जानिए : आपके नाखूनों पर बनी ये आकृति कुछ ऐसे खोलती है आपके स्‍वास्‍थ्‍य का राज


वैसे तो आपके शरीर के हर एक अंग का अपना एक खास महत्‍व है। सभी अंग हम सबको फिट एंड फाइन रखने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। इन्‍हीं अंगों में से एक है आपके हाथ भी। तमाम कामों को करने के लिए ये हमारे शरीर में खासे जरूरी हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आपके हाथ, आपके बारे में बहुत कुछ बताते हैं। मसलन, आपकी हथेलियों की लकीरें आपका भविष्‍य बताती हैं। आपकी उंगलियां आपके व्‍यक्‍ितत्‍व को परिभाषित करती हैं। इसके अलावा एक और खास चीज है आपके हाथ में जो आपको आपके बारे में बहुत जरूरी बात बताती है। जानना चाहेंगे क्‍या…।

ये है Lunala
अब आप सोच रहे होंगे कि ये Lunala क्‍या है। दरअसल आपके नाखूनों का वह निचला हिस्‍सा जो अपेक्षाकृत ज्‍यादा सफेद होता है और कुछ-कुछ आधे चांद की आकृति सा होता है। ये आपके पूरे नाखून का सबसे अहम हिस्‍सा होता है। अंग्रेजी में इसे ही Lunala कहते हैं। ये आपके नाखून पर महज एक डिजाइन नहीं है। बल्‍कि ये डिजाइन आपके स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर बहुत सारे राज खोलती है।

कौन से हैं वो अहम राज
इसको किसी के भी स्‍वास्‍थ्‍य को मापने का बैरोमीटर माना जाता है। ऐसा है चीन के एक परंपरागत स्‍वास्‍थ्‍य समुदाय का। इनका मानना है कि इस Lunala की स्‍थिति आपके स्‍वास्‍थ्‍य का सूचक है। आपका स्‍वास्‍थ्‍य जब सही नहीं होता है, तो ये Lunala आपके नाखून से लगभग गायब ही हो जाता है। इसके अलावा अगर आपके नाखून पर ये Lunala पुरानी ही अवस्‍था में पूरी तरह से है तो इसका मतलब ये है कि आप पूरी तरह से स्‍वस्‍थ हैं।

दिल के मरीजों की एक्सरसाइज के समय ध्यान देने योग बातें!!

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हार्ट सर्जरी के बाद जब भी एक्सरसाइज की शुरुवात करें, जॉगिंग या स्विमिंग जैसी हल्की एक्सरसाइज से ही करें!

यकीन मानिए आज के समय में अधिकतर लोग जो हाइपरटेंशन, दिल से जुड़ी बीमारियों और डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं उसकी मुख्य वजह उनकी सुस्त और खराब जीवनशैली ही है। घंटों एक ही जगह पर बैठकर काम करना और जंक फ़ूड का अधिक सेवन जैसी आदतें ही उन्हें इन बीमारियों की चपेट में ला रही हैं। हालाँकि हम सभी यह अच्छी तरह जानते हैं कि रोजाना एक्सरसाइज करके काफी हद तक इन बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है लेकिन फिर भी कई लोग समय की कमी और व्यस्तता के कारण एक्सरसाइज नहीं कर पाते हैं। अगर आप दिल से जुड़ी किसी भी तरह की बीमारी से पीड़ित हैं तो एक्सरसाइज करना बहुत ज़रूरी हो जाता है। मुंबई स्थित एशियन हार्ट इंस्टिट्यूट के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ, निलेश गौतम यहाँ दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए बता रहे हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

 
  • अगर हाल ही में आपको दिल से जुड़ी कोई समस्या हुई है और अभी उसका इलाज चल रहा है तो इस दौरान ऐसी कोई भी एक्सरसाइज न करें जिससे हार्ट पर ज्यादा दवाब पड़ता हो क्योंकि इससे आपकी स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है।
  • अगर हाल ही में आपने हार्ट सर्जरी करवाई है और अब आप एक्सरसाइज करने के बारे में सोच रहे हैं तो शुरुवात में कोई भी हैवी एक्सरसाइज न करें बल्कि सिर्फ वाक करें। रोजाना सुबह और शाम आराम से 4-6 किलोमीटर वाक करें। किसी भी सर्जरी के कम से कम 6 हफ़्तों बाद ही किसी तरह की एक्सरसाइज शुरू करनी चाहिये।

सावधानियां जारी है… click next

इस तरह आप के अंदर पलंगतोड़ ताकत आ जाएगी…

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सेक्स एक बेहद सुखद अनुभव हैं। हर स्त्री या पुरुष को एक उम्र के बाद संबंध बनाने की इच्छा होती है और ये बहुत ही स्वाभाविक भी है। सेक्स में अपने पार्टनर को संतुष्ट करना बहुत ज़रूरी है मगर कई ऐसे पुरुष है जो अपनी पार्टनर को उन पलों के दौरान पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाते है। वह ज़्यादा समय तक सेक्स करना चाहते है मगर ऐसा कर नहीं पाते। ये बात उन्हें हर वक्त सताती है और इसकी वजह से उन पुरुषों का दुसरे काम में मन भी नहीं लगता।

आज हम आपको कुछ ऐसी बाते बताते हैं जिससे आप लंबे समय तक संबंध बना सकेंगे।

पोजीशन बदले: लंबे समय तक सेक्स करने में पोजीशन काफी अहम् रोल निभाती है। सेक्स के दौरान अलग अलग पोजीशन का उपयोग करें। इससे सेक्स के दौरान रोमांच और वक्त दोनों बढ़ता है।

फ़ॉरप्ले पर अधिक ध्यान दे: सेक्स में फोरप्ले की एक अहम् भूमिका होती है। इससे स्त्री और पुरुष दोनों भी उत्साहित होते है। सेक्स से ज़्यादा फोरप्ले को महत्त्व देना चाहिए इससे आपका सेक्स का समय भी बढ़ता है और आपकी पार्टनर जल्द संतुष्ट भी होती है।

व्यायाम करें: सेक्स के दौरान फिटनेस बेहद अहम् भूमिका निभाती है। बेड में बेहतर परफॉर्म करने के लिए तंदुरुस्त होना बहुत ज़रूरी है। अगर आप फिट होंगे तभी आप लंबे समय तक सेक्स कर सकोगे और अपनी पार्टनर को खुश भी रखोगे। इसके अलावा सिगरेट या शराब का सेवन करना पूरी तरह से बंद कर दे।

गैजेट्स दूर रखे: अपने सेक्स समय को बढ़ाने के लिए हर उस चीज़ को अपने से दूर रखे जो इसमें खलल डाल सकती है। फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स को अपने से दूर ही रखे। जिस जगह आप सम्बन्ध बना रहे हो वहाँ केवल आप दोनों ही होने चाहिए।

जब वियतनाम ने कहा- अगर शिवाजी हमारे देश में पैदा होते तो हम विश्व पर राज करते

अगर शिवाजी हमारे देश में पैदा होते तो हम विश्व पर राज करते

छत्रपती शिवाजी महाराज सिर्फ महान योद्धा ही नहीं थे, वे महान ईश्वर भक्त एवं देशप्रेमी भी थे। उनके उच्च चरित्र की आज भी मिसाल दी जाती है। ऐसे महापुरुषों का यश सदैव अमर रहता है। भारत भूमि ही नहीं, विदेशों में भी छत्रपती शिवाजी महाराज के प्रशंसक व समर्थक हैं, लोग वहां उन्हें आदर्श मानते हैं। प्रसिद्ध आध्यात्मिक पत्रिका कल्याण में उनकी गाथा से संबंधित एक सत्यकथा प्रकाशित हो चुकी है।

एक छोटे-से देश वियतनाम ने जब अमरीका जैसे शक्तिशाली राष्ट्र को शिकस्त दी तो यह विश्व के इतिहास में अनोखी घटना थी। विजय के पश्चात इस युद्ध के नायक हो ची मिन्ह से पत्रकारों ने प्रश्न पूछा – आप अमरीका जैसे देश को कैसे पराजित कर सके?

इस पर मिन्ह ने जवाब दिया, अमरीका जैसी महाशक्ति को पराजित करना असंभव है, परंतु उस महाशक्ति को टक्कर देने के लिए हमने एक महान राजा के चरित्र का अध्ययन किया। उसी से हमें प्रेरणा मिली। हमने युद्ध करने की नीति बनाई और आज विजयश्री ने हमारा वरण किया है।

पत्रकारों ने पूछा, कौन हैं वे राजा?

मिन्ह ने जवाब दिया, हिंदुस्तान के छत्रपति शिवाजी महाराज, अगर वे हमारे देश में पैदा हुये होते तो आज हम पूरे विश्व पर शासन कर रहे होते।

इस घटना के कई वर्षों बाद वियतनाम की विदेश मंत्री भारत की राजधानी दिल्ली आईं और उन्होंने यहां के कई ऐतिहासिक स्थलों व महापुरुषों की समाधि देखी। उन्होंने पूछा, छत्रपती शिवाजी महाराज की समाधि कहां है ?

अधिकारियों ने जवाब दिया, रायगढ़।

वियतनाम की विदेश मंत्री रायगढ़ पहुंचीं और उन्होंने छत्रपती शिवाजी की समाधि के दर्शन किए। साथ ही वहां की मिट्टी उठाई और अपने साथ वियतनाम ले गईं।

पत्रकारों ने जब उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने जवाब दिया, यह वीरों की भूमि है। इसी मिट्टी में छत्रपती शिवाजी व महारणा प्रताप जैसे उच्च कोटि के धर्मात्मा एवं शूरवीरों का जन्म हुआ है। इसलिए भारत की यह मिट्टी मैं वियतनाम की मिट्टी में मिलाऊंगी, ताकि हमारे यहां भी शिवाजी व महाराणा जैसे शूरवीर पैदा हों।

 

पेप्सी-कोक को भारत से भगाने के लिए तमिलनाडु से अभियान की हुई शुरुआत…

पेप्सी-कोक के खिलाफ तमिलनाडु से जागरण की शुरुआत…

यूनाइटेड हिन्दी : तमिलनाडु ट्रेडर्स एसोसिएशन के सभी व्यापारी एक मार्च से पेप्सी और कोक के सभी उत्पादों का बहिष्कार करने जा रहे हैं। सभी व्यापारी संगठनों ने एक बैठक में निर्णय लिया है कि पेप्सी-कोक के उत्पादों को नहीं बेचा जाएगा। यूनाइटेड हिन्दी ही जमीनी रिपोर्टर से खबर है कि विभिन्न माध्यमों द्वारा जनजागरण फैलाए जाने तथा पेयजल एवं भूमिगत जल की स्थिति दिनोंदिन ख़राब होने के बाद से जनता में इन कंपनियों के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों ने यूनाइटेड हिन्दी संवादाता मनीष शर्मा से कहा है कि ये दोनों कम्पनियां तमिलनाडु में भूजल का अंधाधुंध दोहन कर रही हैं, जिस कारण भूजल का स्तर बहुत नीचे चला गया है। व्यापारियों के इस निर्णय से केवल तमिलनाडु में ही इन कंपनियों को लगभग 1400 करोड़ रूपए का नुक्सान होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यदि व्यापारी और जनता एक कदम और आगे बढ़ाकर, पेप्सी-कोक के आलू चिप्स भी बेचना बंद कर दें तो यह नुक्सान और अधिक गहरा सकता है।

तमिलनाडु व्यापारी एसोसिएशन में छोटे-बड़े सभी मिलाकर 15,000 व्यापारी हैं, जबकि दुसरे व्यापारी संगठन भी इस मुहीम से जुड़ते चले जा रहे हैं। तमिलनाडु में पेप्सी का मार्केट शेयर 60% है, कोक का लगभग 30% और बाकी के शीतल पेयों का 10% दोनों ही कम्पनियों ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े सितारों को विज्ञापन हेतु अनुबंधित कर रखा है। पेप्सिको कम्पनी के तमिलनाडु में सात बड़े-बड़े प्लांट हैं, जबकि कोक के पांच प्लांट हैं…. जिनमें लाखों गैलन पानी रोजाना पेप्सी निर्माण के लिए उपयोग किया जाता है, तथा लगभग इतना ही पानी बेकार भी जाता है।

ताजा कमेन्ट : Prashant Sen : मुझे तो साउथ इंडियंस ज्यादा जागरूक लगते है। नार्थ इंडियंस से ज्यादा साउथ इंडियंस अपने कल्चर को समझते है और संम्मान करते है। जल्लीकट्टू वाले प्रकरण से ये प्रमाणित होता है। बाकि भारत में भी सभी को एकजुट हो कर इन कंपनियों के खिलाफ खड़े होना चाहिए ।

सनद रहे कि इससे पहले केरल हाईकोर्ट भी इन दोनों महाकाय कंपनियों को भूजल के अत्यधिक दोहन को लेकर केरल से बाहर का रास्ता दिखा चुका है, परन्तु इन कंपनियों द्वारा उच्च स्तर पर सांठगाँठ करके उच्चाधिकारियों को रिश्वत खिलाकर बड़े पैमाने पर धांधलियाँ की जाती हैं। न तो दोहन किए जाने वाले भूजल का कोई हिसाब होता है और ना ही ये कम्पनियां बारिश में भूजल को रीचार्ज करने के कोई ठोस उपाय करती हैं। इस कारण जमीन में पानी का स्तर तेजी से घट रहा है और उधर तमिलनाडु और कर्नाटक आपस में कावेरी के पानी को लेकर भिड़े हुए रहते हैं। गरीब किसान पिसता रहता है, जबकि शहरी जनता को पीने का पानी महंगे दामों पर खरीदना पड़ता है। इन दोनों ही महाकाय कंपनियों पर जितनी जल्दी और जितनी प्रभावी लगाम कसी जाए उतना ही बेहतर होगा। तमिलनाडु के व्यापारी और जनता तो जाग रहे हैं, क्या बाकी भारत में भी ऐसा होगा ?

अगले पृष्ठ पर पढ़िये : आप को कभी आश्चर्य हुआ कि कोका कोला वास्तव में क्या है ? नही ?