राजस्थान में पोपाबाई का राज, सरकारी जश्न पर विधायक बेनीवाल ने उठाये सवाल

जयपुर | खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल ने राज्य सरकार के तीन साल के जश्न पर सवाल खडे किए हैं। उन्होंने कहा है कि एक ओर तो प्रदेश में नोटबंदी के कारण मंदी का आलम छाया हुआ है और मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पा रही है वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार जश्न के नाम पर करोडों रूपए बर्बाद कर रही है। उन्होंने भाजपाराज की तुलना पोपाबाई से की प्रदेश की दुर्दशा का जिम्मेदार राज्य सरकार को ठहराया।

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साभार : rajasthantimes

सीएम वसुंधरा राजे को आड़े हाथों लेते हुए बोले कि आज प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की चीज तक नहीं है। लोग मेरे से पूछा करते हैं कि ये पोपा बाई का राज क्या होता है, तो आज देख लीजिए, यह राज ही पोपा बाई का राज था। दोनाें के राज में काेई फर्क नहीं है। उन्हाेंने युवा नागरिकाें को मिशन 2018 के लिए तैयार होने की बात करते हुए कहा कि छत्तीस कौम की जनता तैयार हो जाए। उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के दबाव से पुलिस डिमोलाइज हो रही है, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ रहा है।

समारोह में पूर्व विधायक मदन प्रजापत ने कहा कि सरकार जनता, किसान, छात्र सहित हर तबके को लूट रही है। प्रजापत समेत वक्ताओं ने उद्घाटन कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कॉलेज प्रशासन पर दबाव बनाने को लेकर राजस्व मंत्री अमराराम चौधरी को भी निशाना बनाया। इनसे पहले महंत निर्मलदास महाराज, एसएफआई प्रदेश महासचिव मंगेज चौधरी, सभापति रतन खत्री, प्रधान ओमाराम भील, समाजसेवी रहीशदान चारण ने विचार व्यक्त किए।

विकास के पापा जी… तो फिर आपको कोई हक़ नहीं है कि 80 करोड़ हिन्दुओं को क्या करना चाहिये ?

ब्लॉग : गुजरात दंगों के बाद मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की किस्मत का फैसला करने के लिये अटल जी गये थे। अटल जी ने प्रेस कांफ्रेंस की, मोदी पास बैठे हुए थे। अटल जी न जाने किस सेकुलर भाव में बह गये और बोलना शुरू किया, “राजा के लिये प्रजा-प्रजा में भेद नहीं होना चाहिये, मैं नरेंद्र भाई को राजधर्म निभाने की सलाह दूँगा”। अटल जी अपने इन शब्दों को विस्तार देने लग गये तो चतुर मोदी ने फ़ौरन उनके कान में कहा, ‘वही तो कर रहा हूँ’ और अटल जी रुक गये। फिर 2005 में आडवाणी जी पाकिस्तान गये और वहां जिन्ना के मजार पर जा कर सेकुलर हो गये, उसे धर्मनिरपेक्ष होने का सर्टिफिकेट दे दिया। 

अटल जी के बयान के बाद गुजरात दंगों की आड़ लेकर जब-जब मोदी और भाजपा को घेरना होता तो सारे सेकुलर और हिन्दू विरोधी खेमा अटल जी के राजधर्म वाले बयान की सी0डी0 बजाने लगते थे और भाजपा समर्थकों को कोई जबाब देना मुश्किल हो जाता था। सेकुलर और हिन्दू विरोधी खेमा कहता, आप कैसे गुजरात दंगों के लिये उन्हें दोषी नहीं मानोगे जबकि मोदी को तो आपके अपने अटल जी ने राजधर्म की सीख दी थी ? राष्ट्रवादी खेमे को यही सब फिर तब झेलना पड़ा जब आडवानी जी जिन्ना की आरती उतार कर आये। मजे की बात ये भी है कि मई, 2014 में मोदी विजय के बाद उर्दू अखबारों के लिये मोदी को घेरने का कोई रास्ता नहीं बचा था तब अटल जी का राजधर्म वाला बयान ही था जिसने उन्हें मोदी को जलील करने की संजीवनी दी थी। अजीज बर्नी ने अपने अखबार अजीजुल-हिन्द का पहला पेज पूरा काला रखा था सिवाय एक कोने के जहाँ उसने अटल की उस राजधर्म वाले उक्ति को जगह दी थी।

ब्लॉग : और ये भ्रम सिर्फ और सिर्फ विनाश की ओर ले जायेगा…

ब्लॉग: (अभिजीत सिंह) – स्वामी विवेकानंद जी के यात्रा विवरणों पर रामकृष्ण मिशन, बेलूर मठ, कोलकाता से प्रकाशित एक किताब पढ़ रहा था। किताब स्वामी जी के कश्मीर भ्रमण प्रसंग पर लिखता है…..

नव-रामकृष्ण मिशन के साहित्यों से समझने की भूल मत करिये।

“एक बार स्वामी विवेकानंद कश्मीर की अपनी यात्रा के दौरान माँ खीर भवानी के दर्शनार्थ यहाँ पहुँचे और माँ की विधिवत पूजा अर्चना की तभी पूजा अर्चना करते समय मंदिर की क्षतिग्रस्त अवस्था देख कर उन्होंनें कहा कि कई मुस्लिम आक्रमणकारियों ने यहाँ कितनी क्षति पहुचाई है अगर मैं उस काल में जीवित होता तो अन्य हिन्दुओं की तरह चुप नहीं रहता और माँ की रक्षा करता। तभी उन्होंने सहसा देवी माँ की आवाज सुनी और माँ ने कहा, पुत्र यह मेरी ही इच्छा थी कि मुस्लिम आक्रमणकारी मेरे मंदिर को नुकसान पहुचाये और यह मेरी ही इच्छा है कि मै इस खंडित मंदिर में ही निवास करूँ अन्यथा क्या मैं स्वयं ही उनका विनाश तत्काल न कर देती और स्वयं के लिए स्वर्ण भवन का निर्माण करवा लेती। तुम ही मुझे बताओ मै तुम्हारी रक्षक हूँ या तुम मेरे ? यह सुन स्वामी जी ने माँ को प्रणाम किया और इसे माँ की इच्छा समझ कर उनकी विधिवत पूजा अर्चना कर वहां से बाहर निकल गये “।

इस प्रसंग को सुनाने के बाद वो किताब आगे लिखता हैं, क्या अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मसले पर भी हमारी दृष्टि यही नहीं होनी चाहिये ? अब थोड़ी भी अक्ल रखने वाले के लिये ये समझना मुश्किल नहीं है नव-रामकृष्ण मिशन वालों की रामलला के जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण के विषय पर क्या सोच है?

क्या आपको लगता है कि स्वामी विवेकानंद के खीर भवानी यात्रा में ऐसा कोई प्रसंग वास्तव में घटित हुआ होगा ?

विवेकानंद को पढ़ने और जानने के बाद आपको कहीं से भी ये लगता है कि उन्होंने कभी ये कहा होगा कि प्राचीन भारत में पांच ब्राह्मण मिलकर एक गाय को चट कर जाते थे ?

घरवापसी के समर्थक स्वामी विवेकानंद की जीसस के बारे में क्या वही मान्यता थी जो आज 25 दिसंबर पर राम और कृष्ण की तरह ईसा का जन्मदिन मनाने वाले नव-रामकृष्ण मिशन का है ?

क्या विवेकानंद ने कभी मिशन स्थापित करते समय ये कहा था कि खुद को हिन्दू से अलग इतर संप्रदाय कहलवाने के लिये तुम अदालत में चले जाना ?

क्या अयोध्या, मथुरा और काशी में भग्न मंदिरों की पीड़ा को स्वामी जी ईश्वरेच्छा समझ कर पी जाते रहे होंगे ?

क्या आपको लगता है कि हर वक़्त माँ काली के स्नेहांचल में रहने वाले रामकृष्ण देव को किसी मलेच्छ रीति से ईश्वर प्राप्ति हेतू साधना की आवश्यकता हुई होगी ?

मतलब साफ़ है कि “सर्वधर्म समान” की मूढ़ता में जकड़े नव-रामकृष्ण मिशन ने अपने शब्द स्वामी जी के मुंह में जबर्दस्ती ठूंसे हैं। स्वामी विवेकानंद के संदेशों को नव-रामकृष्ण मिशन के साहित्यों से समझने की भूल मत करिये। भारत और हिन्दू धर्म की सेवा में रामकृष्ण मिशन का योगदान बहुत अधिक है पर इस नव-रामकृष्ण मिशन से सतर्क रहने की आवश्यकता है।

स्वामी विवेकानंद के संदेशों को समझना है तो “विवेकानंद केन्द्रम” से प्रकाशित साहित्यों को पढ़िए जो स्वामी जी के संदेशों को बिना मिलावट प्रस्तुत करती है। ढाका में कई सारे मठ बंद होने और वहां से मारपीट कर खदेड़ दिये जाने के बाबजूद जिनकी बुद्धि अभी भी “सर्वधर्म समान” की मूढ़ता से उबर नहीं पाई है वहां से कुछ “ज्ञान” लेंगे तो सिवाय भ्रम के आपको कुछ नहीं मिलेगा और ये भ्रम सिर्फ और सिर्फ विनाश की ओर ले जायेगा।

~ अभिजीत सिंह

मीडिया बता रही है कि, म्यांमार वाले मुस्लिमो पर अत्याचार कर रहे है, पर क्यों ? ये नहीं बता रही ?

पर क्यों ? ये नहीं बता रही ?

ब्लॉग : (डॉक्टर संतोष राय) – आपने ये शब्द तो सुन ही लिया होगा, “रोहिंग्या मुसलमान” हां, आजकल भारत के सेक्युलर तत्व, मीडिया वाले और बुद्धिजीवी बहुत इनका नाम लेकर बता रहे है की, इनपर भारी अत्याचार हो रहा है, म्यांमार वाले इनको जीने नहीं दे रहे, बिचारे दर-दर ठोकरें खा रहे है। कुल मिलाकर 30 लाख आतंकवादी मानसिकता के रोहिंग्या मुसलमानो को ये सेक्युलर और वामपंथी तत्व भारत में शरण दिलवाना चाहते है।

मीडिया वाले ये तो बता रहे है की, रोहिंग्या मुसलमानो पर विराथु नाम के बौद्ध भिक्षु ने हमले शुरू करवाये, पर ऐसा हुआ क्यों हुआ ? क्या कारण था की हिंसा को मन में भी न लाने वाला बौद्ध भिक्षु आखिर रोहिंग्या मुसलमानो को भगा देने पर आमादा क्यों हुआ ?

मीडिया वाले ये नहीं बता रहे की, म्यांमार में तो ईसाई और हिन्दू भी रहते है, पर म्यांमार वाले केवल मुसलमानो को ही क्यों भगा रहे है ? ऐसी कोई बात मीडिया वाले आपको बिलकुल नहीं बता रहे और न ही कभी बताएँगे।

1930 तक रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार में थे ही नहीं। म्यांमार भी भारत में ही था। म्यांमार में केवल हिन्दू था फिर बौद्ध हो गया। 1947 में पूर्वी पाकिस्तान बना, फिर 1971 आते-आते पश्चिमी पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिसान पर जुल्म शुरू किये, जिस से बहुत से मुस्लिम भारत तो बहुत से म्यांमार भाग गए ।

1950 तक रोहिंग्या मुसलमानो की आबादी म्यांमार में 3 लाख थी, जो 2001 आते-आते 30 लाख हो गयी (औरत को ओलाद की फेक्ट्री बनाएँगे तो होनी भी थी)। यानि केवल 50 सालों में 10 गुना हो गयी इनकी संख्या।

आगे पढ़िये : अब हम आपको बताते है असल बात क्या है

खुलासा : ममता बनर्जी पाँच बार की नमाजी है, गौमांस का भी करती है सेवन !

यूनाइटेड हिन्दी : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भले ही एक गरीब परिवार से थी पर आज ममाता बनर्जी के भतीजे के पर अरबों की संपत्ति है, और पश्चिम बंगाल में तो चिटफण्ड घोटाला ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस चला रही थी। ममता बनर्जी अपने राजनितिक जीवन की शुरुवात में कांग्रेस की सदस्य थी। पश्चिम बंगाल में मोटा मोटी दो ही पार्टियां हुआ करती थी, एक वामपंथी और एक कांग्रेस, और ममता बनर्जी ने वामपंथियों को इसलिए नहीं चुना क्योंकि वो किसी भी धर्म को बढ़ावा नहीं देते (हालाँकि ये केवल एक झूठ है, भारत के वामपंथी कट्टरपंथी इस्लामिक है)।
ममता बनर्जी ने कांग्रेस की सदस्यता की, और कोलकाता यूनिवर्सिटी में पढाई के दौरान ममता बनर्जी ने अपना सब्जेक्ट चुना “इस्लामिक हिस्ट्री” इतने सारे सब्जेक्ट में ममता बनर्जी को इस्लामिक हिस्ट्री ही पढ़ना था। थोड़े दिनों बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़ अपनी अलग पार्टी बना ली जिसे आज आप तृणमूल कांग्रेस कहते है।

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मानवता हुई शर्मसार : "मुस्लिम मीडिया चैनल" ने हिंदू कर्मचारी के साथ उल्टा लटका कर की बर्बरता…

नई दिल्ली (यूनाइटेड हिन्दी) : ऊपर जो तस्वीरें आप देख रहे हैं वो बंगाल यातना झेल रहे किसी हिंदू की नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली के रहने वाले हिंदू लड़के की हैं जिसके साथ किसी मदरसा छाप मौलवी ने नहीं बल्कि पढ़े लिखे मुस्लिम परिवार और एक न्यूज़ चैनल “Channel One News” के मालिक व उसके बेटों ने मानवता की सारी हदें पार कर दी।

क़रीब 2 महीनों से सैलरी रोकने के बाद अचानक आयुष तिवारी को अपने सभी दस्तावेज़ लेकर “Channel One News” के नए कर्मचारी को सोपने को कहा गया। विरोध के रूप में आयुष ने दस्तवेस देने से मना कर दिया और कहा की पहले मेरी सैलरी का हिसाब पूरा करो और 6 महीनों से रुके ऑफ़र लेटर दो उसके बाद मैं आपके दस्तावेज़ आपके सुपुर्द कर दूँगा। इस मुद्दे को लेकर कई घंटों तक बहस चली जिसमें आयुष को झूठे आरोपों में फ़साने की भी धमकी दी गई। इसमें कम्पनी मालिक के बेटे के ख़ास और कम्पनी के ऐड्मिन में शामिल अभिषेक नामक व्यक्ति ने एक फ़ोन के बाद इस सब की शुरुआत कल 9/01 को तक़रीबन दिन के 3 बजे की। आयुष ने बाहर जाना चाहा तो गार्ड ने उसे रोक दिया और कहा आपको बाहर नहीं जाने दिया जाएगा मालिक ने माना किया है।

जहां एक और हिंदू/मुस्लिम भाई-भाई की सोच रखने वाले आयुष ने कहा कम्पनी के मालिक के बेटे काशिफ़ अहमद को बुलाओ वो अछे व्यक्ति हैं और मैं उनसे बात करना चाहता हूँ। काशिफ़ अपने पिता ज़हीर अहमद के साथ और बड़े भाई आरिफ़ के साथ वहाँ आए। आयुष ने बड़ी उमीद से काशिफ़ से मामला पूछा तभी उसके पिता ज़हीर ने आयुष से नाम पूछा! नाम बताने पर उसे आयुष की जगह आयुब सुनाई दिया जिसपर वो बोला की सब ख़त्म करो तभी काशिफ़ ने बात काटते हुए कहा की ये हरामजादा है काफिर हिंदू है और आयुष नाम है इसका।!

इसपर ज़हीर ने आयुष के थप्पड़ माँरते हुए कहा की झूठ बोलता है हरामज़ादे। लेके चलो ऊपर इसे उल्टा लटकाओ। इसके बाद वे आयुष को तीसरे माले पर लेकर गए। आयुष के मुताबिक़ बिल्डिंग में लगे cctv में धक्का-मुक्की और ज़बरन ऊपर ले जाते हुए तस्वीरें क़ैद हुई हैं।

तीसरे माले पर ले जाकर जेहादी मानसिकता के मीडिया मालिकों के चंगुल में फँस चुके आयुष को कपड़े उतारने को कहा गया और ज़बरन उसे पूरी तरह निर्वस्तत्र (नंगा) कर दिया गया। काशिफ़, उसके पिता और भाई यहीं नहीं रुके व उन्होंने आयुष के हाथ पैर बाँधकर डंडा फँसा कर उसे उलटा लटका दिया व नीचे पानी से भरे टब में सर डाल दिया।

इस पूरी बर्बरता से पहले आयुष ने समझदारी दिखाई और अपने एक मित्र को फ़ोन करके मामला उसके बड़े भाई तक पहुँचाने और पुलीस तक पहुँचाने को कहा। आयुष के भाई का फ़ोन समय पर ना मिलने पर उसके मित्र ने 100 नम्बर पर फ़ोन कर दिया जिसके बाद आयुष के पास पुलीस अधिकारी का फ़ोन आया और उन्होंने आयुष से 5 मिनट का समय माँगा साथ ही कहा कि पुलिस के वाहन पहुँचने पर आपको सुरक्षित निकाला जाएगा। परंतु इसे भाँपते हुए ज़हीर ने आयुष का फ़ोन छीन लिया और पुलिस से आयुष का सम्पर्क नहीं हो सका। और नोएडा (उत्तर प्रदेश) पुलिस के सिपाही वापस चले गए।

काफ़ी देर बाद जब आयुष के बड़े भाई और पिता को मामले की जानकारी आयुष के मित्र से मिली तब उन्होंने आयुष के मित्र से काशिफ़ का फ़ोन नम्बर लिए। काशिफ़ ने उन्हें अभिषेक काफोन नंबर दिया। अभिषेक को फ़ोन करने पर उसने तक़रीबन 3 घंटे आयुष के घरवालों को गुमराह किया की सब ठीक है और आयुष ने चोरी की थी पर सब ठीक है। इस पर आयुष के भाई ने जब पुलिस को फ़ोन करने को कहा तो वो बोला की नहीं हमने नहीं किया हमें ज़रूरत नहीं लगी हमने आयुष से लिखवा लिया है और इसने लिखित में माना है और दस्तावेज़ भी दे दिए हैं। बस आप 50000 रुपये लेकर आ जाना या पैसों से बचना है तो आयुष को समझा दिया है की कल से काम पर आए और जो हुआ उसपर चुप रहे। 

आयुष के घरवालों को शक हुआ तो उन्होंने लगातार आयुष से सम्पर्क करने की कोशिश की। काफी समय बाद जब आयुष वहाँ से बाहर आया तब उसने अपने साथ हुई बर्बरता बयान की। इस सब घटना में रात के 1 बज चुके थे।

ज़हीर ने आयुष को धमकी देते हुए कहा की मामले पर चुप रहना क्यूँकि तुम जानते हो न हमारी यानि “Channel One News” की पहुँच सरकार तक है। उल्टा कल तुम ही जेल में जाओगे। 

 

देखें वीडियो : संस्कार वाली पार्टी के चमत्कार, Bjp की परिवर्तन रैली में हुआ नंगा नाच….

संस्कार वाली पार्टी के चमत्कार

लखनऊ: जैसे जैसे यूपी चुनाव नजदीक आता जा रहा है भाजपा नित नये दिने चुनाव जीतने के नये नये हत्कंडे अपना रही है अबकी बार बीजेपी ने तो हद ही कर दी है, परिवर्तन रैली में भीड़ इकट्ठा करने के लिए बार डांसरों को बुला कर अश्लील डांस कराया गया।

विडियो शेयरिंग वेबसाइट यूट्यूब पर अपलोड विडियो के अनुसार भाजपा ने उप चुनाव से पहले परिवर्तन रैली में भीड़ इकठ्ठा करने करने के लिए बार डांसरों से अश्लील डांस कराया गया और बड़े नेताओं के आने से पहले ही उन्होंने बालाओं को ठिकाने लगा दिया।

वीडियो देखें:- 

J&K में तैनात BSF जवान का वीडियो वायरल: कहा- हम भूखे रहते हैं, बड़े अफसर सामान बाजार में बेच देते हैं

बीएसएफ जवान ने वीडियो जारी कर आला अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर में तैनात बीएसएफ के एक जवान का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में ये जवान सीमा पर मुश्किल हालात में ड्यूटी करने का अनुभव बता रहा है। जवान खास तौर पर बड़े अफसरों से नाराज दिखता है। वो कहता है कि जवानों को ठीक से खाना भी नहीं मिलता। कई बार तो जवानों को भूखा भी सोना पड़ता है। हालांकि, वीडियो में जवान ने अपना नाम नहीं बताता। ना ही ये बताता कि उसकी तैनाती किस पोस्ट या सेक्टर में है।

पढ़िए वीडियो में जवान द्वारा कही गई बातों की पूरी स्क्रिप्ट..
– “सभी देशवासियों को नमस्कार, गुडमॉर्निंग, सलाम और जय हिंद। देशवासियों, मैं आपसे एक अनुरोध करना चाहता हूं। मैं बीएसएफ 29 बटालियन सीमा सुरक्षा बल का का जवान हूं। जो कि हम लोग सुबह 6 बजे से शाम को पांच बजे तक कंटीन्यू इस बर्फ के अंदर 11 घंटे तक खड़े होकर ड्यूटी करते हैं।”
– “कितनी भी बर्फ हो, बारिश हो या तूफान हो। हम इन्हीं हालातों में ड्यूटी करते हैं। मेरे पीछे का दृश्य शायद आप लोग देख रहे होंगे। फोटो में शायद आपको ये दृश्य अच्छे लग रहे होंगे। लेकिन, हमारी जो सिचुएशन है, उसे ना कोई मीडिया दिखाता है, ना कोई मिनिस्टर सुनता है।”
– “कोई भी सरकार आई हो, हमारे हालात वही बदतर हैं। मैं इसके बाद आपको तीन वीडियो भेजूंगा। जो आप देश के तमाम मीडिया और नेताओं को दिखाएं।”

आगे पढ़िये व देखिये : अफसरों पर गंभीर आरोप

इंडोनेशिया में मां-बाप के पैर छूने की परंपरा, एक भी वृद्धाश्रम नहीं?

हिंदुस्तान में माता-पिता, घर के बड़ों-बुजुर्गों, शिक्षकों व अन्य के प्रति मान-सम्मान का भाव दिखाने के लिए चरण वंदना की परंपरा है। ऐसे भी कई उदाहरण देखते हैं जब बच्चों ने अपने माता-पिता के पैर धोकर उनका सम्मान किया। लेकिन शायद हिंदुस्तान के कुछ लोगों को लगता है कि हमारी यह परंपरा अब कमज़ोर पड़ रही है। तभी तो इंडोनीशिया की इस तस्वीर से प्रेरणा ले रहे हैं।

 

पहले हमने गुरुमुखी यानि पंजाबी भाषा से भी कुछ पोस्ट खोजे। दो मिसाले देखें,

ऐसे और भी पोस्ट आपको मिल जाएंगे जिनमें लिखा गया है, ‘इंडनीशिया में हर स्कूल में एक स्पेशल दिन होता है। उस दिन सारे बच्चों की माओं को स्कूल बुलाया जाता है और उनके बच्चों के द्वारा उनके पैर साफ़ करवाए जाते हैं ताकि ये बच्चे अपने माँ-बाप की सेवा करना ना भूलें। इसका नतीजा यह हुआ है कि इंडनीशिया में एक भी वृद्धाश्रम नहीं है।’

आइए अब अगले पृष्ठ पर आपके सामने ‘पूरी तस्वीर’ रखते हैं।

जानिए इस्लाम में हलाल से हलाला तक का सफर, देखिये कैसे मौलवी बहु, बेटियों से मजे करते हैं !

इस्लामी पारिभाषिक शब्दों में “हलाल और “हलाला ” यह ऐसे दो शब्द हैं, जिनका कुरान और हदीसों में कई जगह प्रयोग किया गया है। दिखने में यह दौनों शब्द एक जैसे लगते हैं। यह बात तो सभी जानते हैं कि, जब मुसलमान किसी जानवर के गले पर अल्लाह के नाम पर छुरी चलाकर मार डालते हैं, तो इसे हलाल करना कहते हैं। हलाल का अर्थ “अवर्जित ” होता है।

लेकिन हलाला के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। क्योंकि इस शब्द का सम्बन्ध मुसलमानों के वैवाहिक जीवन और कुरान के महिला विरोधी कानून से है। क्योंकि कुरान में अल्लाह के बनाये हुए इस जंगली, और मूर्खता पूर्ण कानून की आड़ में मुल्ले, मौलवी और मुफ्ती खुल कर अय्याशी करते हैं।

इस बात को ठीक से समझने के लिए अल्लाह की औरतों के प्रति घोर नफ़रत, और मुसलमानों की पारिवारिक स्थितियों के बारे में जानना बहुत जरूरी है। मुसलमानों में दो-दो , तीन-तीन औरतें रखना साधारण सी बात है। और फिर ज़्यादातर मुसलमान अपनी ही बहनों से भी शादियाँ कर लेते हैं। और अक्सर संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते हैं। इसलिए पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं। और कभी पति गुस्से में पत्नी को तलाक भी दे देता है। चूंकि अल्लाह की नजर में औरतें पैदायशी अपराधी होती है, इसलए कुरान में पति की जगह पत्नी को ही सजा देने का नियम है। यद्यपि तलाक देने के कई कारण और तरीके हो सकते हैं, लेकिन सजा सिर्फ औरत को ही मिलती है। इसे विस्तार से प्रमाण सहित बताया गया है। जो कुरान और हदीसों पर आधारित है।

अगले पृष्ठ पर पढ़िये : कुरान और हदीसों पर आधारित