीत से कोई हल नहीं निकलेगा, अदालत को फैसला करना चाहिए, जबकि हिन्दुत्ववादियों ने बातचीत का स्वागत किया है।

मस्जिद में अल्लाह या मुहम्मद साहब पैदा नहीं हुए थे और न ही उनकी मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा की जाती है, मस्जिद केवल नमाज पढने की सुविधा हेतु बनाया स्थान है जिसे आवश्यकता पड़ने पर विस्थापित करने से मजहब को कोई क्षति नहीं पंहुचती। किन्तु रामजन्मभूमि को अन्यत्र विस्थापित करना असम्भव है। यह साधारण बात बाबरी एक्शन कमिटी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पल्ले नहीं पड़ती, पुरातात्विक साक्ष्य भी उनके लिए बेमतलब हैं। वे भली-भांति जानते हैं कि श्रीराम के मन्दिर को तोड़कर मस्जिद बनाया गया था, फिर भी मस्जिद हटाने के लिए तैयार नहीं हैं।

अतः मामला गुण्डागर्दी का है, मजहब का नहीं ! इस्लाम तो नहीं कहता कि हिन्दू मन्दिर को तोड़कर उसके मूर्ति वाली दीवारों द्वारा मस्जिद बनाना चाहिए। जिस बाबरी मस्जिद को 1992 में तोड़ा गया था उसके प्रवेश द्वार के एक खम्बे का एक फोटो मैं संलग्न कर रहा हूँ जो सिद्ध करता है कि प्राचीन हिन्दू मन्दिर की दीवारों और खम्बों द्वारा ही बाबरी मस्जिद बनी थी (यह फोटो और अनेक अन्य फोटो 1992 में ही मस्जिद टूटने से कुछ पहले एक सांसद द्वारा लोकसभा में दिखाए गए थे)।  जिस मस्जिद की दीवारों में हिन्दू मूर्तियाँ हों उसे मस्जिद नहीं माना जा सकता, उसमें नमाज पढ़ना कुफ्र है। अतः जो लोग बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ना चाहते हैं वे काफिर हैं। बाबरी एक्शन कमिटी के नेताओं ने भी बाबरी मस्जिद में कभी नमाज नहीं पढ़ी, वे लोग केवल हिन्दूओं का मानमर्दन करने की जिद ठाने हुए हैं। सुब्रह्मण्यम स्वामी भी यह बात अदालत को नहीं बता पा रहे हैं कि हिन्दू मन्दिर के अवशेषों से बने मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ा जा सकता।

जिन हिन्दू मन्दिरों को तोड़कर वहाँ मस्जिदें बनायी गयी वहाँ पुनः मन्दिर बनाना ही पडेगा। इस प्रश्न को हिन्दू-मुस्लिम विवाद का रूप देने वालों को जेल में बन्द कर देना चाहिए, क्योंकि महमूद गजनवी और बाबर जैसे विदेशी डाकुओं द्वारा मन्दिरों का ध्वंस करने का मामला है, भारतीय मुस्लिम बनाम हिन्दू का मामला नहीं है।

कभी सोचा है कि इतने आधातों को सहकर भी आज हिन्दू कैसे बचे हैं, ये धर्म कैसे बचा है?

आपने कभी सोचा है कि इतने आधातों को सहकर भी हम आज हिन्दू कैसे बचे हैं ? हमारा धर्म कैसे बचा है ? फोटो Source : santabanta.com

ब्लॉग : महावीर प्रसाद खिलेरी (संपादक यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम) : हिन्दू समाज शायद दो हज़ार सालों से गुलाम रहा है! हमारे ऊपर सदियों तक इस्लामी शासन रहा फिर कई रूपों में ईसाईयों ने हम पर शासन किया फिर 1947 में जब देश तथाकथित रूप से आजाद हुआ तब हमसे हमारा धर्म छीनने मिशनरी लोग आ गये, लालच दिया, कई जगह डर दिखाया, कई जगह अहसान जता कर उसकी कीमत मत-परिवर्तन के रूप में वसूलनी चाही, हमारे ऊपर न जाने कितने मोपला और मीनाक्षीपुरम हुए। आपने कभी सोचा है कि इतने आधातों को सहकर भी हम आज हिन्दू कैसे बचे हैं ? हमारा धर्म कैसे बचा है ?

आज हम हिन्दू इसलिये हैं क्योंकि हमारे पूर्वजों ने अपना धर्म नहीं छोड़ा। डर, हिंसा, प्रपंच, लालच, षड्यंत्र सबके बीच सदियों तक संघर्ष करते रहे। हमारे एक पूर्वज इधर राजस्थान में घास की रोटी खाकर हिन्दू धर्म बचा रहे थे तो उधर पंजाब में हिन्दू धर्म को बचाने के लिये कुछ पूर्वज जीवित ही दीवार में चुनवा दिये गये। अपने उन पूर्वजों के बारे में भी दो मिनट सोचिये जिन्होनें धर्म बदलने की जगह मैला उठाने के काम को चुना था। हकीकत राय के बलिदान के बारे में सोचिये, दक्षिण भारत की माँ रुद्र्माम्बा देवी के त्याग का स्मरण कीजिये, पूरब के वीर लाचित बरफूकन का स्मरण कीजिये और न जाने ऐसे कितने नाम है जिन्होनें अपना सर्वस्व खो कर हिन्दू धर्म को बचाये रखा। ये सब किसी एक जाति-विशेष के नहीं थे !

आप योगी जी की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल इसलिये नहीं उठा रहे कि आपको वास्तव में इस बात की कोई फ़िक्र है कि वो शासन कैसे चलायेंगे! दरअसल वजह ये है कि योगी जी में आपने किसी ठाकुर को ढूंढ लिया है जो आपको पीड़ा दे रहा है। योगी जी के ऐब आप इसलिये ढूंढ रहें हैं क्योंकि मोदी जी ने आपके जात वाले को मुख्यमंत्री नहीं बनाया। इसी तरह जब आप योगी जी को ठाकुर अजय सिंह विष्ट लिख रहें हैं तो आप उन्हें एक जाति विशेष से बाँध रहें हैं, जाहिर है फिर बाकी जाति वाले भी उन्हें उसी रूप में लेंगें।

अपनी जातिवादी मानसिकता में जब हम किसी के बारे में कुछ लिखतें हैं, किसी जाति के मूल पर प्रश्न उठाते हैं तो एक बार ये भी सोच लीजिए कि आपने गाली किसको दी है ? आप उनको गाली दे रहें हैं उनके कारण हम हैं वर्ना हम भी आज पीटर या जुम्मन बनकर जी रहे होते ! वो पूर्वज चाहे किसी भी जाति के हों पर वो सब हमारे लिये वन्दनीय है क्योंकि उन्होंने हमारे लिये उस धरोहर (हिंदुत्व) को सहेजे रखा जिसका अनुपालन मनु, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्री बुद्ध से लेकर गुरु गोविन्द सिंह करते थे।

हम या आप जिस जाति में पैदा हुयें हैं वो हमारी या आपकी चॉइस नहीं थी, भगवान की मर्जी थी। ईश्वर की मर्जी पर जो सवाल उठाये, उसके सृजन को किसी भी रूप में लांछित करे उससे कृतघ्न और अज्ञानी कोई नहीं हो सकता। मैं कभी किसी दलित को गाली नहीं देता, इसलिये नहीं कि वो गलत नहीं हो सकते बल्कि इसलिये क्योंकि इतने दंशों, अत्याचारों और प्रलोभनों को सह कर भी आज वो हिन्दू है। इस देश की मुख्य-धारा में है और कम से कम हमारे अस्तित्व को लीलने वाला खतरा नहीं है। मैं कभी किसी क्षत्रिय को गाली नहीं देता क्योंकि उनके पूर्वजों ने सदियों तक हमारे भारत की अखंडता अक्षुण्ण रखने के लिये बलिदान दिया है। मैं किसी ब्राह्मण को गाली नहीं देता क्योंकि दुनिया में भारत को विश्व-गुरु बनाने का गौरव उनके पूर्वजों का था। मैं किसी वैश्य को गाली नहीं देता क्योंकि इन्होंनें अपनी धन-संपत्ति राष्ट्र-रक्षा में कई बार न्योछावर की है। इसी तरह मैं अपने किसी वनवासी बंधू को अपमानित करने का भी पाप नहीं करता, ये तो तबसे धर्म रक्षक रहें हैं जब भगवान राम इस धरती पर आये थे।

अपने जातिगत पूर्वाग्रहों को छोड़िये वरना प्रकृति सौभाग्य को दुर्भाग्य में बदलने में जरा भी देर नहीं करती।

गंगा-यमुना को जीवित मनुष्य के समान कानूनी अधिकार देने का फैसला

गंगा-यमुना को मनुष्य मानने का वैदिक आधार

यूनाइटेड हिन्दी स्पेशल रिपोर्ट : आज नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा नदी को देश की पहली जीवित इकाई के रूप में मान्यता दी है और गंगा-यमुना को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद भारत की दोनों महत्वपूर्ण नदियों गंगा और यमुना को अब एक मानव की तरह संविधान की ओर से मुहैया कराए गए सभी अधिकार मिल सकेंगे। कुछ दिनों पहले ही न्यूजीलैंड ने भी अपनी वांगानुई नदी को एक जीवित संस्था के रूप में मान्यता दी थी।
यह बहुत ही सराहनीय कदम है कि दोनों पवित्र नदियों को कोर्ट ने जीवित मानकर मनुष्यों के सभी संवैधानिक अधिकार दे दिए हैं पर न्यूजीलैंड से पहले हम यदि ऐसा करते तो बात ही अलग होती। क्योंकि हम तो गंगा यमुना को माता कहकर मनुष्य और उससे भी ऊपर देवता की कोटि में रखते आए ही हैं, खैर अदालत ने यह फैसला देकर वैदिक संस्कृति का मान बढ़ाया है।

आजकल लोग हम पर जड़ वस्तुओं की पूजा और उन्हें चेतन मानने का आरोप लगाते हैं, इसके निराकरण के लिए वैदिक मान्यता की ओर हम चलते हैं ताकि हमारी इन समृद्ध मान्यताओं का स्त्रोत जान सकें। ध्यानपूर्वक पढ़िए।

वैदिक मान्यता में एक ‘मन’, दूसरा ‘प्राण’, और ‘पंचमहाभूत’ रूप सात तंतुओं से वह बुनकर (परमात्मा) इस सृष्टि रूपी पट को बुन रहा है। वेद ने उस महान कवि की सृष्टिरूप इस कविता को सप्ततंतुमय यज्ञ कहा है।

पंचभूत को वैदिक परिभाषा में ‘वाक्’ कहते हैं क्योंकि इनमें सूक्ष्मतम भूत ‘आकाश’ है, उसका गुण ‘शब्द’ या ‘वाक्’ है। यह सूक्ष्म भूत ‘आकाश’ ही सब अन्य भूतों में अनुस्यूत होता है इसलिए वाक् को ही पंचमहाभूत का सरल प्रतीक मान लिया गया।

शतपथ ब्राह्मण कहता है आत्मा के तीन घटक हैं— ‘अयमात्मा वांमयो मनोमयः प्राणमयः।’ अर्थात आत्मा मन, प्राण और वाक् से बनी है। सप्त तंतु रूप इस मन, प्राण और वाक् को ही त्रिक् कहते हैं। मन सत्व, प्राण रज और वाक् तम रूप है। सृष्टिरचना की वैदिक कल्पना इसी त्रिक पर आश्रित है। मन, प्राण और वाक् इस त्रिक के सम्मिलित सम्बन्ध से ही एक शक्ति या अग्नि उत्पन्न होती है, वही वैश्वानर अग्नि है। त्रिक के मिलन से उत्पन्न वैश्वानरः अग्नि से ही जीवन अभिव्यक्त हो पाता है। यह जब तक है तभी तक जीवन है।

इस त्रिक में से प्राण को हम एनर्जी(Energy) कह सकते हैं, पर Energy की अवधारणा जड़ भूतों से जुड़ी है जबकि वैदिक प्राण की अवधारणा जीवित शरीर से जुड़ी है। वैदिक दृष्टि के अनुसार चेतना ही भूत के रूप में परिणत होती है अर्थात मौलिक तत्व चेतना है और भूत उसका विकार है। इसलिए वैदिक दृष्टि में परमार्थतः सब कुछ चेतन ही है, जड़ कुछ है ही नहीं। चेतना जहाँ ज्यादा आवृत्त हो गई, कि हमारी दृष्टि में नहीं आती वही जड़ है। समस्त सृष्टि मन, प्राण और वाक्(पंचमहाभूत) के त्रिक से ही बनी है, यही मात्राभेद से सभी पदार्थों के घटक हैं। पर जैसे जैसे हमें छिपी हुई चेतना को पहचानने के साधन उपलब्ध हो जाते हैं, वैसे वैसे हम जिसे कल तक जड़ समझते थे उसे चेतन के रूप में जानने लगते हैं।

देखिए सर जगदीशचन्द्र बसु से पहले वनस्पतियों को आधुनिक विज्ञान में जड़ समझा जाता था पर जैसे ही बसु जी को समुचित उपकरण उपलब्ध हो गए, उन्होंने सिद्ध कर दिया कि वनस्पति में प्राण हैं। कम लोग जानते हैं कि जगदीश बोस वैदिक विद्याओं का भी ज्ञान रखते थे। महर्षि मनु की स्पष्ट घोषणा है कि वनस्पतियों में भी चेतना है और वे सुख दुख अनुभव करते हैं — ‘अन्तःसंज्ञा भवन्त्येते सुख दुखःसमन्विता।’

इसी तरह विज्ञान अब तक नदियों, पर्वतों आदि को जड़ माने हुए है पर वेद नदियों से कहता है कि, — ‘इमं मे गंगे यमुने सरस्वति’ ‘हे गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों! मेरी प्रार्थना सुनो’ (ऋग्वेद 10.75.5)। यह इसीलिए क्योंकि सभी पदार्थों में आत्मा है और आत्मा है तो प्राण भी है, मन भी है और वाक् भी है, मन है तो सोचने की क्षमता भी है, इसलिए उन्हें सम्बोधित करना कि वे प्रार्थना सुनें बिल्कुल ठीक है। इसके अतिरिक्त जीवन की अभिव्यक्ति वैश्वानर अग्नि से ही होती है, वेद स्पष्ट रूप से जल में वैश्वानर अग्नि की बात कहता है, — ‘वैश्वानरो यास्वगनिः प्रविष्टः’ (ऋग्- 7.49.5) अर्थात जल में वैश्वानर अग्नि विद्यमान है।

वेद में जड़ पदार्थों से चेतन व्यवहार के अनेक प्रमाण मिलते हैं। पर जड़ और चेतन के बीच मौलिक एकता को हृदयंगम कर लेने के बाद कोई कठिनाई नहीं रहती। प्रकृति और मनुष्य के बीच सनातन धर्मियों ने कभी भेद नहीं माना, क्योंकि दोनों ही सजीव हैं, अतः प्रकृति और जीवों को अलग अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसलिए सनातन संस्कृति सदैव गौ, भूमि, नदी, तुलसी को माता मानती आई है, हम हिन्दू चन्द्रमा को मामा कहते आए हैं, पहाड़ों को हमने पूजा है, प्रकृति के हर अंग को हमने वस्तु नहीं माना पर अपना आत्मीय सम्बन्धी माना है। इससे यह सिद्ध हो गया कि हम जड़ प्रकृति को नहीं पूजते, हमारी मूर्तिपूजा की परम्परा भी चेतन तत्व की ही उपासना है। जैसे जैसे सनातन संस्कृति और वैदिक मणि मंजूषा की आभा हमारे सामने प्रकट होती है, हमारी बुद्धि चमत्कृत, और जीवन धन्य धन्य हो जाता है। इससे पहले श्राद्ध के पीछे का वैदिक विज्ञान पर एक पोस्ट किया था, वैदिक विज्ञान पर यह दूसरा पोस्ट है।

इलाज के नाम पर मौलवी इस महिला की इज्ज़त के साथ खेलता रहा और वहाँ खड़े लोग…

हमारे देश में बिमारियों के इलाज के लिए तरह तरह की पद्धतियाँ अपनाई जाती हैं. ऐसे में बहुत सी विधियाँ परंपरागत तौर पर चली आ रही हैं. जब सभ्यता और विज्ञान का विकास नहीं हुआ था तब लोग प्राथमिक उपचार खुद ही किया करते थे और बड़े मामलों में वैद्य या हकीम के पास जाते थे. तब हमारे समाज में डॉक्टर्स नहीं हुआ करते थे. इलाज जड़ी बूटियों से होता था. लेकिन इसी बीच में कुछ कुरीतियाँ भी पनपीं धार्मिक लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए उल्टे सीधे काम करने लगे.

किसी महिला या पुरुष कि गतिविधियाँ असामान्य होने की स्थिति में उसपर भूत प्रेत का साया बता कर डराया गया और ऐसे मामले वैद्य या हकीमों के जरिये नहीं बल्कि तांत्रिक और मौलवी लोगों के जरिये ठीक किये जाने लगे. ऐसा ही एक बेहद पुराना वीडियो आजकल इन्टरनेट और सोशल मीडिया अपर खूब तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक मौलवी किसी महिला का इलाज करने के नाम पर उसके साथ अश्लील हरकतें कर रहा है. और आसपास खड़े तमाम लोग बड़ी ही श्रद्धा और विश्वास के साथ उसे देख रहे हैं.

वो महिला मौलवी का जितना हो सकता है विरोध कर रही है, लेकिन उसकी लाचारी साफ झलक रही है. वीडियो वायरल होने के बाद जांच हुयी और महिला से पूछा गया तो उसने बताया कि उसे खुद उसके परिवार के लोग ही इलाज के लिए मौलवी के पास ले गए थे. वो मौलवी महिला के साथ जबरदस्ती अश्लील हरकतें करता रहा. महिला की इज्जत तार तार करता रहा और लोग खड़े देखते रहे कुछ लोग वीडियो बनाते रहे

देखिए विडियो:-