Video: मोदी जी ने मुझे नहीं छोड़ा बल्कि राष्ट्र के लिए मैं ख़ुद अलग हुई थी – पीएम की पत्नी


जब से मोदी जी मुस्लिम महिलाओं के हक़ के लिए लड़ना शुरू किया हैं तबसे उन पर तरह- तरह के इल्जाम लगाये जा रहे हैं| मोदीजी ने ये मुद्दा एक रैली में उठाया था तबसे ही देश के सेक्युलर लोग नीचता पर उतर आये हैं| सेक्युलर लोगों की नीचता इस हद तक गिर गई की वो मोदीजी से कह रहे हैं कि ” वो पहले अपनी पत्नी को तो हक़ दे”|

इन सेक्युलर लोगों को मोदीजी और उनकी के बीच बोलने का कोई हक नहीं हैं| मोदीजी की पत्नी यशोदाबेन ने मोदी पर कभी किसी तरह का आरोप नहीं लगाया हैं, ना ही किसी प्रकार की मांग की हैं|

लेकिन सेक्युलर और वामपंथी तत्त्व यशोदाबेन को निशाना बनाकर नरेन्द्र मोदीजी पर आरोप लगा रहे हैं। लेकिन अब मोदीजी की पत्नी यशोदाबेन ने अब इन वामपंथी और सेक्युलर तत्वों को करारा जवाब दिया हैं। यशोदाबेन ने इन सेक्युलर तत्वों की बोलती बंद कर दी हैं। यशोदाबेन ने कहा कि “मोदीजी ने मुझे कभी नहीं छोड़ा, मैं खुद ही उनसे अलग हुई थी उनकी ख़ुशी का सम्मान करते हुए।

यशोदाबेन ने बताया की जब उनकी मोदीजी से शादी हुई थी तब वो 17 बरस की थी और मोदीजी 18 बरस के थे| तीन साल की शादी में हम मुश्किल से तीन महीने साथ रहे| फिर एक दिन मोदीजी ने अपने दिल की बात मुझसे कही कि जशोदा मैं देश भ्रमण पर निकलना चाहता हूँ| मुझे देश के लिए कुछ करना हैं, देश की प्रगति करनी हैं, मुझे देश के लिए बहुत से काम करने हैं तो तुम अपनी छुटी हुई पढाई पूरी कर लो| तब मैंने फैसला किया कि मैं नरेन्द्र मोदी को छोड़ दूंगी| मैंने नरेन्द्र मोदी के सपनोँ के बीच नहीं आउंगी| मेरे लिए मोदी की ख़ुशी से बढ़कर कुछ नहीं था इसलिए मैंने उनसे अलग होने का फैसला लिया|

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दहेज नहीं तो दूल्हे ने बरात रोकी, लड़की ने दूल्हे के सामने ही दूसरी शादी कर ली…

जयपुर : राजस्थान के खालसा गांव में एक अनोखा मामला सामने आया है। दूल्हे ने दहेज में कार मांगी तो दुल्हन ने बारात वापस लौटा दी और इसके बाद उसी मंडप में दूसरी शादी रचा ली।

जानकारी के अनुसार रावतसर के पास खालसा एक छोटा गांव है। इस गांव की बीएड कर रही बेटी रेणु अन्य लड़कियों के लिए रोल मॉडल बनकर उभरी है। उसने दहेज लोभी दूल्हे से शादी के एन वक्त इंकार कर ऐसा साहसिक कदम उठाया कि अब इस बात की आस-पास क्षेत्र में खूब चर्चा के साथ प्रशंसा हो रही है। जैसे ही अगली सुबह हुई लोगों को इस बात का पता चला। देखते ही देखते लोग दुल्हन के पिता राजेंद्र के घर लोग बधाई देने आने लगे।

ये है मामला : दरअसल रेणु कासनियां की शादी हरियाणा के सिरसा जिले के गांव निरवाणा में रहने वाले पवन कस्वां से 19 फरवरी की रात को होने वाली थी। 18 फरवरी की रात पवन ने फोन पर रेणु से कहा कि उसे शादी में 11 लाख रुपए नकदी और एक लग्जरी गाड़ी ससुराल से गिफ्ट चाहिए। उस रात रेणु ने इसे मजाक समझकर टाल दिया। अगली सुबह 19 फरवरी को फिर पवन ने रेणु के सामने अपनी डिमांड रखी और नहीं देने पर बरात नहीं लाने की धमकी दी। रेणु ने फोन पर हुई बात की जानकारी अपने पिता राजेंद्र कासनियां और मां को दी। परिजनों ने रिश्ता करवाने वाले बिचौले से संपर्क कर मामले की जानकारी दी।

बिचौले ने लड़के पवन अौर उसके पिता से संपर्क कर पंचायत बुलाई। करते करते 19 फरवरी की रात हो गई। मुहूर्त के हिसाब से अब बरात दुल्हन के दरवाजे पर आने का समय हो चला था। लड़के वालों की तरफ से अपनी डिमांड नहीं छोड़ने पर दुल्हन रेणु ने साहसिक निर्णय लिया। उसने पवन से शादी से ही इंकार कर दिया। 

ब्रिटेन की महारानी के इवेंट में शामिल नहीं होंगे अमिताभ बच्चन, जानें वजह…

नई दिल्ली : वे बहुत ही चुनिंदा लोग होते हैं जिनको इंग्लंड की महारानी एलिजाबेथ II बकिंगम पैलेस में किसी ग्रैंड इवेंट के लिए आमंत्रित करती है। इन्हीं चुनिंदा लोगों में से एक हैं भारतीय फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन। उनको महारानी ने एक जगह आमंत्रित तो किया लेकिन वह इसमें शामिल नहीं होंगे।

दरअसल, महारानी एलिजाबेथ II ने यूके-इंडिया इयर आॅफ कल्चर के लॉन्च पर भारतीय अभिनेता अमिताभ बच्चन को आमंत्रित करने के लिए आमंत्रण भेजा था। लेकिन बच्चन ने इसमें शरीक होने में असमर्थता जताई क्योंकि वह इन दिनों काफी व्यस्त हैं। फिल्मों के बिजी शेड्यूल के चलते उन्होंने महारानी एलिजाबेथ II के इस इवेंट में शिरकत करने में असमर्थता जताई।

सूत्रों की मानें तो अमिताभ बच्चन खुद को सौभाग्यशाली समझते हैं कि उन्हें आमंत्रण के काबिल समझा गया लेकिन डेट नहीं होने के चलते उन्होंने विनम्रता से आमंत्रण को अस्वीकार किया है।

अमिताभ बच्चन ‘सरकार 3’ के मार्च में होने वाले ट्रेलर लॉन्च से पहले काफी बिजी हैं। वह आ​मिर खान के साथ विजय कृष्ण आचार्य की फिल्म ‘ठग्स आॅफ हिंदोस्तां’ के लिए भी तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा ‘आंखे 2’, ‘ड्रैगन’ आदि फिल्में भी उनके खाते में हैं।

लेटेस्ट कॉमेंट : बडिया है ब्रिटेन की महारानी के न्योते को ठुकराकर देश भक्ति ओर देश के प्रति स्वाभिमान व्यकट किया है। बेशक कारण कोई भी रहा हो! @Sant Prakash

एक गांव जहां न सांप को मारा जाता है, न सांप के काटने से कोई मरता है

maha shivratri special, unique tradition of village, no snake killing and nobody died due to snake

महाशिवरात्रि पर हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां सांप दोस्त बनकर रहते हैं। न सांप को मारा जाता है और न ही सांप के काटने से कोई मरता।

आप हैरान हो गए इस बात को जानकर, लेकिन ऐसी जगह है। हम बात कर रहे हैं, हरियाणा के हरियाणा के रोहतक का गांव रोहेड़ा की। इस गांव में पिछले 300 सालों से एक परंपरा चलती आ रही है। यहां सांप मारने को बहुत बड़ा पाप समझा जाता है। वहीं, आज तक यहां सांप के काटने से किसी की मौत नहीं हुई है और अकसर सांप आकर लोगों को काटते रहते हैं, लेकिन उन्हें मारा नहीं जाता।

इस अनोखी बात के पीछे की कहानी बताते हुए गांव के सरपंच सतबीर कुंडू कहते हैं कि करीब तीन सौ साल पहले कुंडू गौत्र के बुजुर्ग गांव घोघड़िया से आकर यहां बसे थे। उसी समय एक महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम लखमीर रखा गया। कहा जाता है कि उसी महिला की कोख से बच्चे के साथ एक सांप ने भी जन्म लिया। उस महिला ने सांप का पालन पोषण भी अपनी औलाद की तरह किया।

भाद्र मास की चौथ के दिन वह महिला खेतों में काम करने गई थी। इस दौरान उसने अपने बेटे और सांप को एक पालने में साथ-साथ सुला दिया। इस बीच उस महिला का भाई अचानक गांव आया और अपनी बहन को घर में न पाकर वह भी उसी खेत चला गया। महिला के भाई ने देखा कि उसके भांजे के साथ पालने में एक सांप लेटा हुआ है। किसी खतरे का अंदेशा जानकर उसने सांप को मार दिया। जिसके तुरंत बाद उस बच्चे की भी मौत हो गई।

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देश के लिए 51 साल की उम्र में दौड़ गए 517km. वो भी नंगे पैर, दुनिया ने किया सलाम

यूनाइटेड हिन्दी : मिलिंद सोमन एक ऐसी सेलिब्रिटी हैं जो हमें प्रेरित करने में कभी विफल नहीं हो सकते। सोमवार को इस 51 वर्षीय स्टार ने दुनिया की सबसे मुश्किल रेस पूरी कर अल्ट्रामैन मेराथन का खिताब हासिल किया है।

51 साल की उम्र में मॉडल-एक्टर मिलिंद सोमन ने 517 किलोमीटर दौड़ कर दुनिया की सबसे मुश्किल रेस पूरी कर ली है। मिलिंद ने यह कारनामा फ्लोरिडा के अल्ट्रामैन मेराथन में कर दिखाया है।

इस मेराथन में मिलिंद के अलावा चार और भारतीय थे। मिलिंद ने यह रेस तीन दिनों में पूरी की। इन तीन दिनों में पहले दिन 10 किलोमीटर तक तैरना होता है और 148 किलोमीटर बाइक चलाना होता है। दूसरे दिन 276 किलोमीटर तक बाइक चलाना होता है और तीसरे दिन 84 किलोमीटर दौडऩा होता है। दिलचस्प बात यह है कि मिलिंद ने यह रेस नंगे पैर पूरी की है।

मिलिंद के अलावा इस रेस में भाग लेने वाले अन्य भारतीयों में अभिषेक मिश्रा, कौस्तुभ रडकर, पृष्वीराज पाटिल और मनमध रेबा हैं। मिलिंद ने फेसबुक पर एक वीडियो भी पोस्ट किया है, जिसमें वो अपने अचीवमेंट के बारे में बात कर रहे हैं।

बता दें कि इसके पहले 2015 में मिलिंद ने 15 घंटे 19 मिनट में आयरनमैन चैलेंज पूरा कर ‘आयरनमैन ऑफ इंडिया’ का खिताब जीता था।

17 साल की इस लड़की के पीछे पड़ा है रहस्यमयी सांप, 34वीं बार डसा

Mysterious Snake Bite Manisha 34 Times.

डॉक्टर भी हैरान हैं। इस लड़की को 34वीं बार सांप ने डस लिया लेकिन इस पर जहर का कोई असर नहीं हुआ। तीन साल से सांप इसके पीछे पड़ा है। कभी घर तो कभी स्कूल। हर बार सांप आकर इसे डस जाता है। आखिर सांप क्यों इसे मारना चाहता है, आइए जानते हैं-

17 साल की मनीषा को बार-बार सांप डस रहा है मगर वह हर बार बच जाती है। शनिवार सुबह मनीषा अपनी मां के साथ घास काट रही थी तो इसी दौरान सांप ने उसे काट लिया। उसे बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया। नाहन अस्पताल में 5-6 घंटे बाद मनीषा को होश आया तो उसने पूरी बात बताई।

मनीषा के हाथ पर सांप के डसने का निशान भी है। उसने बताया कि ये सफेद सांप सिर्फ उसे ही दिखाई देता है। जब ये सांप आता है कि वह हिल भी नहीं पाती और न ही चीख या चिल्ला पाती है। डसने के बाद सांप चला जाता है और थोड़ी ही देर बार जहर भी उतर जाता है।

Mysterious Snake Bite Manisha 34 Times.

सिरमौर जिले के पोटा मानल पंचायत के मानल गांव की मनीषा के साथ काफी सालों से ऐसा हो रहा है। हैरानी है कि चमत्कारिक ढंग से हर बार जहर उतर जाता है। इसे केवल तीन-चार बार ही अस्पताल ले जाया गया है। देवताओं के गुर इस बारे में चौंकाने वाली बातें बताते हैं।

छत्रपति शिवाजी के ये ऐसे रहस्यमयी किले हैं जहां परिंदा भी पर नही मार सकता

शिवाजी के ये ऐसे रहस्यमयी किले हैं जहां परिंदा भी पर नही मार सकता
इस किले के कई गुफाये है जो अब बंद पड़ी हुयी है | कहा जाता है कि इन गुफाओ के अंदर ही शिवाजी ने गुरिल्ला युद्ध का अभ्यास लिया था |

मराठा साम्राज्य की पताका फहराने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी को हुआ था | मुगल सम्राट औरंगजेब को अपनी बहादुरी से झुका देने वाले शिवाजी का नाम देश के योद्धाओ में शुमार है | आज हम आपको उनके रहसमयी किलो के बारे में जानकारी देंगे , जो उन्होंने मुश्किल हालात में अपनी सत्ता को सुरक्षित रखने के लिए बनाये थे |

शिवनेरी किला : छत्रपति शिवाजी जा जन्म इसी किले में हुआ था | शिवनेरी किला , महाराष्ट्र के पुणे के पास जुन्नर गाँव में है | इस किले के भीतर माता शिवाई का मन्दिर है जिनके नाम पर शिवाजी का नाम रखा गया था | इस किले में मीठे पानी के दो स्त्रोत है जिन्हें लोग गंगा -जमुना कहते है | लोगो का कहना है कि इनसे साल भर पानी निकलता है | किले के चारो ओर गहरी खाई है जिससे शिवनेरी किले की सुरक्षा होती थी | इस किले के कई गुफाये है जो अब बंद पड़ी हुयी है | कहा जाता है कि इन गुफाओ के अंदर ही शिवाजी ने गुरिल्ला युद्ध का अभ्यास लिया था |

 

पुरदर का किला : पुरंदर का किला पुणे से 50 किमी की दूरी पर सासवाद गाँव में है | इसी किले में दुसरे छत्रपति साम्बाजी राज भौसले का जन्म हुआ था | साम्बाजी छत्रपति शिवाजी के बेटे थे | शिवाजी ने पहली जीत इसी किले पर कब्जा करके की थी | मुगल सम्राट औरंगजेब ने 1665 में इस किले पर कब्जा कर लिया था जिसे महज पांच सालो बाद शिवाजी ने छुड़ा लिया था और पुरन्दर के किले पर मराठा झंडा लहरा दिया था | इस किले में एक सुरंग है जिसका रास्ता किले के बाहर की ओर जाता है | इस सुरंग का इस्तेमाल युद्ध के समय शिवाजी बाहर जाने के लिए किया करते थे |

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कंगना ने शहीदों के बलिदान व पराक्रम को किया सैल्यूट, BSF जवानों से मुलाकात की


नई दिल्ली : कभी रानी, कभी सिमरन, तो कभी रिवॉल्वर रानी- ये हैं कंगना रनौत, जो अपने दमदार किरदार से फिल्म इंडस्ट्री और लोगों के दिलों में बहुत ही कम समय में एक खास जगह बना ली है।

कंगना रनौत की आने वाली फिल्म रंगून के रिलीज होने में अब कम ही समय बचा है। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री कंगना रनौत इन दिनों प्रमोशन में जुटी हैं। इसी कड़ी में वो मंगलवार को जम्मू में थीं। जहां जवानों के साथ कंगना ने एक पूरा दिन बिताया। कंगना जवानों के साथ घुली मिलीं और पूरा दिन सेलिब्रेट किया। दूसरे विश्व युद्ध के समय की बनी इस फिल्म में ब्रिटिश काल की महक है। जो एक विंटेज फील कराती है।

सुबह 9:30 बजे अभिनेत्री जम्मू पहुंची। जहां बीएसएफ के जवानों द्वारा उनका शानदार स्वागत किया गया। बीएसएफ के बैंड ने उनके सम्मान में धुन बजाई तो अधिकारियों और उनके परिवार ने कंगना की अगुवानी की, जिन्हें उनसे मिलना था। इसके बाद कंगना को जिप्सी से बीएसएफ कैंप ले जाया गया। जहां वो काफी देर रुकीं। इसी दौरान कंगना बीएसएफ स्कूल के बच्चों से भी मिलीं, उनके साथ काफी बात की। बच्चे अपने बीच कंगना को पाकर खुश थे।

विश्व रिकॉर्ड: एक साथ 115 सैटेलाइट लांच करेगा भारत का ISRO, दुनिया में कोई यहां तक नहीं पहुंचा

ISRO एक साथ लांच करेगा 115 सैटेलाइट, बनेगा कभी ना टूटने वाला विश्व रिकॉर्ड

बंगलुरु : Indian Space Research Organisation (ISRO) आने वाली 15 फरवरी को इतिहास बनाने की तैयारी कर रहा है। क्योंकि इस दिन ISRO 104 सैटेलाइट लांच करेगा जोकि World Record होगा।

खबर के मुताबिक, ये लांचिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेसकोर्ट से होगी। इसरो ने खुद इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि हमने एक साथ 104 सैटेलाइट को 15 फरवरी सुबह 9 बजे सूर्य के समकालिक कक्ष में भेजने का फैसला लिया है।

ये दूरी पृथ्वी से करीब 500 किमी दूर है। इन सैटेलाइटों में से तीन भारतीय, 88 यूएस और बाकी की इस्राइल, कजाखस्तान, नीदरलैंड, स्विटजरलैंड, यूनाइटेड अरब अमीरात से होंगी।

बता दें कि एक 320 टन के रॉकेट (PSLV-C37) की मदद से इन सैटेलाइटों को लांच किया जाएगा। इसमें 1500 किलो का अतिरिक्त भार भी शामिल होगा। जिसमें 650 किलो के रिमोट sensing Cartosat-2 और दो (IA and IB) 15-15 किलो के नैनो सैटेलाइट शामिल होगें।

हालांकि, इंडियन स्पेस एजेंसी 22 जून को एक साथ 20 सैटेलाइट लांच कर चुकी है। जबकि 15 फरवरी को एक साथ 104 मिसाइल लांच होने से जून 2014 में 37 सैटेलाइट एक साथ लांच होने का रिकॉर्ड टूट जाएगा। इससे पहले साल 2013 में अमेरिका की नासा ने 29 सैटेलाइट एक साथ लांच कर रिकॉर्ड बनाया था।

अरबी टुकड़ों पर पलने वाले बॉलीवुड ने हिन्दुओं की माँ-बहनों के बलिदान मज़ाक बना दिया : केशर देवी

 

ब्लॉग: केशर देवी (यूनाइटेड हिन्दी) :- स्कूल की बात है, स्कूल में जब कोई टीचर नहीं आते थे तो उनकी जगह टेम्परेरी टीचर कुछ दिन के लिए पढ़ाने आते थे। तब मैं सातवीं क्लास में थी और हमारी हिन्दी की मैम एक दो महीने के लिए बाहर गयीं थीं। उनकी जगह एक नीरज सर पढ़ाने आने लगे, टेम्परेरी टीचर्स अक्सर मस्त होते हैं, मज़े में पढ़ाते हैं। हम थे भी तब छोटे तो वो हमको कहानियाँ सुनाया करते थे, हम रोज उनके पीछे पड़ जाते सर कहानी, सर कहानी, अब उनको कोर्स भी कवर करना होता था तो हफ्ते में 2-3 कहानी तो सुनाते ही देते थे। जब वो कहानी सुनाते तो सारी क्लास चुपचाप सुनती, SUPW के पीरिएड भी वो ही ले लेते और हम कहानी सुनते रहते।

ज्यादातर वो इतिहास की बातें बताते, एक बार उन्होंने स्वामी विवेकानन्द की कहानी सुनाई, कैसे उन्होंने शून्य पर भाषण दिया, एक बार भानगढ़ के भूतों की और एक बार राजा हम्मीर की, एक बार भगत सिंह की और एक बार अक़बर के नवरत्नों की।

पर जिस कहानी ने हमें पूरी तरह झकझोर डाला था और कई साल तक क्लास के सब बच्चे उस कहानी की वजह से उनको याद करते रहे वो कहानी थी रानी पद्मिनी के जौहर की। क्लास में वीररस की वर्षा हो रही थी, शायद ही कोई ऐसा बच्चा था जिसके रोंगटे खड़े न हों। चित्तौड़ के किले की विश्वसुन्दरी रानी के सौंदर्य, उसके पति के अद्भुत पराक्रम, क्षत्रियों की विस्मयकारी रणनीति, आततायी ख़िलजी की नीचता और किले की हज़ारों वीरांगनाओं के भीषण जौहर की वह कहानी मेरे दिल में आज तक ज्यों की त्यों बनी हुई है। चित्तौड़ के किले की मिट्टी आज भी काली है, चित्तौड़ के किले से रात आठ बजे बाद आज भी मर्माहत चीखें सुनाई पड़ती हैं, यह सुनकर हम बच्चे अनुमान लगा पाते थे कि जिन्दा जलने का दर्द क्या होता है? पर बौद्धिक पशु यह नहीं समझ सकते कि क्यों उस फूल सी कोमल रानी ने अपनी सुंदरता समेत स्वयं को दावानल में झुलसा डाला था? क्यों किले की हज़ारों औरतें, बच्चे, बूढ़े आग के दरिया में हंसकर कूद पड़े? रतन सिंह, गोरा और बादल जैसे हज़ारों क्षत्रिय वीरों ने अपने प्राण युद्ध में बलिदान कर दिए?

मैं बचपन में सुनी उस कहानी को आज इसलिए लिख रही हूँ ताकि वेटिकन-अरब के टुकड़ों पर पलने वाले बॉलीवुड के जानवरों ने हिन्दुओं की माँ बहनों के साहस और बलिदान का भद्दा मज़ाक बना डाला है।

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