गंगा-यमुना को जीवित मनुष्य के समान कानूनी अधिकार देने का फैसला

गंगा-यमुना को मनुष्य मानने का वैदिक आधार

यूनाइटेड हिन्दी स्पेशल रिपोर्ट : आज नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा नदी को देश की पहली जीवित इकाई के रूप में मान्यता दी है और गंगा-यमुना को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद भारत की दोनों महत्वपूर्ण नदियों गंगा और यमुना को अब एक मानव की तरह संविधान की ओर से मुहैया कराए गए सभी अधिकार मिल सकेंगे। कुछ दिनों पहले ही न्यूजीलैंड ने भी अपनी वांगानुई नदी को एक जीवित संस्था के रूप में मान्यता दी थी।
यह बहुत ही सराहनीय कदम है कि दोनों पवित्र नदियों को कोर्ट ने जीवित मानकर मनुष्यों के सभी संवैधानिक अधिकार दे दिए हैं पर न्यूजीलैंड से पहले हम यदि ऐसा करते तो बात ही अलग होती। क्योंकि हम तो गंगा यमुना को माता कहकर मनुष्य और उससे भी ऊपर देवता की कोटि में रखते आए ही हैं, खैर अदालत ने यह फैसला देकर वैदिक संस्कृति का मान बढ़ाया है।

आजकल लोग हम पर जड़ वस्तुओं की पूजा और उन्हें चेतन मानने का आरोप लगाते हैं, इसके निराकरण के लिए वैदिक मान्यता की ओर हम चलते हैं ताकि हमारी इन समृद्ध मान्यताओं का स्त्रोत जान सकें। ध्यानपूर्वक पढ़िए।

वैदिक मान्यता में एक ‘मन’, दूसरा ‘प्राण’, और ‘पंचमहाभूत’ रूप सात तंतुओं से वह बुनकर (परमात्मा) इस सृष्टि रूपी पट को बुन रहा है। वेद ने उस महान कवि की सृष्टिरूप इस कविता को सप्ततंतुमय यज्ञ कहा है।

पंचभूत को वैदिक परिभाषा में ‘वाक्’ कहते हैं क्योंकि इनमें सूक्ष्मतम भूत ‘आकाश’ है, उसका गुण ‘शब्द’ या ‘वाक्’ है। यह सूक्ष्म भूत ‘आकाश’ ही सब अन्य भूतों में अनुस्यूत होता है इसलिए वाक् को ही पंचमहाभूत का सरल प्रतीक मान लिया गया।

शतपथ ब्राह्मण कहता है आत्मा के तीन घटक हैं— ‘अयमात्मा वांमयो मनोमयः प्राणमयः।’ अर्थात आत्मा मन, प्राण और वाक् से बनी है। सप्त तंतु रूप इस मन, प्राण और वाक् को ही त्रिक् कहते हैं। मन सत्व, प्राण रज और वाक् तम रूप है। सृष्टिरचना की वैदिक कल्पना इसी त्रिक पर आश्रित है। मन, प्राण और वाक् इस त्रिक के सम्मिलित सम्बन्ध से ही एक शक्ति या अग्नि उत्पन्न होती है, वही वैश्वानर अग्नि है। त्रिक के मिलन से उत्पन्न वैश्वानरः अग्नि से ही जीवन अभिव्यक्त हो पाता है। यह जब तक है तभी तक जीवन है।

इस त्रिक में से प्राण को हम एनर्जी(Energy) कह सकते हैं, पर Energy की अवधारणा जड़ भूतों से जुड़ी है जबकि वैदिक प्राण की अवधारणा जीवित शरीर से जुड़ी है। वैदिक दृष्टि के अनुसार चेतना ही भूत के रूप में परिणत होती है अर्थात मौलिक तत्व चेतना है और भूत उसका विकार है। इसलिए वैदिक दृष्टि में परमार्थतः सब कुछ चेतन ही है, जड़ कुछ है ही नहीं। चेतना जहाँ ज्यादा आवृत्त हो गई, कि हमारी दृष्टि में नहीं आती वही जड़ है। समस्त सृष्टि मन, प्राण और वाक्(पंचमहाभूत) के त्रिक से ही बनी है, यही मात्राभेद से सभी पदार्थों के घटक हैं। पर जैसे जैसे हमें छिपी हुई चेतना को पहचानने के साधन उपलब्ध हो जाते हैं, वैसे वैसे हम जिसे कल तक जड़ समझते थे उसे चेतन के रूप में जानने लगते हैं।

देखिए सर जगदीशचन्द्र बसु से पहले वनस्पतियों को आधुनिक विज्ञान में जड़ समझा जाता था पर जैसे ही बसु जी को समुचित उपकरण उपलब्ध हो गए, उन्होंने सिद्ध कर दिया कि वनस्पति में प्राण हैं। कम लोग जानते हैं कि जगदीश बोस वैदिक विद्याओं का भी ज्ञान रखते थे। महर्षि मनु की स्पष्ट घोषणा है कि वनस्पतियों में भी चेतना है और वे सुख दुख अनुभव करते हैं — ‘अन्तःसंज्ञा भवन्त्येते सुख दुखःसमन्विता।’

इसी तरह विज्ञान अब तक नदियों, पर्वतों आदि को जड़ माने हुए है पर वेद नदियों से कहता है कि, — ‘इमं मे गंगे यमुने सरस्वति’ ‘हे गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों! मेरी प्रार्थना सुनो’ (ऋग्वेद 10.75.5)। यह इसीलिए क्योंकि सभी पदार्थों में आत्मा है और आत्मा है तो प्राण भी है, मन भी है और वाक् भी है, मन है तो सोचने की क्षमता भी है, इसलिए उन्हें सम्बोधित करना कि वे प्रार्थना सुनें बिल्कुल ठीक है। इसके अतिरिक्त जीवन की अभिव्यक्ति वैश्वानर अग्नि से ही होती है, वेद स्पष्ट रूप से जल में वैश्वानर अग्नि की बात कहता है, — ‘वैश्वानरो यास्वगनिः प्रविष्टः’ (ऋग्- 7.49.5) अर्थात जल में वैश्वानर अग्नि विद्यमान है।

वेद में जड़ पदार्थों से चेतन व्यवहार के अनेक प्रमाण मिलते हैं। पर जड़ और चेतन के बीच मौलिक एकता को हृदयंगम कर लेने के बाद कोई कठिनाई नहीं रहती। प्रकृति और मनुष्य के बीच सनातन धर्मियों ने कभी भेद नहीं माना, क्योंकि दोनों ही सजीव हैं, अतः प्रकृति और जीवों को अलग अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसलिए सनातन संस्कृति सदैव गौ, भूमि, नदी, तुलसी को माता मानती आई है, हम हिन्दू चन्द्रमा को मामा कहते आए हैं, पहाड़ों को हमने पूजा है, प्रकृति के हर अंग को हमने वस्तु नहीं माना पर अपना आत्मीय सम्बन्धी माना है। इससे यह सिद्ध हो गया कि हम जड़ प्रकृति को नहीं पूजते, हमारी मूर्तिपूजा की परम्परा भी चेतन तत्व की ही उपासना है। जैसे जैसे सनातन संस्कृति और वैदिक मणि मंजूषा की आभा हमारे सामने प्रकट होती है, हमारी बुद्धि चमत्कृत, और जीवन धन्य धन्य हो जाता है। इससे पहले श्राद्ध के पीछे का वैदिक विज्ञान पर एक पोस्ट किया था, वैदिक विज्ञान पर यह दूसरा पोस्ट है।

अगर आप भी खाते हैं अंकुरित अनाज तो हो जाएं सावधान, हो सकते हैं कई नुकसान!

अगर आप भी खाते हैं स्प्राउट्स तो हो जाएं सावधान, हो सकते हैं कई नुकसान!

Read Also : हर मां अपने बच्चे को जरूर खिलाये देशी गाय का घी, क्योंकि उसमें पाए जाते हैं ये गुण!

हेल्थ डेस्क ( यूनाइटेड हिन्दी ) : स्प्राउट्स यानि अंकुरित अनाज खाना सभी को बहुत ही अच्छा लगता है। अंकुरित अनाज खाने में तो स्वादिष्ट होता ही है साथ में यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। जो लोग जिम (व्यायाम) जाते हैं, वह ज्यादा मात्रा में प्रोटीन पाने के लिए स्प्राउट्स (अंकुरित अनाज) का सेवन करते हैं। लेकिन कई लोग इस बात से अनजान रहते हैं कि स्प्राउट्स शरीर को फायदा पहुंचाने के साथ-साथ कई तरह के नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

Read Also : अब जबलपुर, भोपाल समेत 300 रेलवे स्टेशनों पर नहीं बिकेंगी टॉइलेट क्लीनर

हाल ही में हुए एक शोध से यह बात पता चली है कि अंकुरित अनाज में नमीं होने की वजह से साल्मोनेला, ई कोली और लिस्टरिया जैसे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। ये बैक्टीरिया कई तरह की बिमारियों को जन्म देते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि स्प्राउट्स खाने से कौन-कौन से नुकसान हो सकते हैं।

Read Also : तो इतना खतरनाक है प्रेग्नेंट महिला का प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना, जानिए

– इन्फैक्शन: स्प्राउट्स में नमी होती है, इस वजह से इसमें साल्मोनेला नाम का बैक्टीरिया होता है, जो कई तरह की स्किन सम्बन्धी बीमारियों और इन्फैक्शन के लिए जिम्मेदार होता है।

Read Also : डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं? ये काला टमाटर कर देगा आपका इलाज

– फ़ूड पॉइजनिंग का खतरा: अंकुरित चीजों के सेवन से फूड पॉइजनिंग होने का खतरा रहता है, क्योंकि इसमें मौजूद लिस्टिरिया बैक्टीरिया पेट की समस्या को बढ़ा देता है।

– किडनी का रोग: आपको जानकर हैरानी होगी कि जो लोग ज्यादा मात्रा में अंकुरित चीजों का सेवन करते हैं, उन्हें किडनी की बिमारी होने का खतरा बना रहता है। अंकुरित चीजों में मौजूद लिस्टिरिया बैक्टीरिया किडनी पर बुरा प्रभाव डालती है। जिससे किडनी की बिमारी बढ़ जाती है।

Read Also : खाली पेट करें इस जूस का सेवन और पाएं डायबिटीज से हमेशा के लिए निजात

– टायफॉयड: अंकुरित चीजों में साल्मोनेला टाइफी नाम का बैक्टीरिया पाया जाता है। जो टायफॉयड की समस्या को बढ़ा देता है।

– यूरिनरी ट्रैक्स इन्फैक्शन: अंकुरित अनाज में मौजूद ई कोली शरीर में जाकर मूत्र नली की समस्या को बढ़ा देता है।

अब आप समझ गए होंगे कि जो चीजें फायदेमंद होती हैं, उसके कुछ नुकसान भी होते हैं। तो अगली बार से स्प्राउट्स खाने से पहले इन सब बातों पर गहराई से विचार जरूर कर लें।

Read Also : लगातार 7 दिन लहसुन और शहद का सेवन करने के फायदे जान दंग रह जाएगे

हर मां अपने बच्चे को जरूर खिलाये देशी गाय का घी, क्योंकि उसमें पाए जाते हैं ये गुण!

अपने बच्चे को जरूर खिलाये देशी घी

Read Also : अगर आप भी खाते हैं अंकुरित अनाज तो हो जाएं सावधान, हो सकते हैं कई नुकसान!

हेल्थ डेस्क ( यूनाइटेड हिन्दी ) : पुराने जमाने के लोग लम्बी और सेहतमंद जिंदगी जीते थे। इसका कारण यह था कि उन्हें खाध्य पदार्थ की लगभग सभी चीजें शुद्ध मिला करती थीं। लेकिन आजकल बढ़ते प्रदूषण की वजह से कोई भी चीज शुद्ध नहीं बची है। यही वजह है कि आज के समय में अधिकतर व्यक्ति ज्यादा बीमार पड़ता है। उसकी उम्र भी पहले की अपेक्षा बहुत छोटी हो गयी है। आज अगर कोई चीज थोड़ी शुद्ध बची है तो वह है भारतीय नश्ल की देशी गायों का दूध। जानवरों में सबसे ज्यादा फायदेमंद दूध देशी गाय का होता है। इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो इंसान के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

Read Also : डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं? ये काला टमाटर कर देगा आपका इलाज

दूध से भी ज्यादा फायदेमंद होता है देशी गाय का घी: देशी गाय का घी सेहत के साथ-साथ कई अन्य कामों में भी उपयोग किया जाता है। देशी गाय का घी गाय के दूध से भी कई गुणा अधिक ज्यादा फायदेमंद होता है। देशी गाय का घी बड़े लोगों के साथ ही बच्चों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

देशी गाय का घी 4-6 महीने के बच्चे के लिए किसी औषधि से कम नहीं है। इसे बच्चों को दाल में या सूप में मिलाकर देने से बच्चे का विकास तेजी से होता है।

Read Also : खाली पेट करें इस जूस का सेवन और पाएं डायबिटीज से हमेशा के लिए निजात

देशी गाय का घी बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उन्हें बिमारियों से दूर रखता है। आइये आज जानते हैं देशी घी बच्चों के लिए किस तरह से फायदेमंद है।

अगले पृष्ठ पर पढ़िये देशी घी के अन्य फायदे 

112 नेताओं ने दिया सामूहिक इस्‍तीफा, BSP में मची भसड़! खत्म होने के कगार पर पार्टी

यूपी विधानसभा मे बीएसपी की करारी हार के बाद अब बहुजन समाज पार्टी की राजनीतिक अस्‍तित्‍व पर खतरा मंडराने लगा है।

Read Also : मायावती कुंवारी हैं तो इतना लेती हैं शादीशुदा होतीं तो पता नहीं कितना लेतीं!

लखनऊ : यूपी विधानसभा मे बीएसपी की करारी हार के बाद अब मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राजनीतिक अस्‍तित्‍व पर खतरा मंडराने लगा है। एक तरफ जहां पार्टी सुप्रीमो मायावती हार के इस गहरे सदमे से बाहर निकलने का प्रयास कर रही हैं वहीं पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं में व्‍याप्‍त असंतोष उन्‍हें घात पर घात दिया जा रहा है।

Read Also : कैराना के मुस्लिम नेता मोहम्मद अली ने “यादवों के क़त्ल पर रखा 10 लाख का इनाम”

बसपा के 112 नेताओं ने एक साथ इस्‍तिफा दे दिया। इस्‍तीफा देने की वजह हार के असल कारण तलाशने की बजाय ठीकरा EVM में गड़बड़ी और कार्यकर्ताओं पर फोड़ना करार दिया गया है। इस्‍तीफा देने वाले 112 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि मायावती पार्टी के संस्थापक कांशीराम के सिद्धातों के बजाय किसी और तरफ ही चल रही हैं।

Read Also : बीजेपी की समस्या यह है कि उन्हें शायद KISS नहीं आता, केजरीवाल या ट्रम्प महोदय से सीखिये लेकिन

वहीं कार्यकर्ताओं ने बहन मायावती के उस ऐलान की भी आलोचना की है जिसमें कहा गया था कि हर माह 11 तारीख को काला दिवस मनाया जाएगा। पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि ”मायावती हार की असल वजह की तह तक जाने की बजाय मशीन में गड़बड़ी का आरोप लगा रही हैं।

Read Also : विरोधियों पर जमकर बरसे PM मोदी, बोले- भ्रष्टाचार का रास्ता बंद हो या भारत बंद?

इसपर बसपा के पूर्व लोकसभा प्रभारी सुशील सिंह चंदेल का कहना है कि जो धरना-प्रदर्शन जनसमस्याओं के लिए होना चाहिए था वो अब ईवीएम के खिलाफ हो रहा है। मायावती ने जनादेश का अपमान किया है।

Read Also : ‘दृष्टांत’ मैग्जीन में प्रकाशित हुई मुलायम खानदान की अकूत संपत्ति पर कवर स्टोरी

योगी आदित्यनाथ के CM बनने का जश्न मना रहे हिंदुओं पर मुस्लिम समाज का हमला

Image may contain: 1 person

Read Also : ताबिश सिद्दीकी का ब्लॉग: क्या हम उन्ही पतंजलि के वंशज हैं जिहोंने मन और शरीर पर विजय पायी थी?

रिपोर्टर : (आनंद ) :- पूरे जनपद में हिन्दू संगठनों के हजारों कार्यकर्ताओं ने जैसे ही खबर सुनी कि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा हो गई है। तुरंत सभी ने गली मौहल्लों में एकत्रित होना शुरू कर दिया और ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचने लगे। कार्यकर्ताओं ने पटाखे जलाकर जहां दीपावली जैसा माहौल बना दिया वहीं मिठाइयां खिलाकर एक-दूसरे को बधाइयां दी। हिन्दू जागरण मंच के जिला अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनने पर हिन्दुत्व की जीत बताया और कहा कि इससे हिन्दू समाज को मजबूती मिलेगी।

Read Also : Video : बकरियां फल का इंतजार नहीं करतीं, पेड़ पर चढ़ जाती हैं, इनकी पोटी से बनता है ये तेल

उत्तर पृदेश के यूवा उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश शंकर (बहजोई नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष) ने हिन्दू समाज की जीत बताते हुए कहा कि इससे हिन्दू समाज को नई दिशा और मजबूती मिलेगी। अब भारत हिन्दू राष्ट्र बनने की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। योगी आदित्यनाथ से हिन्दू समाज को बड़ी बड़ी आशाएं है जो अब पूरी होती दिख रही है।

तभी अचानक से संभल में योगी आदित्यनाथ जी के CM बनने की जीत का जश्न मना रहे हिंदुओं पर मुस्लिम समाज का आक्रामक हमला हो गया , कई हिंदू घायल, माहौल तनावपूर्ण।

Read Also : जानें सरकारी नौकरी एवं जीवन में सफलता पाने के लिए क्या करें क्या ना करें

पहली चुनौती से स्वागत किया गया है योगी जी का। बाकी माहौल बिगाड़ने का काम लश्कर ए मीडिया कर ही रही है ।कई सारी बातें नापी जा रही हैं यहाँ । निर्णय क्षमता, निर्ममता और ऑफ कोर्स इसके द्वारा हिंदुओं को दबाने की कोशिश है ही । अगर प्रतिक्रिया होती है तो जहां जखीरे संचयित हैं वहाँ उद्रेक हो सकते हैं और मीडियाई लश्कर सज्ज है अपनी तरफ से विषवर्षा करने को ।

Image may contain: 1 person, sitting and standing

सरकार हरकत में आती है तो कम्यूनल अतिरेक की उपाधि तुरंत और मुक्तहस्त बांटी जाएगी। ये नहीं विकास के हैशटैग ट्रेंड करवाए जाएँगे । एक सांप्रदायिक व्यक्ति का चुनाव कर के भारत को गर्त में धकेलने का दाग मोदी जी पर लगाया जाएगा । पक्ष के अंदर भी जो हितशत्रु हैं वे सक्रीय हो जाएँगे ।

Read Also : गणतंत्र दिवस पर यूएई के शहजादे बतौर मुख्य अतिथि आए, तो पाकिस्तानी मीडिया बौखलाई

बस इतना ही कहना है कि चीन को मानवाधिकार आदि के लिए कितनी भी गालियां दी हैं अन्य देश के लोगो ने, उन देशों के कंपनियों ने उसके साथ बिज़नस करना नहीं छोड़ा । उनके ग्राहक जानते हैं कि जो उत्पाद वे खरीद रहे हैं वे चीन में बने हैं फिर भी खरीदना बंद नहीं करते ।

Read Also : 1500 वर्ष पहले इस भारतीय ने खोजा था मंगल पर पानी, चोरी हुई ज्ञान की किताब

अगर योगी जी के स्वागत में गैर BJP राज्यों में दंगे हुए और लश्कर ए मीडिया उसके लिए योगी जी की नियुक्ति को जिम्मेदार बताए तो आश्चर्य न कीजिएगा । रोहिङ्ग्याओं पर म्यानमार में हुए कथित अत्याचारों का अर्थ यह तो नहीं होता कि मुंबई में दंगे हों, लेकिन हुए थे । कार्टून डेन्मार्क में छपे थे , दंगे दुनियाभर हुए । क्या संबंध था ? बस अपनी शक्ति की दहशत कायम करनी थी, यही समझना चाहिए ।

Read Also : सत्य- सनातन धर्म में देवता वास्तव में 33 करोड़ ही हैं, 33 प्रकार के नहीं!

यह इनका पैटर्न होता है । लेकिन हम न इनकी विचारधारा समझना चाहते हैं और न ही इनकी रणनीति ।

तलाक की कुप्रथा खिलाफ बीजेपी व RSS के साथ हुईं 10 लाख मुस्लिम महिलाएं…

ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर संघ से जुड़े एक संगठन की पिटीशन पर दस लाख से ज्यादा मुस्लिम महिलाएं साइन कर चुकी हैं।

Read Also : बीड़ी नहीं दी तो दे दिया तलाक, घर से भी निकाला, तो क्या अब इस औरत का होगा हलाला !!

रिपोर्ट : ( केशर देवी ) :- ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर संघ से जुड़े एक संगठन की पिटीशन पर दस लाख से ज्यादा मुस्लिम महिलाएं साइन कर चुकी हैं। यह काम आगे भी जारी है। मिली जानकारी के मुताबिक, यह पिटीशन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) द्वारा साइन करवाई जा रही है। इसपर देश भर के दस लाख से ज्यादा मुसलमान साइन कर चुके हैं। उनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं। MRM द्वारा जो पिटीशन साइन करवाई जा रही है उसमें कहा जा रहा है कि इसको धर्म से जोड़कर ना देखा जाए क्योंकि यह एक सामाजिक समस्या है।

Read Also : जनता उन्नति खोज रही है, मोदी के जयकारे में, सारी यूपी झूम रही है जय श्रीराम के नारे में

देश की लगभग 78 प्रतिशत मुसलमान महिलाएं पति की ओर से एकतरफा तलाक का शिकार होती हैं, इनमें 65.9 प्रतिशत मौखिक रूप से तलाक बोला जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में हाल में एक लेख में कहा कि 9० प्रतिशत मुसलमान महिलाएं चाहती हैं कि काजियों की पहचान के लिए कोई कानूनी प्रणाली हो। मुसलमान महिलाओं ने स्वयं तीन बार तलाक बोल कर विवाह तोडऩे को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

Read Also : मेरा शौहर मुझे अपने दोस्तों के साथ सोने को मजबूर करता था, इसलिए बदल दिया धर्म

MRM के नेशनल कोर्डिनेटर मोहम्मद अफजल ने इस बारे में बात करते हुए कहा, ‘बीजेपी की यूपी में हुई बड़ी जीत, देवबंद जैसे मुस्लिम बहुल इलाके में उनका जीत जाना यह दिखाता है कि मुस्लिम महिलओं की आवाज उनके साथ है। इससे साफ होता है कि मुस्लिम महिला बीजेपी के ट्रिपल तलाक पर लिए गए फैसले के साथ है।’

Read Also : मुस्लिम महिलाओं की मुस्लिम नेताओं के खिलाफ बगावत, पुतला फूंका : देखें विडियो !

मौलाना अबुल कलाम आजाद के परपोते फिरोज अहमद ने भी मोदी सरकार के इस कदम की प्रशंसा की थी। उन्होंने इसको मुसलमानों के प्रति नरेंद्र मोदी का सकारात्मक रवैया बताया था। बता दें कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक-बहुविवाह जैसे प्रथाओं के प्रति अपना विरोध जता चुकी है और इससे जड़ी दूसरी बड़ी बात यह है कि केंद्रीय कानून मंत्रालय अब अपना टीवी चैनल शुरू करने जा रहा है। इस चैनल पर तीन तलाक़, यूनिफार्म सिविल कोड जैसे टॉपिक पर परिचर्चाएं पेश की जाएँगी। लोगों में न्यायिक जागरूकता लाने के मकसद से इस चैनल को लाया जा रहा है। इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने छात्रों को 32 चैनल वाली ‘स्वयंप्रभा’ डीटीएच सेवा शुरू करने की बात कही थी।बीजेपी की इस पहल से मुस्लिम महिलाओं के अंदर एक नयी उम्मीद की किरण जागी है।

Read Also : जानिये आखिर क्यों मुस्लिम महिलाएं इस्लाम छोड़कर अपना रही है हिन्दू धर्म ?

बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने भारी जीत हासिल की है। उसे अपने दम पर 312 सीट मिली हैं। बीजेपी ने ऐसे इलाकों में भी जीत दर्ज की है जहां पर मुस्लिम जनसंख्या ज्यादा है। इसपर बीजेपी नेता लगातार इस बात को कहते रहे हैं कि सरकार ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर अपना जो पक्ष रखा उसकी वजह से अधिकतर मुस्लिम महिलाएं बीजेपी के साथ आ गईं।

Read Also : वाह रे इस्लामी क़ानून : अब्बा ने रेप करके बेटी को बनाया गर्भवती मौलवियों ने बना दिया मियाँ-बीबी

मैं हमेशा राष्‍ट्रगान पर खड़ा होऊंगा और सेना के पक्ष में बोलूंगा तो क्‍या मैं संघी हो गया?

अरनब ने कहा कि विरोध की प्रत्‍येक आवाज बुलंद और अखबार में आठ कॉलम की खबर होनी चाहिए।

Read Also : ABP के साथ गुंडा जोड़ते हैं लेकिन Left को चरित्रहीन या गद्दार वामी कहने में कोई दोष नहीं

नई दिल्ली : ‘अभिव्‍यक्ति की आजादी’ पर जारी बहस में मशहूर पत्रकार अरनब गोस्‍वामी भी कूद पड़े हैं। चेन्‍नई में FICCI FLO के एक कार्यक्रम में बोलते हुए अरनब गोस्‍वामी ने 21 फरवरी को गुस्‍से में दर्शकों से पूछा, ”मैं हमेशा राष्‍ट्रगान के लिए खड़ा होऊंगा और भारतीय सेना के पक्ष में बोलूंगा। क्‍या इससे मैं संघी बन जाऊंगा?” अपना नया टीवी चैनल ‘रिपब्लिक’ लॉन्‍च करने को तैयार अरनब की आवाज में गुस्‍सा था। वह देश के ‘स्‍यूडो लिबरल्‍स’ पर भड़के थे कि आखिर चुनिंदा मौकों पर असहिष्‍णुता पर बहस क्‍यों छेड़ी जाती है। उन्‍होंने कहा, ”सहनशील लोग आखिर असहनशील क्‍यों हैं और क्‍या हम इस गणतंत्र में इसे सहन कर सकते हैं। गोस्‍वामी ने निर्भया रेप कांड पर लेस्‍ली उदविन की एक डॉक्‍युमेंट्री के संदर्भ में बोलते हुए कहा, ”विडंबना तो ये थी कि लुटियंस, दिल्‍ली में स्‍व-घोषित सहिष्‍णु और लिबरल मीडिया राष्‍ट्रीय और ग्‍लोबल टेलीविजन का प्राइम टाइम एक रेपिस्‍ट को देना चाहते थे।” पिछले साल जेएनयू में हुए हंगामे को उठाते हुए गोस्‍वामी ने कहा कि जिन्‍होंने पिछले साल फरवरी में जेएनयू में नारे लगाए थे, वह तब कुछ नहीं बोले जब उरी हमले में 19 सैनिक मार दिए गए।

Read Also : टट्टी खाकर सूअर कितना हृष्ट-पुष्ट रहता है! अतः मनुष्यों को भी टट्टी खाना चाहिए!

अरनब ने कहा, ”तब कोई कैंडल मार्च नहीं हुआ, कोई याचिका नहीं डाली गई। जेएनयू शांत था। कन्‍हैया गायब हो गया, वह कहीं नहीं दिख रहा था। तब हक के लिए कोई आवाज नहीं उठी। पाखंड तो देखिए कि वही लॉबी जो अपनी सुविधानुसार खुद को राष्‍ट्रहित का ध्‍वजवाहक बताती है, ने तब कोई प्रदर्शन नहीं किया जब उरी (हमला) हुआ।” अरनब ने पूछा, ”क्‍या इस गणतंत्र में उन लोगों के प्रति सहनशीलता होनी चाहिए जो देश को नीचा दिखाते हैं?”

Read Also : ब्लॉग: कलिखो पुल की आत्महत्या और सेकुलर दोगलेपन की इन्तेहा

अरनब का गुस्‍सा यहीं नहीं थमा। उन्‍होंने आगे कहा, ”माओवादियों को हिंसा छोड़ने के लिए कहना असहिष्‍णुता क्‍यों है? या फिर अवार्ड वापस करने वालों की सेलेक्टिव हिपोक्रेसी पर सवाल खड़े करना असहिष्‍णु क्‍यों है? और राष्‍ट्रगान के लिए खड़ा होने से इनकार करने पर सवाल खड़े करना उदारवादी सोच क्‍यों नहीं है?” उन्‍होंने साफ किया, ”हिपोक्रेसी के खिलाफ हम सबकी संयुक्‍त इनटॉलरेंस ही आज शाम का प्‍वॉइंट है।”

Read Also : ‘Lipstick Under My Burkha’ फिल्म के खिलाफ इस्लामिक संगठन का फतवा

जल्‍लीकट्टू को ‘अमानवीय’ परंपरा बताने वालों पर भी अरनब खूब बरसे। उन्‍होंने कहा, ”आखिर क्‍यों, जो खुद को टॉलरेंट और लिबरल कहते हैं, और जिन्‍होंने इस पर (जल्‍लीकट्टू) पर बोला, उनमें से एक ने भी ये नहीं कहा कि ग्रीन पीस नियम तोड़ रही थी। ये वही लोग हैं जिन्‍होंने जल्‍लीकट्टू का विरोध किया था। मुझे इसमें कोई मतलब दिखाई देता है।”

Read Also : गिनीज बुक में दर्ज विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर, लेकिन ये भारत में नहीं है

अरनब का पूरा भाषण देखें: 

Read Also : अर्नब गोस्वामी का टाइम्स नाउ पर सर्जिकल स्ट्राइक कहीं कांग्रेस का हथकंडा तो नहीं?

Read Also : आप के 526 करो़ड़ के विज्ञापन बजट से ऐसा लगता है की पत्रकारिता को ही खरीदने की कोशिश की!

Read Also : विडियो- ज़ी न्यूज वाले सुधीर चौधरी से कहीं ज्यादा आजतक की श्वेता सिंह भी झूठ फेंकती हैं..

भारत बना रहा है भगवान विष्णु के ‘सुदर्शन चक्र’ जैसा वार करने वाला अचूक मिसाइल

सुदर्शन चक्र

Read Also : राजीव दीक्षित के समर्थक युवाओं का अंतरिक्ष से बिजली बनाने का फार्मूला, इसरो भेजा प्रस्ताव

नई दिल्ली : रक्षा, मिसाइल और अंतरिक्ष के क्षेत्र में रोज नए कीर्तिमान बनाने वाला हिंदुस्तान अब ऐसी मिसाइल बनाने जा रहा है जो दुश्मनों पर हमला करने के बाद वापस अपने खेमे में वापिस भी आ जाएगी। हाँ ये हैरान कर देने वाली बात जरूर है, लेकिन ऐसा भारत के लिए इस वक्त असंभव नहीं है।

Read Also : अंतरिक्ष की दुनिया में बढ़ी भारत की हिस्सेदारी, 104 सेटेलाइट भेज कमाये 100 करोड़

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के विज्ञान मेले में पहुंचे डीआरडीओ के विशिष्ट वैज्ञानिक और ब्रह्मोस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने बताया कि यह प्रोजेक्ट तैयार है, केंद्र सरकार की अनुमति मिलते ही हम काम शुरू कर देंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट पूरी तरह खुफिया रहेगा। अभी तक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता सिर्फ 290 किमी किमी प्रति घंटा है लेकिन इसे बढ़ाकर 450 किमी प्रति घंटे करने की योजना है। उन्होंने बताया कि इसका परीक्षण मार्च के दूसरे हफ्ते में किया जाएगा। पिछले साल गोवा में हुए सॉर्क सम्मेलन में इसकी मारक क्षमता को बढ़ाने की अनुमति मिली थी।

Read Also : भारतीय स्कूलों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाना चाहिए रामायण-महाभारत : शशि थरूर

मिश्रा जी ने बताया कि हम मार्च के अंतिम सप्ताह में 1000 हजार किमी प्रति घंटे की क्षमता वाले ब्रम्होस मिसाइल का परीक्षण करने वाले हैं। भारत वर्तमान में मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजिम (एमटीसीआर) का मुख्य सदस्य बन चुका है। इस समूह में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देश शामिल हैं।

Read Also : रिकॉर्ड 104 सैटेलाइट लॉन्च का ISRO ने जारी किया चुभने वाला सेल्फी वीडियो

मिश्रा ने कहा कि भारत और दुनिया के पास अभी तक ऐसी मिसाइलें हैं, जो लक्ष्य पर प्रहार कर वहीं समाप्त हो जाती हैं, लेकिन भारत ठीक वैसी मिसाइल बनाना चाहता है, जैसे सुदर्शन चक्र दुश्मन पर वार कर वापस लौट आता था। हमारी परंपरा वैदिक और आध्यात्मिक रही है, तो इस मिसाइल का विचार भी भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र से लिया गया है।

Read Also : देखिये ! कैसे अपने हथियार बेचने के लिये किसी भी हद तक जा सकता है अमेरिका !!

ताजा योजना के अनुसार मिसाइल की गति 5 मैक तक करने की है और इस पर अगले दो से तीन साल में काम पूरा होने की उम्मीद है। अभी ब्रह्मोस की मारक क्षमता 300 किमी है और स्पीड 2.08 मैक। एक मैक का अर्थ होता है ध्वनि के बराबर की गति। मिश्रा ने बताया कि मिसाइल 10 मीटर तक नीचे आ सकती है और इतनी देर में दुश्मन को अंतिम प्रार्थना करने का भी वक्त नहीं मिलता। मिश्रा ने इस बेहतरीन मिसाइल को तैयार करने का श्रेय डा. एपीजे अब्दुल कलाम को दिया।

Read Also : ब्लॉग: किताब की नहीं अपने दिल और अंतरात्मा की आवाज़ सुनो

Read Also : जवान वीरगति को प्राप्त होते हैं, उसका कारण युद्ध है या गले की फाँस बन गया पाकिस्तान

Read Also : घोटाला बोलता है: कागजों पर हाईवे दिखाकर लूटे 455 करोड़ रुपये

ABP के साथ गुंडा जोड़ते हैं लेकिन Left को चरित्रहीन या गद्दार वामी कहने में कोई दोष नहीं…

विरोधी और उनका विरोध कैसे हो !

Read Also : शर्मनाकः वामपंथी येचुरी का बयान – “हमें नहीं लगता कि उरी हमले में पाकिस्तान का हाथ है!”

ब्लॉग : ( अंसुमन गुप्ता ) :- जो वामपंथी हमेशा Sanghi के साथ Goons जोड़ते ही हैं (ट्रेनिंग ही ऐसे मिलती है, संघी कहा तो अपने आप Goon-गुंडा बोलने की) उनका उल्लेख हमेशा Liar Leftists (झूठे) या Leftie Lech क्यों न करें ?

Lech ये lecherous याने लम्पट का शॉर्ट फॉर्म है । हिन्दी में इनका उल्लेख करना है तो इनका उल्लेख किया जाये वहाँ चरित्रहीन या देशद्रोही अवश्य जोड़ा जाये । ये Liar तो होते ही हैं इसलिए संघी के साथ goon जोड़ते हैं लेकिन इन्हें Lech, Liar, Characterless Communist या चरित्रहीन वामी कहने में कोई असत्यभाषण का दोष भी नहीं लगेगा । कभी शुद्ध चरित्र के लोग भी हुआ करते इनमें, लेकिन अपवाद , और उन्हें कोई याद नहीं करता क्योंकि उनके जैसा रहते तो इज्जत पाते । मेरे एक घनिष्ठ मित्र के पिता थे, पहले जुझारू मजदूर नेता थे फिर बुढ़ापे के साथ हाशिये पर रखे गए । फिर भी, बेदाग व्यक्ति थे और इसलिए उनको इज्जत थी । उन्होने भी वक्त का चलन समझकर मिलती इज्जत को ही बेहतर समझा और शांति से जीवन यापन करते रहे अंत तक, सक्रीय रहने की वृथा कोशिश नहीं की।

Read Also : कन्हैया को लेकर आमने-सामने वामपंथी और दक्षिण पंथी विचारधार, टकराव के आसार

हो सकता है एकाध अपवाद मिले जो बिलकुल दुश्चरित्र न हो लेकिन झूठ तो होगा ही । Liar Leftie तो लागू ही होगा। हमेशा ऐसे विशेषण लगाते रहें और ज्यादा बदलाव न करें, predictable होना गलत नहीं होता । जब तक वे आप के विशेषण से विचलित होकर उसका खंडन नहीं करते, लगाते रहिए । यह उनके लिए नहीं, औरों के लिए होता है । जैसे रिलीजन ऑफ पीस कहा तो कोई भी इस्लाम का नाम लेता है हालांकि सच्चाई जानते सभी हैं । इसी तरह अगर Characterless Communist या चरित्रहीन वामपंथी कहते रहें तो वो विशेषण उनके साथ चिपक जाएगा । उनको यही गंवारा नहीं होता। वे आप को अच्छा लगे या आप का दिल न दुखे ऐसा कुछ भी नहीं करते, इसलिए offense best defense ये समझ लीजिये ।

Read Also : ‘Intolerance’ की मिसाल वामपंथियों से भी बड़ी कोई हो सकती है क्या ?

ये नाम देने आवश्यक हैं । वा क ई गिरोह हमेशा जिनसे लड़ने का मन बनाया है उन्हें ऐसे नाम देता है जिसके साथ शत्रुभावना जोड़ी जाये । वामी जैसे संघी गुंडे कहते हैं (श्री श्री 100008 दाऊद इब्राहिम का उल्लेख कैसे करते होंगे पता नहीं, मैंने आजतक किसी वामी को उनका नाम लेते ही सुना नहीं। पुराने खयालात की औरतें अपने पति का नाम नहीं लेती, बस यूंही याद आया) । बाकी अन्यों को गणशत्रु , प्रतिगामी, प्रतिक्रियावादी आदि शब्द होते ही हैं । उनकी अपनी इंटरनल गाली revisionist या संशोधनवादी होती है, जिसको पार्टी के मंच पर दी वो खुद को unperson समझ लें । प्रतिगामी, प्रतिक्रियावादी का हम अर्थ देखें तो यही समझ में आता है कि इनसे अलग विचार रखनेवाला । याने अलग विचार इन्हें बर्दाश्त नहीं, वैसा व्यक्ति कम से कम वैचारिक और मौका मिले तो actual हत्या के योग्य है इनकी नजर में ।

Read Also : जवान वीरगति को प्राप्त होते हैं, उसका कारण युद्ध है या गले की फाँस बन गया पाकिस्तान

देखिये कितने बेशर्म लोग हैं, यही “अभिव्यक्ति की आजादी” के झंडाबरदार कहलाते हैं । इसलिए इनपर “पाखंडी ” भी इतना ही फिट बैठता है। अगर कोई वामपंथी अभिव्यक्ति की आजादी पर बोलता मिले तो उसे प्रतिगामी, प्रतिक्रियावादी तथा revisionist या संशोधनवादी क्या होते हैं ये पूछे और बताएं तो सब के सामने बेइज्जत करें कि ये तुम्हारी सोच है तो किस मुंह से अभिव्यक्ति की आजादी की बात करते हो ?ये न बताएं तो आप बताएं सब को लेकिन बेइज्जत करने का अवसर न गवाएँ । और हाँ, आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लें या अपने साथ ट्रेंड लोग रखें । ये वैचारिक लड़ाई में तब तक ही मानते हैं जब तक इन्हें जीत की गैरंटी हो । जहां ये हारते हैं, पहले गाली गलौच पे उतरते हैं फिर हाथापाई पर । अच्छा कैमरा मोबाइल साथ रखे और किसी को विडियो उतारते रहने को कहें । ये हमेशा अपने साथ लड़कियां रखते हैं उनका यह भी उपयोग होता है कि हाथापाई के वक़्त वे सक्रीय होती हैं, काफी हिंसक भी होती हैं और ऊपर से खुद ही खुद के कपड़े फाड़कर आप पर इल्जाम लगाती है पुलिस में । इसलिए विडियो जरूरी है । सोशल मीडिया में उसका प्रसार भी करें ।

जरूर पढ़िये: मच्छरों से बचने के प्राकृतिक सप्तसूत्री उपाय

मच्छरों से मुक्ति

Read Also : चश्मा कितने भी नंबर का हो वो भी उतरेगा, दाद कैसा भी हो वो भी ठीक होगा, निशुल्क उपाय

विनय झा :- जहरीले रसायनों से बने मच्छर भगाने या मारने वाले उत्पाद बाज़ार में धड़ल्ले से मिल जायेंगे, किन्तु मच्छरों से अधिक मनुष्यों को उनसे क्षति पहूँचती है | मच्छरों को मारना जीवहत्या भी है, उन्हें भगाने का उपाय होना चाहिए | ऐसे बहुत से उपाय हैं, किन्तु जहरीले रसायन बेचने वाली कम्पनियां तो विज्ञापन पर पैसा खर्च कर सकती है, जबकि स्वस्थ और प्राकृतिक उपायों के प्रचार से मीडिया को लाभ नहीं है !

मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर सप्तसूत्री उपाय प्रस्तुत कर रहा हूँ :–

1 → सबसे कारगर है एक पौधा जिसका नाम किसी को पता नहीं है | दक्षिण भारत (उडुपी, कर्नाटक) से मार्च 2011 में कार द्वारा लौटते समय मध्यप्रदेश के जंगल में एक साधु की कुटी में यह पौधा मैंने देखा था जिसकी गन्ध मनुष्य को नहीं लगती, किन्तु तुलसी पौधे के आकार के इस पौधे के कारण कई एकड़ तक जंगल में एक भी मच्छर (और अन्य कीटाणु) नहीं मिला ! वह स्थान है जबलपुर नगर के दक्षिणी छोर से बीस किलोमीटर दक्षिण | जबलपुर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के ठीक किनारे लगभग बीस-पच्चीस मीटर ऊँची हनुमान जी की लाल मूर्ति है | वह मन्दिर और संलग्न आश्रम हिनौता ग्राम के अन्तर्गत पड़ता है, यद्यपि गाँव हटकर है, आश्रम का क्षेत्र जंगली है | उसी आश्रम में यह पौधा है | वहाँ के साधु महाराज ने मुझे बताया कि वे एक स्थान पर अधिक दिनों तक नहीं टिकते, अतः हो सकता है अब वे वहाँ नहीं मिले और उस पौधे की जानकारी वहाँ किसी अन्य व्यक्ति को न हो ! पिछले पाँच वर्षों के दौरान मैंने बहुत लोगों को यह जानकारी दी जिनमे कुछ तो उसी क्षेत्र के हैं, किन्तु किसी ने उस आश्रम तक जाने का कष्ट नहीं किया | उस पौधे का प्रचार हो जाय तो पूरी मानवजाति का भला होगा | साधु महाराज ने कहा कि वर्षा के मौसम में उस पौधे के बीज निकलते हैं, किन्तु वर्षा के दौरान वहाँ जाने का मुझे अवसर नहीं मिला |

Read Also : यहाँ Click करके जानिये Jaundice यानि पीलिया के कारण लक्षण और उपचार

2 → इन्टरनेट पर सर्च करने से बहुत से पौधों के विवरण मिल जायेंगे जिनके प्रभाव से मच्छर भागते हैं | वे पौधे दुर्लभ हैं, कुछ पौधे नर्सरी में मिल जायेंगे | उनमें से एक पौधा सर्वसुलभ है जिसका प्रभाव मच्छर ही नहीं, लगभग सभी कीटों पर पड़ता है, यद्यपि प्रभाव अधिक नहीं है — गेन्दा | प्लास्टिक की बाल्टी में गेन्दा का पौधा लगाएं, दिन भर धूप में रखे और सायं कमरे में ले आयें | सारे मच्छर तो नहीं भागेंगे, किन्तु अधिकाँश भाग जायेंगे और जो बचेंगे उनकी शक्ति अपनी जान बचाने में लग जायेगी, बहुत कम मच्छर ही आपको काट पायेंगे | कीड़े-मकोड़े भी भाग जायेंगे | बनारस में मैं इस विधि का प्रयोग तब करता था जब मैं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भीतर रहता था | बाद में जहाँ मेरा आवास था वहाँ ऐसा सम्भव नहीं हो सका, क्योंकि सबसे ऊपर की मंजिल पर केवल मेरा ही फ्लैट था जहाँ मेरी अनुपस्थिति में पानी देने वाला कोई नहीं था जिस कारण सारे पौधे सूख गए | किन्तु बगल में अस्सी नाले की गन्दगी के बावजूद वहाँ मच्छर बहुत कम थे |

Read Also : अब जबलपुर, भोपाल समेत 300 रेलवे स्टेशनों पर नहीं बिकेंगी टॉइलेट क्लीनर

3 → भोजन में तेल, मसाले, मिर्च, आदि मैंने बीस वर्ष पहले त्याग दिया था जिस कारण मच्छरों को मेरा रक्त स्वादिष्ट नहीं लगता था ! इन्द्रियाँ सभी जीवों के पास होती हैं, भले ही वैज्ञानिकों को दिखे या न दिखे | मच्छर आसुरी योनि का जीव है जिसकी उत्पत्ति एक राक्षसी से हुई है (योग वासिष्ठ)| असुरों में ऐन्द्रिकता अत्यधिक होती है, अतः स्वाद के प्रति मच्छर आकर्षित होता है | सात्विक भोजन करने वालों पर मच्छर का आक्रमण तभी होता है जब स्वादिष्ट रक्त वाले मनुष्य आसपास न हो | इस बात को हँसी में न लें | मेरे कमरे में बैठे दूसरे लोगों को मच्छर काटते रहते थे जिनके कारण मुझे जहरीले रसायन वाले उत्पाद खरीदने पड़ते थे |

Read Also : तो इतना खतरनाक है प्रेग्नेंट महिला का प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना, जानिए

4 → सरसों का तेल चमड़ी पर रोजाना मालिश करें | भोजन में तेल बिलकुल न लें, सम्भव हो तो भोजन में देसी गाय का शुद्ध घी प्रयुक्त करें | किन्तु मालिश में सरसों का तेल न केवल मच्छरों को बल्कि बैक्टीरिया से लेकर अन्य सभी कीटों को दूर भगाएगा | चमड़ी पर जबतक तेल का प्रभाव रहेगा तबतक मच्छर चाहकर भी नहीं काटेंगे | जहाँ अधिक समय तक बैठना हो और मच्छर परेशान करें वहाँ खुले अंगों, जैसे कि हाथ-पाँव, पर सरसों का तेल मल लिया करें | बाजारू रसायनों का दुष्प्रभाव सरसों के तेल में नहीं होता | सरसों का तेल प्राकृतिक एन्टी-बायोटिक है | आपने देखा होगा कि आम के अचार को गृहिणियां सरसों के तेल में डुबाकर सालों-साल सुरक्षित रखती हैं | किन्तु शरीर के भीतर देशी गाय का घी सर्वोत्तम एन्टी-बायोटिक है जो इम्यून प्रणाली को शक्ति देकर सभी रोगों से लड़ने की क्षमता देता है |

Read Also : डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं? ये काला टमाटर कर देगा आपका इलाज

5 → शहर में कूड़े के भण्डार से, रुके हुए जल के सड़ने से, आदि कारणों से शहर में मच्छर का प्रकोप बढ़ता है यह तो सर्वविदित है | नागरिक समितियां बनाकर नगरपालिका पर भी दवाब बनाएं और स्वयंसेवक बनकर स्वयं भी शहर की सफाई करें | घर और आसपास गन्दगी न रहने दें, और यदि गन्दगी है तो (फिनाइल या) रामदेव के गोनाइल का प्रयोग करें |

6 → सायंकाल मच्छरों के गृहप्रवेश का मुहूर्त होता है | गाँवों में लोग उस समय गोबर के उपले (गोइठे) का धूआँ करते हैं ताकि मनुष्यों और मवेशियों के वासस्थल से मच्छर दूर भाग जाएँ | शहर में भी सायंकाल कुछ देर के लिए छोटे से मिटटी के गमले में गोबर के उपले का धूआँ करके बाद में दरवाजे और खिड़कियाँ बन्द कर दें या जालीदार खिड़कियों का प्रयोग करें | सोने के कमरे में बाजारू रसायनों के स्थान पर मसहरी का प्रयोग करें | वैसे भी बाजारू रसायनों के प्रति मच्छरों में प्रतिरोधक शक्ति बहुत बढ़ गयी है जिस कारण अब बहुत अधिक बाजारू रसायनों का प्रयोग करना पड़ता है जिनका दुष्प्रभाव मनुष्यों पर भी पड़ता है, खासकर बच्चों पर |

Read Also : खाली पेट करें इस जूस का सेवन और पाएं डायबिटीज से हमेशा के लिए निजात

7 → आजकल लोग सफ़ेद सीमेंट से ह्वाईट-वाश कराने लगे हैं | यदि ऐसा ही करना हो तब भी उसपर (पान आदि में प्रयुक्त) खाने वाले चूने की एक परत ह्वाईट-वाश करा दें — बहुत से कीड़े-मकोड़े घट जायेंगे, कम से कम छ मास तक |

तीस वर्ष पहले मैंने खाने वाले चूने में DDT पाउडर मिलाकर ह्वाईट-वाश कराया था तो लगभग एक वर्ष तक घर में मच्छर का दर्शन नहीं हुआ था | किन्तु सम्भवतः कैंसर की सम्भावना के कारण उस पाउडर पर पाबन्दी लग गयी है, ऐसा लोगों ने बताया है | वैसे भी मैं कृत्रिम रसायनों का विरोधी हूँ | उनके दीर्घकालीन साइड-इफ़ेक्ट वैज्ञानिकों को भी ठीक से पता नहीं रहते | अतः प्राकृतिक साधनों का प्रयोग करें, प्रकृति माँ की सन्तान बनें | मच्छरों की हत्या से बचें, वे तो अचेत और विवश हैं, आप तो चेतन हैं ! मच्छर में ठीक वैसा ही जीव है जो आपमें है, केवल संस्कारों में तमगुण अधिक होने से कोई मच्छर बन गया और कम होने से मनुष्य ! अतः अहंकार न करें |

Read Also : लगातार 7 दिन लहसुन और शहद का सेवन करने के फायदे जान दंग रह जाएगे

अन्य कोई उपाय हों तो मुझे भी सूचित करें  : नीम के तेल से बेहतर है नीम के पत्तों को पीसकर एक चौथाई कर्पूर मिला दें और उसे तरल बनाने के लिए मिटटी का तेल मिलाकर All-Out की खाली रिफिल में भरकर प्रयोग करें | गेंदे के फूल को पीसकर उसे भी उक्त तरल में मिला सकते हैं |

बनारस में मेरे आवास के बगल में नीम का विशाल पेड़ है जिस कारण बगल में अस्सी नाले की गन्दगी के बावजूद बहुत कम मच्छर मेरे आवास की ओर आते हैं | मेरे आवास में मैं अकेला रहता हूँ और मेरा रक्त स्वादिष्ट भी नहीं है, एक बार जो मच्छर चख लेगा वह दुबारा पास नहीं फटकेगा |

Read Also : हड्डियों को मजबूत करता है ये खास फल, इसका नाम भी है काफी दिलचस्प