इंडोनेशिया में मां-बाप के पैर छूने की परंपरा, एक भी वृद्धाश्रम नहीं?

हिंदुस्तान में माता-पिता, घर के बड़ों-बुजुर्गों, शिक्षकों व अन्य के प्रति मान-सम्मान का भाव दिखाने के लिए चरण वंदना की परंपरा है। ऐसे भी कई उदाहरण देखते हैं जब बच्चों ने अपने माता-पिता के पैर धोकर उनका सम्मान किया। लेकिन शायद हिंदुस्तान के कुछ लोगों को लगता है कि हमारी यह परंपरा अब कमज़ोर पड़ रही है। तभी तो इंडोनीशिया की इस तस्वीर से प्रेरणा ले रहे हैं।

 

पहले हमने गुरुमुखी यानि पंजाबी भाषा से भी कुछ पोस्ट खोजे। दो मिसाले देखें,

ऐसे और भी पोस्ट आपको मिल जाएंगे जिनमें लिखा गया है, ‘इंडनीशिया में हर स्कूल में एक स्पेशल दिन होता है। उस दिन सारे बच्चों की माओं को स्कूल बुलाया जाता है और उनके बच्चों के द्वारा उनके पैर साफ़ करवाए जाते हैं ताकि ये बच्चे अपने माँ-बाप की सेवा करना ना भूलें। इसका नतीजा यह हुआ है कि इंडनीशिया में एक भी वृद्धाश्रम नहीं है।’

आइए अब अगले पृष्ठ पर आपके सामने ‘पूरी तस्वीर’ रखते हैं।

इस रानी को बिना देखे ही अकबर दे बैठे थे अपना दिल, ये हुआ था प्यार का हश्र

Real Story Of Rani Roopmati And King Akbar
Real Story Of Rani Roopmati And King Akbar

इंदौर : मध्यप्रदेश  में पर्यटकों की मनपसंद जगहों में से एक है मांडू । यहाँ 2016 को अलविदा कहने और नए वर्ष का स्वागत करने लाखों की संख्या में लोग पहुंचे। पर्यटकों ने यहां रानी रूपमती महल, जहाज महल, बाज-बहादुर का महल सहित अन्य स्मारकों को निहारा।

पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में से एक मांडू से जुड़ा एक ऐसा इतिहास unitedhindi.com आपको बता रहा है, जो रानी रूपमती और बाज-बहादुर की प्रेम कहानी को अमर बनाता है। जब भी प्रेम कथाओं का जिक्र होता है तो रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी उसमें जरूर शामिल होती है। विंध्याचल की पहाड़ियों पर बसा मांडू इन दोनों की प्रेम कहानी का साक्षी है, लेकिन इनके प्रेम को शहंशाह अकबर की नजर लग गई और कहानी का दुखद अंत हुआ।

आगे पढ़ें : अकबर की अधूरी प्रेम कहानी…