अगर आपके चेहरे पर भी हैं बाल और चाहते हैं हमेशा के लिए हटाना, तो अपनाएं ये रामबाण उपाय …

मनुष्य को प्रकृति से बहुत सी चीजें ऐसी मिली हैं जिन्हें वो बेहद नापसंद करता है और उन चीजों को वो हमेशा खुद से दूर रखना चाहता है. स्वभाव से मनुष्य हमेशा सुन्दरता और खूबसूरती के प्रति आकर्षित होता है और हमेशा खुद को साफ सुथरा रखने का प्रयास करता है. इसी क्रम में बाल और नाखून हमारे शरीर के ऐसे अंग हैं जो कि हमारे लिए पूरी तरह से अवांछित और अनुत्पादक हैं लेकिन प्रकृति कभी भी कुछ भी बिना वजह नहीं करती हमें भले ही लगता हो कि हर हफ्ते बेवजह बढ़ जाने वाले नाखून और बाल हमें परेशान करने लिए हैं तो ऐसा नहीं है. लेकिन आप परेशान हो चुके हैं अपने अवांछित बालों को हर हफ्ते पार्लर में जाकर साफ कराते कराते तो हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे उपाय जिनसे आप घर बैठे अपने चेहरे और शरीर के अन्य अवांछित बालों को हटा सकते हैं और उपाय पूरी तरह सुरक्षित और आयुर्वेदिक हैं.

आप अपने चेहरे पर आने वाले अवांछित बालों को हटाने के लिए पार्लर जाने से छुट्टी पाना चाहते हैं तो इन घरेलू उपायों को अपना सकते हैं. इनके लिए आपको बाजार से रेडिमेड क्रीम पाउडर या कोई अन्य प्रोडक्ट लाने की जरूरत नहीं है. आप अपने किचन में रखे रोजमर्रा के सामानों से यह प्रयोग कर सकते हैं.

 
  • इसके लिए आपको एक आयुर्वेदिक मिश्रण बनाने की जरूरत हो जिसमें इन चीजों की जरूरत पड़ेगी-
  1. हरताल- 10 ग्राम
    2. मैंनसिल- 10 ग्राम
    3. बुझा चूना- 10 ग्राम
    4. शंख भस्म- 10 ग्राम
    5. नीबू का रस- 50 ml

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अगर आप भी खाते हैं अंकुरित अनाज तो हो जाएं सावधान, हो सकते हैं कई नुकसान!

अगर आप भी खाते हैं स्प्राउट्स तो हो जाएं सावधान, हो सकते हैं कई नुकसान!

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हेल्थ डेस्क ( यूनाइटेड हिन्दी ) : स्प्राउट्स यानि अंकुरित अनाज खाना सभी को बहुत ही अच्छा लगता है। अंकुरित अनाज खाने में तो स्वादिष्ट होता ही है साथ में यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। जो लोग जिम (व्यायाम) जाते हैं, वह ज्यादा मात्रा में प्रोटीन पाने के लिए स्प्राउट्स (अंकुरित अनाज) का सेवन करते हैं। लेकिन कई लोग इस बात से अनजान रहते हैं कि स्प्राउट्स शरीर को फायदा पहुंचाने के साथ-साथ कई तरह के नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

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हाल ही में हुए एक शोध से यह बात पता चली है कि अंकुरित अनाज में नमीं होने की वजह से साल्मोनेला, ई कोली और लिस्टरिया जैसे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। ये बैक्टीरिया कई तरह की बिमारियों को जन्म देते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि स्प्राउट्स खाने से कौन-कौन से नुकसान हो सकते हैं।

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– इन्फैक्शन: स्प्राउट्स में नमी होती है, इस वजह से इसमें साल्मोनेला नाम का बैक्टीरिया होता है, जो कई तरह की स्किन सम्बन्धी बीमारियों और इन्फैक्शन के लिए जिम्मेदार होता है।

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– फ़ूड पॉइजनिंग का खतरा: अंकुरित चीजों के सेवन से फूड पॉइजनिंग होने का खतरा रहता है, क्योंकि इसमें मौजूद लिस्टिरिया बैक्टीरिया पेट की समस्या को बढ़ा देता है।

– किडनी का रोग: आपको जानकर हैरानी होगी कि जो लोग ज्यादा मात्रा में अंकुरित चीजों का सेवन करते हैं, उन्हें किडनी की बिमारी होने का खतरा बना रहता है। अंकुरित चीजों में मौजूद लिस्टिरिया बैक्टीरिया किडनी पर बुरा प्रभाव डालती है। जिससे किडनी की बिमारी बढ़ जाती है।

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– टायफॉयड: अंकुरित चीजों में साल्मोनेला टाइफी नाम का बैक्टीरिया पाया जाता है। जो टायफॉयड की समस्या को बढ़ा देता है।

– यूरिनरी ट्रैक्स इन्फैक्शन: अंकुरित अनाज में मौजूद ई कोली शरीर में जाकर मूत्र नली की समस्या को बढ़ा देता है।

अब आप समझ गए होंगे कि जो चीजें फायदेमंद होती हैं, उसके कुछ नुकसान भी होते हैं। तो अगली बार से स्प्राउट्स खाने से पहले इन सब बातों पर गहराई से विचार जरूर कर लें।

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हर मां अपने बच्चे को जरूर खिलाये देशी गाय का घी, क्योंकि उसमें पाए जाते हैं ये गुण!

अपने बच्चे को जरूर खिलाये देशी घी

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हेल्थ डेस्क ( यूनाइटेड हिन्दी ) : पुराने जमाने के लोग लम्बी और सेहतमंद जिंदगी जीते थे। इसका कारण यह था कि उन्हें खाध्य पदार्थ की लगभग सभी चीजें शुद्ध मिला करती थीं। लेकिन आजकल बढ़ते प्रदूषण की वजह से कोई भी चीज शुद्ध नहीं बची है। यही वजह है कि आज के समय में अधिकतर व्यक्ति ज्यादा बीमार पड़ता है। उसकी उम्र भी पहले की अपेक्षा बहुत छोटी हो गयी है। आज अगर कोई चीज थोड़ी शुद्ध बची है तो वह है भारतीय नश्ल की देशी गायों का दूध। जानवरों में सबसे ज्यादा फायदेमंद दूध देशी गाय का होता है। इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो इंसान के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

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दूध से भी ज्यादा फायदेमंद होता है देशी गाय का घी: देशी गाय का घी सेहत के साथ-साथ कई अन्य कामों में भी उपयोग किया जाता है। देशी गाय का घी गाय के दूध से भी कई गुणा अधिक ज्यादा फायदेमंद होता है। देशी गाय का घी बड़े लोगों के साथ ही बच्चों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

देशी गाय का घी 4-6 महीने के बच्चे के लिए किसी औषधि से कम नहीं है। इसे बच्चों को दाल में या सूप में मिलाकर देने से बच्चे का विकास तेजी से होता है।

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देशी गाय का घी बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उन्हें बिमारियों से दूर रखता है। आइये आज जानते हैं देशी घी बच्चों के लिए किस तरह से फायदेमंद है।

अगले पृष्ठ पर पढ़िये देशी घी के अन्य फायदे 

जरूर पढ़िये: मच्छरों से बचने के प्राकृतिक सप्तसूत्री उपाय

मच्छरों से मुक्ति

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विनय झा :- जहरीले रसायनों से बने मच्छर भगाने या मारने वाले उत्पाद बाज़ार में धड़ल्ले से मिल जायेंगे, किन्तु मच्छरों से अधिक मनुष्यों को उनसे क्षति पहूँचती है | मच्छरों को मारना जीवहत्या भी है, उन्हें भगाने का उपाय होना चाहिए | ऐसे बहुत से उपाय हैं, किन्तु जहरीले रसायन बेचने वाली कम्पनियां तो विज्ञापन पर पैसा खर्च कर सकती है, जबकि स्वस्थ और प्राकृतिक उपायों के प्रचार से मीडिया को लाभ नहीं है !

मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर सप्तसूत्री उपाय प्रस्तुत कर रहा हूँ :–

1 → सबसे कारगर है एक पौधा जिसका नाम किसी को पता नहीं है | दक्षिण भारत (उडुपी, कर्नाटक) से मार्च 2011 में कार द्वारा लौटते समय मध्यप्रदेश के जंगल में एक साधु की कुटी में यह पौधा मैंने देखा था जिसकी गन्ध मनुष्य को नहीं लगती, किन्तु तुलसी पौधे के आकार के इस पौधे के कारण कई एकड़ तक जंगल में एक भी मच्छर (और अन्य कीटाणु) नहीं मिला ! वह स्थान है जबलपुर नगर के दक्षिणी छोर से बीस किलोमीटर दक्षिण | जबलपुर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के ठीक किनारे लगभग बीस-पच्चीस मीटर ऊँची हनुमान जी की लाल मूर्ति है | वह मन्दिर और संलग्न आश्रम हिनौता ग्राम के अन्तर्गत पड़ता है, यद्यपि गाँव हटकर है, आश्रम का क्षेत्र जंगली है | उसी आश्रम में यह पौधा है | वहाँ के साधु महाराज ने मुझे बताया कि वे एक स्थान पर अधिक दिनों तक नहीं टिकते, अतः हो सकता है अब वे वहाँ नहीं मिले और उस पौधे की जानकारी वहाँ किसी अन्य व्यक्ति को न हो ! पिछले पाँच वर्षों के दौरान मैंने बहुत लोगों को यह जानकारी दी जिनमे कुछ तो उसी क्षेत्र के हैं, किन्तु किसी ने उस आश्रम तक जाने का कष्ट नहीं किया | उस पौधे का प्रचार हो जाय तो पूरी मानवजाति का भला होगा | साधु महाराज ने कहा कि वर्षा के मौसम में उस पौधे के बीज निकलते हैं, किन्तु वर्षा के दौरान वहाँ जाने का मुझे अवसर नहीं मिला |

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2 → इन्टरनेट पर सर्च करने से बहुत से पौधों के विवरण मिल जायेंगे जिनके प्रभाव से मच्छर भागते हैं | वे पौधे दुर्लभ हैं, कुछ पौधे नर्सरी में मिल जायेंगे | उनमें से एक पौधा सर्वसुलभ है जिसका प्रभाव मच्छर ही नहीं, लगभग सभी कीटों पर पड़ता है, यद्यपि प्रभाव अधिक नहीं है — गेन्दा | प्लास्टिक की बाल्टी में गेन्दा का पौधा लगाएं, दिन भर धूप में रखे और सायं कमरे में ले आयें | सारे मच्छर तो नहीं भागेंगे, किन्तु अधिकाँश भाग जायेंगे और जो बचेंगे उनकी शक्ति अपनी जान बचाने में लग जायेगी, बहुत कम मच्छर ही आपको काट पायेंगे | कीड़े-मकोड़े भी भाग जायेंगे | बनारस में मैं इस विधि का प्रयोग तब करता था जब मैं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भीतर रहता था | बाद में जहाँ मेरा आवास था वहाँ ऐसा सम्भव नहीं हो सका, क्योंकि सबसे ऊपर की मंजिल पर केवल मेरा ही फ्लैट था जहाँ मेरी अनुपस्थिति में पानी देने वाला कोई नहीं था जिस कारण सारे पौधे सूख गए | किन्तु बगल में अस्सी नाले की गन्दगी के बावजूद वहाँ मच्छर बहुत कम थे |

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3 → भोजन में तेल, मसाले, मिर्च, आदि मैंने बीस वर्ष पहले त्याग दिया था जिस कारण मच्छरों को मेरा रक्त स्वादिष्ट नहीं लगता था ! इन्द्रियाँ सभी जीवों के पास होती हैं, भले ही वैज्ञानिकों को दिखे या न दिखे | मच्छर आसुरी योनि का जीव है जिसकी उत्पत्ति एक राक्षसी से हुई है (योग वासिष्ठ)| असुरों में ऐन्द्रिकता अत्यधिक होती है, अतः स्वाद के प्रति मच्छर आकर्षित होता है | सात्विक भोजन करने वालों पर मच्छर का आक्रमण तभी होता है जब स्वादिष्ट रक्त वाले मनुष्य आसपास न हो | इस बात को हँसी में न लें | मेरे कमरे में बैठे दूसरे लोगों को मच्छर काटते रहते थे जिनके कारण मुझे जहरीले रसायन वाले उत्पाद खरीदने पड़ते थे |

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4 → सरसों का तेल चमड़ी पर रोजाना मालिश करें | भोजन में तेल बिलकुल न लें, सम्भव हो तो भोजन में देसी गाय का शुद्ध घी प्रयुक्त करें | किन्तु मालिश में सरसों का तेल न केवल मच्छरों को बल्कि बैक्टीरिया से लेकर अन्य सभी कीटों को दूर भगाएगा | चमड़ी पर जबतक तेल का प्रभाव रहेगा तबतक मच्छर चाहकर भी नहीं काटेंगे | जहाँ अधिक समय तक बैठना हो और मच्छर परेशान करें वहाँ खुले अंगों, जैसे कि हाथ-पाँव, पर सरसों का तेल मल लिया करें | बाजारू रसायनों का दुष्प्रभाव सरसों के तेल में नहीं होता | सरसों का तेल प्राकृतिक एन्टी-बायोटिक है | आपने देखा होगा कि आम के अचार को गृहिणियां सरसों के तेल में डुबाकर सालों-साल सुरक्षित रखती हैं | किन्तु शरीर के भीतर देशी गाय का घी सर्वोत्तम एन्टी-बायोटिक है जो इम्यून प्रणाली को शक्ति देकर सभी रोगों से लड़ने की क्षमता देता है |

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5 → शहर में कूड़े के भण्डार से, रुके हुए जल के सड़ने से, आदि कारणों से शहर में मच्छर का प्रकोप बढ़ता है यह तो सर्वविदित है | नागरिक समितियां बनाकर नगरपालिका पर भी दवाब बनाएं और स्वयंसेवक बनकर स्वयं भी शहर की सफाई करें | घर और आसपास गन्दगी न रहने दें, और यदि गन्दगी है तो (फिनाइल या) रामदेव के गोनाइल का प्रयोग करें |

6 → सायंकाल मच्छरों के गृहप्रवेश का मुहूर्त होता है | गाँवों में लोग उस समय गोबर के उपले (गोइठे) का धूआँ करते हैं ताकि मनुष्यों और मवेशियों के वासस्थल से मच्छर दूर भाग जाएँ | शहर में भी सायंकाल कुछ देर के लिए छोटे से मिटटी के गमले में गोबर के उपले का धूआँ करके बाद में दरवाजे और खिड़कियाँ बन्द कर दें या जालीदार खिड़कियों का प्रयोग करें | सोने के कमरे में बाजारू रसायनों के स्थान पर मसहरी का प्रयोग करें | वैसे भी बाजारू रसायनों के प्रति मच्छरों में प्रतिरोधक शक्ति बहुत बढ़ गयी है जिस कारण अब बहुत अधिक बाजारू रसायनों का प्रयोग करना पड़ता है जिनका दुष्प्रभाव मनुष्यों पर भी पड़ता है, खासकर बच्चों पर |

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7 → आजकल लोग सफ़ेद सीमेंट से ह्वाईट-वाश कराने लगे हैं | यदि ऐसा ही करना हो तब भी उसपर (पान आदि में प्रयुक्त) खाने वाले चूने की एक परत ह्वाईट-वाश करा दें — बहुत से कीड़े-मकोड़े घट जायेंगे, कम से कम छ मास तक |

तीस वर्ष पहले मैंने खाने वाले चूने में DDT पाउडर मिलाकर ह्वाईट-वाश कराया था तो लगभग एक वर्ष तक घर में मच्छर का दर्शन नहीं हुआ था | किन्तु सम्भवतः कैंसर की सम्भावना के कारण उस पाउडर पर पाबन्दी लग गयी है, ऐसा लोगों ने बताया है | वैसे भी मैं कृत्रिम रसायनों का विरोधी हूँ | उनके दीर्घकालीन साइड-इफ़ेक्ट वैज्ञानिकों को भी ठीक से पता नहीं रहते | अतः प्राकृतिक साधनों का प्रयोग करें, प्रकृति माँ की सन्तान बनें | मच्छरों की हत्या से बचें, वे तो अचेत और विवश हैं, आप तो चेतन हैं ! मच्छर में ठीक वैसा ही जीव है जो आपमें है, केवल संस्कारों में तमगुण अधिक होने से कोई मच्छर बन गया और कम होने से मनुष्य ! अतः अहंकार न करें |

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अन्य कोई उपाय हों तो मुझे भी सूचित करें  : नीम के तेल से बेहतर है नीम के पत्तों को पीसकर एक चौथाई कर्पूर मिला दें और उसे तरल बनाने के लिए मिटटी का तेल मिलाकर All-Out की खाली रिफिल में भरकर प्रयोग करें | गेंदे के फूल को पीसकर उसे भी उक्त तरल में मिला सकते हैं |

बनारस में मेरे आवास के बगल में नीम का विशाल पेड़ है जिस कारण बगल में अस्सी नाले की गन्दगी के बावजूद बहुत कम मच्छर मेरे आवास की ओर आते हैं | मेरे आवास में मैं अकेला रहता हूँ और मेरा रक्त स्वादिष्ट भी नहीं है, एक बार जो मच्छर चख लेगा वह दुबारा पास नहीं फटकेगा |

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आज हम आपको बतायेंगे केले के छिलके से 10 हैरान कर देने वाले जोरदार फायदे

केला एक ऐसा फल है जो विटामिन, मिनरल्‍स और प्रोटीन का सबसे अच्‍छा स्‍त्रोत है। वजन बढ़ने से लेकर वजन घटाने तक के लिए केले के नुस्‍खों को कुछ आजमाया जाता है। फल तो अक्‍सर ही बड़े चाव से खाया जाता है लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि केले के छिलके में भी कमाल के गुण छिपे होते हैं। केले के छिलके के 10 घरेलू उपयोग विडियो में सुनिए….

मित्रों अगर आपको हमारे द्वारा दी हुई जानकारी पसन्द आई है तो इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा सोशियल नेटवर्क पर जरूर शेयर करिये।

धन्यवाद

लगातार 7 दिन लहसुन और शहद का सेवन करने के फायदे जान दंग रह जाएगे

हेल्थ डेस्क: लहसुन और शहद के बारें में तो आप अच्छी तरह जानते होगे! लहसुन का इस्तेमाल मसाले के रुप में किया जाता हैं। लेकिन आप जानते है कि इसका सेवन करने से आप कई बीमारियों से भी बच जाते हैं। यह शरीर को डिटॉक्‍स करके हर तरह के इंफेक्‍शन को भी खत्‍म करता है। साथ ही इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता हैं।

Video देखिए 

Video: इस जबरदस्त उपाए से बेड पे बीवी या गर्लफ्रेंड के होश ख़राब कर देगे आप, देखे विडियो!

शिलाजीत एक गुणकारी ओषधि है जो कई परेशानियों अथवा बीमारियों में हमारे लिए बहुत फायदेमंद है । यह हिमालय की पहाडियों में पाई जाती है । इसका स्वाद बहुत कडवा और कसैला होता है और देखने में काले रंग की होती है । तो आइये जानते है शिलाजीत के क्या क्या फायदे है और कैसे इसका उपयोग किया जा सकता है ।

यह नपुंसकता को ख़त्म करके आपकी सेक्स पॉवर को उच्तम सीमा पर पहुचा देती है , साथ ही स्वप्न दोष जैसी समस्या को समाप्त करके आपकी कामुक इच्छा को तेजी से बढ़ा देती है । इसका उपयोग अत्यंत लाभकारी तो है किन्तु बिना किसी डॉक्टर की सलाह के शिलाजीत का उपयोग करना नुक्सानदायक भी हो सकता है । इसका इस्तेमाल आयु और पाचनशक्ति के अनुसार ही करना चाहिए ।

दूध या शहद के साथ इसका सेवन सूरज उगने से पहले करना फायदेमंद रहता है । इसके खाने के 3 या 4 घंटे बाद ही कोई और चीज का सेवन करना चाहिए । तनाव ख़त्म करके मानसिक शक्ति मजबूत करने के लिए इसका सेवन दही के साथ करना चाहिए । यह शीघ्रपतन की समस्या में भी काफी लाभदायक है । इसका कुछ दिनों तक नियमित रूप से लेने से शीघ्रपतन की समस्या ख़त्म हो जाती है । परन्तु जब आप शिलाजीत का सेवन कर रहे हो तो इस दोरान आपको मासाहारी , सिगरेट , शराब तथा मसालेदार भोजन नही करने चाहिए । इसके सेवन से महिलाओ के पीरियड्स की अनिमियता ख़त्म हो जाती है और समय पर पीरियड आने लग जाते है ।

मर्दों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए ये 10 चीजें, कम होगा स्पर्म काउंट

फूड डेस्क। कई फूड ऐसे होते हैं जो लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में लेने पर मर्दों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते है। इनको ज्यादा लेने से फर्टिलिटी में कमी, हार्मोनल प्रॉब्लम, कमजोरी या फिर दूसरी बीमारियां हो सकती हैं। हम बता रहे हैं ऐसे ही 10 फूड्स के बारे में। मर्द इनको अवॉयड करेंगे तो कमजोरी और बीमारी से बचे रहेंगे।

(सोर्स : यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर, जर्नल ऑफ फूड एडिटिव एंड कंटामिनेंट्स)

आगे की स्लाइड्स में जानिए मर्दों के लिए नुकसानदायक कुछ फूड्स के बारे में…

जानिए, क्‍या ग्रीन टी के सेवन से कैंसर का खतरा कम होता है….

ग्रीन टी से कैंसर से भी बचा जा सकता है।

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सुबह की चाय उठने में और सैर पर जाने में सहायक होती है लेकिन शायद आपको नहीं पता कि यह कैंसर और दिल से जुड़ी बीमारियों से, एलज़ाइमर और पार्किसन जैसी बीमारियों से भी बचाती है लेकिन ये सभी फायदे आपको तब मिलते हैं अगर आप ग्रीन टी पी रहे हैं। ग्रीन टी में बहुत से औषधीय गुण होते हैं और यह बहुत से एशियन समुदायों में पीढ़ियों से जानी जाती है। हाल में ऐसा पता चला है कि ग्रीन टी का सेवन करने से कैंसर जैसी भयावह बीमारी से भी बचा जा सकता है। पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के खाद्य वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रीन टी में पाया जाने वाला एक तत्व ऐसी प्रक्रिया को शुरू करने में सक्षम है जो स्वस्थ कोशिकाओं को छोड़कर कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारती है। ग्रीन टी में पाये जाने वाले एपिगैलोकेटचिन-3-गैलेट (ईजीसीजी) में कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारने की क्षमता होती है।

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एंटी ऑक्‍सीडेट है ग्रीन टी
ग्रीन टी, काली चाय वाली पत्तियों से बनी होती है लेकिन इसमें काली चाय से कम प्रक्रि‍याएं होती हैं। चाय को बनाते समय पत्तियों को तोड़ा जाता है और फिर आक्सिडाइज कर सुखाया जाता है। आक्सिडेशन से अक्‍सर चाय के कुछ महत्वपूर्ण पोषक तत्व निकल जाते हैं। ग्रीन टी उन्हीं पत्तियों से बनी होती है और उन्हें तोड़कर गर्म किया जाता है या भाप दिया जाता है जिससे कि वह सूख जाये। ऐसे में आक्सिडेशन नहीं होता जिससे कि यह एण्टी आक्सिडेंट जैसा बर्ताव करती हैं और इसलिए ऐसी चाय को स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।

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कैंसर की संभावना कम करें
जापान, चाइना और कोरिया जैसी एशियन संस्कृति में चाय पीने की एक प्रथा भी है। पाश्चात्य औषधी ने ही सिर्फ सुगन्धित पेय की अच्छाइयां खोजी हैं। रोकैस्टर इनवायरमेंट हैल्थ साइंस सेन्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह शोध किया कि हरी चाय में मौजूद केमिकल कैंसर के कारक टोबैको के प्रभाव को कम करते हैं। यह शोध सिद्ध करता है कि वो लोग जो ग्रीन टी पीते हैं उनकी तुलना में वो जो ग्रीन टी नहीं पीते हैं उनमें कैंसर की सम्भावना बढ़ जाती है।

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अब जबलपुर, भोपाल समेत 300 रेलवे स्टेशनों पर नहीं बिकेंगी टॉइलेट क्लीनर

300 रेलवे स्टेशनों पर नहीं बिकेंगी कोल्ड ड्रिंक

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जबलपुर: जबलपुर, भोपाल समेत 300 स्टेशनों पर अब शरीर के नुकसानदायक जहरीला कोल्ड ड्रिंक नहीं बेची जा सकेगी। लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री द्वारा कोल्ड ड्रिंक में जहरीले तत्व मिले होने की जानकारी देने के बाद पश्चिम मध्य रेलवे (पमरे) जोन के कमर्शियल विभाग ने यह निर्णय लिया है।

इस आदेश के बाद अब स्टेशनों पर कोक, पेप्सी सहित किसी भी कंपनी के कोल्ड ड्रिंक की ब्रिकी नहीं हो सकेगी। जनवरी में पमरे ने रेलवे कैंटीनों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की एक सूची जारी कि जिसमें इन प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों का नाम नहीं है। रेलवे अधिकारी फरवरी से कोल्ड ड्रिंक के स्टॉक की जानकारी लेकर सभी स्टॉल को हटाने के लिए कहा है।

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स्टेशन से हटाना होगी कोल्डड्रिंक
कोल्ड ड्रिंक बंद करने का निर्णय लेने वाला पमरे देश का पहला रेलवे जोन बन गया है। इस आदेश के जारी होने के बाद पश्चिम मध्य रेलवे के तीन रेल मंडल जबलपुर, भोपाल, कोटा के अंतर्गत आने वाले तकरीबन 300 स्टेशनों पर कोल्ड ड्रिंक की ब्रिकी पर रोक लगा दी गई है। हालांकि अभी स्टॉल पर कोल्ड ड्रिंक का स्टॉक है, इसकी चेकिंग करके बंद करने के लिए कहा जा रहा है।

ट्रेन में बंद करने का निर्णय रेलवे बोर्ड लेगा
पमरे ने रेलवे बोर्ड को भी पत्र लिखकर दूसरे 16 रेल जोन में भी कोल्ड ड्रिंक की बिक्री पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। ट्रेन में चलने वाले पेंट्रीकार का ठेका आईआरसीटीसी देती है। ट्रेन में कोल्ड ड्रिंक को प्रतिबंध करने के लिए रेलवे बोर्ड और आईआरसीटीसी को निर्णय लेना है।

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मिल्क और हेल्थ ड्रिंक मिलते रहेंगे
स्टेशनों पर मिल्क और हेल्थ ड्रिंक (फ्रूट जूस) की बिक्री पर जोर दिया गया है। इसके बाद इस साल 5 हेल्थ ड्रिंक कंपनियों को प्रोडक्ट बेचने की अनुमति दी गई है। इनमें दो मिल्क प्रोडक्ट को भी शामिल किया गया है। इधर कोल्ड ड्रिंक कंपनी के अधिकारियों ने टेस्ट रिपोर्ट को गलत बताया है।

कोका कोला और पेप्सी में घातक तत्व
राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने 22 नवंबर को लिखित जानकारी दी कि कोका कोला और पेप्सी जैसी दो बड़ी कंपनियों के 5 कोल्ड ड्रिंक ब्रांड की जांच कराई गई थी, जिनमें लेड के अलावा केडमियन और क्रोमियम जैसे दो घातक तत्व भी पाए गए हैं।

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ये तत्व स्प्राइट, माउंटेन ड्यू, 7अप, पेप्सी, कोका कोला के लिए सैंपल्स में पाए गए हैं। इन सैंपलों को जांच के लिए कोलकाता स्थित नेशनल टेस्ट हाउस में भेजा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले साल अप्रैल में बोतलों में बेचे जाने वाली दवाइयों, कोल्ड ड्रिंक, शराब, जूस और अन्य पेय पदार्थों की जांच के निर्देश दिए थे।

पश्चिम मध्य रेलवे के सभी स्टेशनों पर कोका कोला और पेप्सी सहित सभी कोल्ड ड्रिंक की ब्रिकी पर रोक लगा दी है। केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने इन कोल्ड ड्रिंक में मानक से ज्यादा हानिककारक तत्व मिलने की बात स्वीकार की गई थी। – मनोज सेठ, सीसीएम, पमरे

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