फाइव स्टार होटल का आराम छोड़ कर इस नेता ने अपनाया गौशाला में रहना

यदि हममें से किसी के पास भी फाइव स्टार होटल में रहने का मौका हो तो हम बहुत ही उत्साह के साथ उस मौके को अपना लेंगे| लेकिन इस नेता ने हमारी इस सोच को गलत साबित कर दिया| भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय मंत्री एस सुरेश कुमार ने फाइव स्टार होटल में रहने का मौका छोड़ कर म्य्सूर के गाँव के गौशाला में रहना पसंद किया|

हालाँकि खुली जगह या गौशाला में रहना कुमार के लिए कोई नई बात नहीं है| सुरेश कुमार ने कहा-” मैं पहले भी बेंगलुरु से तिरुपति की 2013 की यात्रा में खुली जगहों पर रह चुका हूँ| मैं ऐसी जगहों पर तब भी रह चुका हूँ जब मैंने धर्मस्थल और सबरीमाला के लिए 2015 में पदयात्रा की थी|”

कुमार बेंगलूर दक्षिण उपनगर में राजजिनगर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और 9 अप्रैल के लिए निर्धारित होने वाले नानजंगुद उप-चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार श्रीनिवास प्रसाद के लिए प्रचार कर रहे हैं।

कुमार ने कहा-“पार्टी के नेताओं ने मेरे लिए अच्छे से अच्छा रहने का बंदोबस्त किया था पर मैंने उसे न स्वीकारने का निश्चय किया|” वे दिन भर काम्पैन्गिंग से थक क्र आने के बाद गौशाला में रहना ज्यादा पसंद करते हैं| गौशाला में वे समाचार पत्र पढकर और अपने अनुयायियों से बात चीत करके अपना समय बिताते हैं| अपनी निष्कलंक समझ बूझ कि वजह से अक्सर ही वे लोगो को अपनी बातों की ओर आकर्षित कर लेते हैं|

खुलासा : ममता बनर्जी पाँच बार की नमाजी है, गौमांस का भी करती है सेवन !

यूनाइटेड हिन्दी : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भले ही एक गरीब परिवार से थी पर आज ममाता बनर्जी के भतीजे के पर अरबों की संपत्ति है, और पश्चिम बंगाल में तो चिटफण्ड घोटाला ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस चला रही थी। ममता बनर्जी अपने राजनितिक जीवन की शुरुवात में कांग्रेस की सदस्य थी। पश्चिम बंगाल में मोटा मोटी दो ही पार्टियां हुआ करती थी, एक वामपंथी और एक कांग्रेस, और ममता बनर्जी ने वामपंथियों को इसलिए नहीं चुना क्योंकि वो किसी भी धर्म को बढ़ावा नहीं देते (हालाँकि ये केवल एक झूठ है, भारत के वामपंथी कट्टरपंथी इस्लामिक है)।
ममता बनर्जी ने कांग्रेस की सदस्यता की, और कोलकाता यूनिवर्सिटी में पढाई के दौरान ममता बनर्जी ने अपना सब्जेक्ट चुना “इस्लामिक हिस्ट्री” इतने सारे सब्जेक्ट में ममता बनर्जी को इस्लामिक हिस्ट्री ही पढ़ना था। थोड़े दिनों बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़ अपनी अलग पार्टी बना ली जिसे आज आप तृणमूल कांग्रेस कहते है।

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