शहीद हुए तो अकेले भगत ही हीरो क्यों ? सिर्फ इसलिए कि वो जेल में लेनिन को पढते थे ।

भगत के मिट्टी की खुशबू हम सबके जेहन में रच-बस चुकी है, तुम्हारे षड्यंत्र अब सफल नहीं होंगे….

ब्लॉग : शिवेश प्रताप ( यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) :- ॥ कड़वा सच ॥

जब भगत सिंह के साथ राजगुरु और सुखदेव भी बराबर शहीद हुए तो अकेले भगत ही हीरो क्यों ? सिर्फ इसलिए कि वो जेल में लेनिन को पढते थे ।

दरअसल “केवल भगत सिंह” का ही महिमामण्डन करना दूषित राष्ट्र वाद और वामपंथी मुस्लिम विचारधारा पर खडे सामाजिक विज्ञान को सह देना है ।

आजादी के पहले से ही मुसलमान बिकाऊ रहे और अंग्रेजी हुकूमत की चाटुकारिता में रहे । आजादी के बाद इस्लाम पोषित वामपंथी दरअसल हिंदुओं के राष्ट्रवादी विचारों के तोड़ के रूप में एक सिख भगत सिंह को हीरो के रूप में ज्यादा हाईलाइट कर एक तीर से कई निसाने साधते रहे । जिसमें सिखों को वामपंथ की ओर मोड़ देश को तोड़ा जाए भी एक कारण है । दूसरा कि क्रांति नायक के रूप में भगत को खडा कर चंद्रशेखर आजाद के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के स्वरूप को भी मंद किया जाए । दरअसल वामपंथियों को चंद्रशेखर के जनेऊ से हमेशा समस्या रही ।

भगत सिंह के बलिदान का मैं बहुत सम्मान करता हूँ पर “केवल भगत सिंह” के अतिशय महिमा मंडन के खिलाफ हूँ । सुखदेव और राजगुरु का बलिदान भगत से रत्ती भर कम नहीं है ।

और यदि बलिदान की बात है तो फिर यह देश सबसे कम उम्र में फांसी पर चढे खुदीराम बोस को सिर्फ इसलिए भूल जाता है कि वो हिंदू थे ???

कृपया वामपंथी कुचक्र से बाहर निकल कर तीनों वीर बलिदानियों को बराबर सम्मान देकर नोटों पर छापने की बात करें । अकेले भगत क्यों ?

बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव की मौत की खबर का सच आया सामने….

तेज बहादुर यादव पूरी तरह स्वस्थ हैं, मौत की खबरें पाकिस्तानियों का एजेंडा : बीएसएफ

नई दिल्ली (यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम): कुछ महीने पहले भारतीय सीमा पर तैनात बीएसएफ के एक जवान ने खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाया और facebook पर एक वीडियो शेयर करके कहा कि बीएसएफ में जवानों को अच्छा खाना नहीं दिया जाता है ! बीएसएफ ने तत्काल उसपर जांच बिठाई और आरोपों को नकार दिया। लेकिन अब यह बात सामने आ रही है कि पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर यह बताया जा रहा है कि भारत में यह शिकायत करने वाले जवान की मौत हो चुकी है। वहीं, बीएसएफ ने सोशल मीडिया पर जवान तेज बहादुर यादव की मौत की तस्वीरों को पूरे तौर पर सिरे से खारिज कर दिया है। बीएसएफ ने कहा है कि तेज बहादुर यादव पूरी तरह स्वस्थ हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर घूम रही कुछ तस्वीरों में बीएसएफ में खान-पान की शिकायत करने वाले जवान तेज बहादुर की मौत की झूठी खबर प्रचारित की जा रही है। इन तस्वीरों में तेजबहादुर को चोटें लगी हुईं भी नज़र आ रही हैं।

pakistani tweet on tej bahadur

पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर बीएसएफ जवान तेज बहादुर को लेकर चल रहा ट्वीट…

बीएसएफ का कहना कि ज़ाहिर है यह तस्वीरें फ़र्ज़ी प्रोपेगेंडा का हिस्सा हैं। पड़ताल में यह पता चला है कि यह प्रोपेगेंडा सीमापार से संचालित हो रहा है। इन तस्वीरों को प्रमुखता से ट्वीट करने वाले लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स इसकी तस्दीक करते हैं कि वे पाकिस्तान के हैं।

यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ने इसी वायरल खबर की जाँच पड़ताल की तो पता चला की तेजबहादुर यादव के मौत की जो तस्वीर चलाई जा रही है वो सुकमा में मारे गए 12 जवानों में से किसी एक जवान की है ।

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तेजबहादुर के मौत की जो तस्वीरें इस फेसबुक में दिखाई जा रही है वो किसी और जवान की है। तेजबहादुर यादव के मौत की जो तस्वीर चलाई जा रही है वो 11 मार्च को सुकमा में मारे गए 12 जवानों में से किसी एक जवान की है।

टीम ने इस बारे में तेजबहादुर यादव की पत्नी से भी बात की है। उन्होंने ने भी तेजबहादुर के मौत की खबर को झूठी खबर कहा और यह बताया कि तेजबहादुर पूरी तरह स्वस्थ हैं।

साथ ही बीएसएफ का भी कहना कि जाहिर है यह तस्वीरें फर्जी प्रोपेगेंडा का हिस्सा हैं। जांच में यह पता चला है कि यह प्रोपेगेंडा सीमापार से संचालित हो रहा है।

हिन्दुओं के रक्त में सेक्युलर नामक वायरस घुस गया है, इसलिए हिन्दू रामनवमी कैसे मनाएंगे ?

बहिष्कृत सिंधी शिया मुस्लिम साईं बाबा ने दिखाया था जो इसे भगवान् ही मान लिया ?

ब्लॉग : ( वैष्णवी कुमारी, यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) :- अजमेर में स्थित सूफ़ी संत हजरत मोईनुद्दीन चिस्ती की दरगाह को कोई मुसलमान अल्लाह मानकर नहीं पूजता, बल्कि अल्लाह का बंदा मानकर ही पूजते है।

सतयुग में ऋषि विश्वामित्र ने तो अपने योग बल से एक नकली स्वर्ग ही बना दिया था। इतना सामर्थ्य होने के बाद भी उन्हें केवल एक बहुत बड़ा योगी ही माना जाता है, भगवान् नहीं! अगस्त्य मुनि ने पूरे खारे सागर को ही पी लिया था (कुम्भोदार अगस्त्य मुनि) लेकिन इतना महान चमत्कार दिखाने के बाद भी अगस्त्य को ईश्वर या ब्रह्म नहीं माना गया!

प्रश्न ये है कि इनमें से कौनसा चमत्कार इस बहिष्कृत सिंधी शिया मुस्लिम साईं बाबा ने दिखाया था जो इसे भगवान् ही मान लिया ? अगर चमत्कार दिखाया भी होता तो इसे केवल एक महान योगी और ईश्वर भक्त ही माना जा सकता था, ईश्वर तो स्वप्न में भी नहीं ?

अब अगर वेदों में प्रतिपादित भगवान् विष्णु हमारी लौकिक और तुच्छ मनोकामनाओं को फटाफट पूर्ण न कर सकें तो कोई बात नहीं; हम हिन्दू सौदेबाज लम्पट हैं। हमारे भगवान् वही है जो हमारी इच्छाओं को पूर्ण करे। फिर चाहे हमें पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आये मानसिक बीमार मुस्लिम चाँद मियाँ उर्फ साई को ही क्यों न पूजना हो; जिसे उसकी बिरादरी वालों ने इसलिए निकाल दिया था कि वो ‘अनलहक अनलहक'(मैं अल्लाह हूँ, मैं अल्लाह हूँ) बकता रहता था। वही चाँद मियाँ महाराष्ट्र के शिरडी प्रान्त में मस्जिद में जैसे तैसे जीवन काटता था छोटे मोटे चमत्कार पाखंड दिखाकर। विचित्र है कि जो बात उसकी कौम वालों ने नहीं मानी वो आज के सेक्युलर हिन्दू मूर्ख तुरंत मान गए (कि वो भगवान् है)।

वैसे भी आज के वर्तमान हिन्दू समाज में किसी भी तरह की कोई लाज/शर्म तो है ही नहीं ! क्योंकि वैसे भी हज़ारों सालों से गुलामी के आदि हो चुके हैं। अब आज के सेक्युलर हिन्दू के पास स्वाभिमान नाम जैसा कुछ बचा नहीं है; सो हम इस कौम से बेदखल किये हुए साई बाबा को अपने नए भगवान् के रूप में पूजें। और हाँ इस मुस्लिम, अवैदिक, अपौरानिक साई बाबा को पूजने के बाद भी हम हिन्दू धर्मावलंबी ही कहलायेंगे और हिंदुओं के माथे पर काला दाग लगाएंगे!

अब और क्या बचा है? राम नवमी को हम अयोध्या या फिर राम मंदिर नहीं जाएंगे बल्कि नवविकसित तीरथ शिरडी जायेंगे और राम की जगह इस शिया मुस्लिम साई को साई ॐ साई राम (अर्थात माता जानकी के पति) कहकर पूजेंगे। हम हिन्दु इस ‘निष्कासित सिन्धी मुस्लिम साईबाबा’ को तो अब ‘भगवान् राम जो कि सनातन परब्रह्म है’ – उनके रूप में पूज रहे हैं न!

इस प्रश्न को हिन्दू-मुस्लिम विवाद का रूप देने वालों को तत्काल जेल में बन्द कर देना चाहिए

यह शुद्ध रूप से राजनैतिक मसला हो गया है।नहीं तो वास्तविकता तो हर मुसलमान जनता है।आम मुसलमान भूमि छोड़ना भी चाहे तो कथित मुस्लिम धर्म ठीकेदार ऐसा नहीं होने देंगे।

ब्लॉग : विनय झा ( यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) :- बाबरी मस्जिद के नीचे विशाल हिन्दू मन्दिर के साक्ष्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने सर्वोच्च न्यायालय को सौंप दिया था जिसपर सर्वोच्च न्यायालय वर्षों से कुण्डली मारकर बैठी है और अब कहती है कि (इस पुरातात्विक साक्ष्य को किनारे करके) “बातचीत” द्वारा हल ढूँढना चाहिए !

सर्वोच्च न्यायालय ने ही रामजन्मभूमि मन्दिर के साक्ष्य माँगे थे जिसपर पहले तो मनमोहन सरकार ने कहा था कि राम जी काल्पनिक हैं, जिस कारण पुरातात्विक उत्खनन हुआ, और अब उस साक्ष्य को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ही अनदेखा किया जा रहा है ।

यही कारण है कि बाबरी एक्शन कमिटी को सर्वोच्च न्यायालय पर पूरा भरोसा है। क्या आप लोगों को सर्वोच्च न्यायालय पर पूरा भरोसा है ?

बाबरी एक्शन कमिटी का कहना है कि बातचीत से कोई हल नहीं निकलेगा, अदालत को फैसला करना चाहिए, जबकि हिन्दुत्ववादियों ने बातचीत का स्वागत किया है।

मस्जिद में अल्लाह या मुहम्मद साहब पैदा नहीं हुए थे और न ही उनकी मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा की जाती है, मस्जिद केवल नमाज पढने की सुविधा हेतु बनाया स्थान है जिसे आवश्यकता पड़ने पर विस्थापित करने से मजहब को कोई क्षति नहीं पंहुचती। किन्तु रामजन्मभूमि को अन्यत्र विस्थापित करना असम्भव है। यह साधारण बात बाबरी एक्शन कमिटी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पल्ले नहीं पड़ती, पुरातात्विक साक्ष्य भी उनके लिए बेमतलब हैं। वे भली-भांति जानते हैं कि श्रीराम के मन्दिर को तोड़कर मस्जिद बनाया गया था, फिर भी मस्जिद हटाने के लिए तैयार नहीं हैं।

अतः मामला गुण्डागर्दी का है, मजहब का नहीं ! इस्लाम तो नहीं कहता कि हिन्दू मन्दिर को तोड़कर उसके मूर्ति वाली दीवारों द्वारा मस्जिद बनाना चाहिए। जिस बाबरी मस्जिद को 1992 में तोड़ा गया था उसके प्रवेश द्वार के एक खम्बे का एक फोटो मैं संलग्न कर रहा हूँ जो सिद्ध करता है कि प्राचीन हिन्दू मन्दिर की दीवारों और खम्बों द्वारा ही बाबरी मस्जिद बनी थी (यह फोटो और अनेक अन्य फोटो 1992 में ही मस्जिद टूटने से कुछ पहले एक सांसद द्वारा लोकसभा में दिखाए गए थे)।  जिस मस्जिद की दीवारों में हिन्दू मूर्तियाँ हों उसे मस्जिद नहीं माना जा सकता, उसमें नमाज पढ़ना कुफ्र है। अतः जो लोग बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ना चाहते हैं वे काफिर हैं। बाबरी एक्शन कमिटी के नेताओं ने भी बाबरी मस्जिद में कभी नमाज नहीं पढ़ी, वे लोग केवल हिन्दूओं का मानमर्दन करने की जिद ठाने हुए हैं। सुब्रह्मण्यम स्वामी भी यह बात अदालत को नहीं बता पा रहे हैं कि हिन्दू मन्दिर के अवशेषों से बने मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ा जा सकता।

जिन हिन्दू मन्दिरों को तोड़कर वहाँ मस्जिदें बनायी गयी वहाँ पुनः मन्दिर बनाना ही पडेगा। इस प्रश्न को हिन्दू-मुस्लिम विवाद का रूप देने वालों को जेल में बन्द कर देना चाहिए, क्योंकि महमूद गजनवी और बाबर जैसे विदेशी डाकुओं द्वारा मन्दिरों का ध्वंस करने का मामला है, भारतीय मुस्लिम बनाम हिन्दू का मामला नहीं है।

ब्लॉग : पीएम नरेंद्र मोदी के अंधविरोधी हैं उनकी सबसे बड़ी शक्ति

मोदी के अंधविरोधी हैं उनकी सबसे बड़ी ताकत

ब्लॉग : Neeraj Badhwar (facebook Coyp) :- बीजेपी को यूपी में 325 सीटें मिलने के बाद से बहुत से लोग इसे लेकर काफी हैरान हैं। ये वो लोग हैं जो ‘स्थानीय लोगों’ से की गई बातचीत और ‘ज़मीनी हालात’ के आधार पर बीजेपी की हार का दावा और दुआ कर रहे थे। और जब योगी आदित्यनाथ वहां मुख्यमंत्री बन गए, तो ये समझ नहीं पा रहे कि ऐसा कैसे हो गया?

इसी तरह की हैरानी इन्हें तब भी हुई थी जब 3 साल पहले नरेंद्र मोदी अपने दम पर प्रधानमंत्री बन गए थे। यूं तो मैं ज़्यादा लंबा लिखने से बचता हूं मगर अब इस वर्ग की हैरानी इतनी दयनीय लगने लगी है कि सोचा अपने भी कुछ विचार साझा कर लूं।

पहली बात उन पत्रकारों की हैरानी के बारे में जो दावे तो कुछ और कर रहे थे और हुआ कुछ और। उनसे मुझे ये कहना है कि भाई आप किसी भी मुद्दे पर तय निष्कर्ष के साथ अपनी ही सोच वाले मेहमान बुलाकर अगर ‘निष्पक्ष’ चर्चा करोगे तो उस चर्चा से वही निकलकर आएगा जो आप चाहोगे।

अगर आप खुद से अलग सोच रखने वाले व्यक्ति को सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक करते रहोगे, तो आप उन ही लोगों से घिर जाओगे जो आप जैसा सोचते होंगे या आपकी ही सोच का गुणगान करते होंगे। अब ऐसे लोगों की संगत से आप किसी ‘ज़मीनी हकीकत’ का अंदाज़ा लगाएंगे, तो आप खुद को अंधेरे में रखेंगे और ये अंधेरा आपकी टीवी स्क्रीन से भी ज़्यादा गहरा और काला होगा ।

अब बात करते हैं बीजेपी की जीत की। मुझे ईमानदारी से लगता है कि 2014 में जब प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी की उम्मीदवारी सामने आई थी, तो बहुत से लोग उनमें एक ईमानदार प्रशासक तो देखते थे मगर इस बात का भरोसा बहुत कम लोगों को था कि वो बीजेपी को बहुमत दिला सकते हैं। मगर इसके बाद साम्प्रदायिकता के नाम पर उन्हें विपक्षी दलों, मीडिया और ख़ास वर्ग की तरफ से इतनी गालियां दी गईं कि इन गालियों ने उनके लिए वो काम कर दिया जो खुद मुख्यमंत्री रहते उनका काम भी नहीं कर पाता!

मगर अंध विरोधियों के ये बात न तब समझ आई थी न अब आई है। उन्हें ये मामूली बात समझ नहीं आई कि मोदी को मोटे तौर पर लोगों ने विकास के एजेंडे पर ही चुना था और अगर उन्हें मोदी को किसी मुद्दे पर घेरना है तो वो भ्रष्टाचार और विकास से ही जुड़ा हो सकता है।

मगर ये तो तर्क की बात हो गई। और जब हम किसी से नफरत करते हैं, तो तर्क तो इस्तेमाल की जाने वाली आखिरी चीज़ होती है। आप बीवी को साथ न रखने के लिए उनका मज़ाक बनाओगे, विदेश यात्राओं के लिए खिल्ली उड़ाओगे, कपड़ों के लिए तंज कसोगे। इस तरह से जितने non issue थे हर किसी को issue बनाने की कोशिश की गई। दादरी जैसे अपवाद को देश का करंट स्टेटस बताकर उसे बढ़ती असहिष्णुता से जोड़ा गया। अवॉर्ड लौटाए गए, कन्हैया कुमार पैदा किए गए, स्क्रीनें काली की गईं। खुद ही एक दूसरे की पीठी खुजा और थपथपाकर ये तसल्ली भी कर ली गई कि हम सही रास्ते पर जा रहे हैं मगर हुआ क्या?

मैं हमेशा ये कहता हूं कि जनता बड़ी संयमी होती है। वो सरकारों के विश्लेषण करने में वैसी बेसब्र और पूर्वाग्रही नहीं होती जैसा एक ख़ास वर्ग होता है। जब तक उसे लगता है कि सरकार की नीयत साफ है, वो ईमानदारी से काम कर रही है, जो कर सकती थी कर रही है,तब तक लोगों का उस पर भरोसा डगमगाता नहीं।

उससे भी बड़ी बात पत्रकारों या धार्मिक कट्टरपंथियों के उलट आम आदमी को किसी नेता को खारिज ही नही करना होता, उसे चयन भी करना होता है। आप कहते हैं मोदी बुरा है… मोदी बुरा है…तो…अच्छा कौन है…राहुल गांधी!

बड़ा ताज्जुब होता है कि जिस राहुल गांधी ने सक्रिय राजनीति में आने के बाद कांग्रेस को दो दर्जन से ज़्यादा चुनाव हरवा दिए, उसकी ये वर्ग चर्चा नहीं कर रहा। पंजाब में केजरीवाल के हारने पर उसे दिल्ली में उनके काम पर मिले जनादेश के तौर पर नहीं देख रहा मगर ये सवाल ज़रूर पूछ रहा है कि योगी आदित्यनाथ को सीएम क्यों बना दिया? लोगों ने तो विकास के लिए बीजेपी को वोट दिया था।

भाई इतनी तो राजनीतिक समझ पैदा करो जब जनता किसी पार्टी को तीन चौथाई से भी ज़्यादा समर्थन देती है, वो भी यूपी जैसे राज्य में, तो वो समर्थन नहीं देती बल्कि अपने भरोसे का समर्पण करती है। वो कहती है कि भरोसा किया है चाहो जो कर लो। मगर अब भी बजाए इस जनसमर्थन को समझने के इस नुख्ताचीनी में लगे हैं कि घर का शुद्धीकरण क्यों करा दिया, सांसद को मुख्यमंत्री क्यों बना दिया।

मार्क ट्वेन ने कहा था गुस्सा उस तेजाब की तरह होता है जो जिस प्याले में होता है उसे ही सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाता है। किसी के प्रति नफरत भी वैसे ही होती है। तभी तो देखिए न जो मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बनते नहीं दिख रहे थे उन्हें प्रधानमंत्री बनवा दिया और जो बीजेपी पिछली बार 50 सीटें नहीं ला पाई थी वो सवा तौन के पार चली गई। और ये सब हुआ है तो इसमें मोदी का कम और उनके इन अंधविरोधियों का प्रताप ज़्यादा है!

गंगा-यमुना को जीवित मनुष्य के समान कानूनी अधिकार देने का फैसला

गंगा-यमुना को मनुष्य मानने का वैदिक आधार

यूनाइटेड हिन्दी स्पेशल रिपोर्ट : आज नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा नदी को देश की पहली जीवित इकाई के रूप में मान्यता दी है और गंगा-यमुना को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद भारत की दोनों महत्वपूर्ण नदियों गंगा और यमुना को अब एक मानव की तरह संविधान की ओर से मुहैया कराए गए सभी अधिकार मिल सकेंगे। कुछ दिनों पहले ही न्यूजीलैंड ने भी अपनी वांगानुई नदी को एक जीवित संस्था के रूप में मान्यता दी थी।
यह बहुत ही सराहनीय कदम है कि दोनों पवित्र नदियों को कोर्ट ने जीवित मानकर मनुष्यों के सभी संवैधानिक अधिकार दे दिए हैं पर न्यूजीलैंड से पहले हम यदि ऐसा करते तो बात ही अलग होती। क्योंकि हम तो गंगा यमुना को माता कहकर मनुष्य और उससे भी ऊपर देवता की कोटि में रखते आए ही हैं, खैर अदालत ने यह फैसला देकर वैदिक संस्कृति का मान बढ़ाया है।

आजकल लोग हम पर जड़ वस्तुओं की पूजा और उन्हें चेतन मानने का आरोप लगाते हैं, इसके निराकरण के लिए वैदिक मान्यता की ओर हम चलते हैं ताकि हमारी इन समृद्ध मान्यताओं का स्त्रोत जान सकें। ध्यानपूर्वक पढ़िए।

वैदिक मान्यता में एक ‘मन’, दूसरा ‘प्राण’, और ‘पंचमहाभूत’ रूप सात तंतुओं से वह बुनकर (परमात्मा) इस सृष्टि रूपी पट को बुन रहा है। वेद ने उस महान कवि की सृष्टिरूप इस कविता को सप्ततंतुमय यज्ञ कहा है।

पंचभूत को वैदिक परिभाषा में ‘वाक्’ कहते हैं क्योंकि इनमें सूक्ष्मतम भूत ‘आकाश’ है, उसका गुण ‘शब्द’ या ‘वाक्’ है। यह सूक्ष्म भूत ‘आकाश’ ही सब अन्य भूतों में अनुस्यूत होता है इसलिए वाक् को ही पंचमहाभूत का सरल प्रतीक मान लिया गया।

शतपथ ब्राह्मण कहता है आत्मा के तीन घटक हैं— ‘अयमात्मा वांमयो मनोमयः प्राणमयः।’ अर्थात आत्मा मन, प्राण और वाक् से बनी है। सप्त तंतु रूप इस मन, प्राण और वाक् को ही त्रिक् कहते हैं। मन सत्व, प्राण रज और वाक् तम रूप है। सृष्टिरचना की वैदिक कल्पना इसी त्रिक पर आश्रित है। मन, प्राण और वाक् इस त्रिक के सम्मिलित सम्बन्ध से ही एक शक्ति या अग्नि उत्पन्न होती है, वही वैश्वानर अग्नि है। त्रिक के मिलन से उत्पन्न वैश्वानरः अग्नि से ही जीवन अभिव्यक्त हो पाता है। यह जब तक है तभी तक जीवन है।

इस त्रिक में से प्राण को हम एनर्जी(Energy) कह सकते हैं, पर Energy की अवधारणा जड़ भूतों से जुड़ी है जबकि वैदिक प्राण की अवधारणा जीवित शरीर से जुड़ी है। वैदिक दृष्टि के अनुसार चेतना ही भूत के रूप में परिणत होती है अर्थात मौलिक तत्व चेतना है और भूत उसका विकार है। इसलिए वैदिक दृष्टि में परमार्थतः सब कुछ चेतन ही है, जड़ कुछ है ही नहीं। चेतना जहाँ ज्यादा आवृत्त हो गई, कि हमारी दृष्टि में नहीं आती वही जड़ है। समस्त सृष्टि मन, प्राण और वाक्(पंचमहाभूत) के त्रिक से ही बनी है, यही मात्राभेद से सभी पदार्थों के घटक हैं। पर जैसे जैसे हमें छिपी हुई चेतना को पहचानने के साधन उपलब्ध हो जाते हैं, वैसे वैसे हम जिसे कल तक जड़ समझते थे उसे चेतन के रूप में जानने लगते हैं।

देखिए सर जगदीशचन्द्र बसु से पहले वनस्पतियों को आधुनिक विज्ञान में जड़ समझा जाता था पर जैसे ही बसु जी को समुचित उपकरण उपलब्ध हो गए, उन्होंने सिद्ध कर दिया कि वनस्पति में प्राण हैं। कम लोग जानते हैं कि जगदीश बोस वैदिक विद्याओं का भी ज्ञान रखते थे। महर्षि मनु की स्पष्ट घोषणा है कि वनस्पतियों में भी चेतना है और वे सुख दुख अनुभव करते हैं — ‘अन्तःसंज्ञा भवन्त्येते सुख दुखःसमन्विता।’

इसी तरह विज्ञान अब तक नदियों, पर्वतों आदि को जड़ माने हुए है पर वेद नदियों से कहता है कि, — ‘इमं मे गंगे यमुने सरस्वति’ ‘हे गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों! मेरी प्रार्थना सुनो’ (ऋग्वेद 10.75.5)। यह इसीलिए क्योंकि सभी पदार्थों में आत्मा है और आत्मा है तो प्राण भी है, मन भी है और वाक् भी है, मन है तो सोचने की क्षमता भी है, इसलिए उन्हें सम्बोधित करना कि वे प्रार्थना सुनें बिल्कुल ठीक है। इसके अतिरिक्त जीवन की अभिव्यक्ति वैश्वानर अग्नि से ही होती है, वेद स्पष्ट रूप से जल में वैश्वानर अग्नि की बात कहता है, — ‘वैश्वानरो यास्वगनिः प्रविष्टः’ (ऋग्- 7.49.5) अर्थात जल में वैश्वानर अग्नि विद्यमान है।

वेद में जड़ पदार्थों से चेतन व्यवहार के अनेक प्रमाण मिलते हैं। पर जड़ और चेतन के बीच मौलिक एकता को हृदयंगम कर लेने के बाद कोई कठिनाई नहीं रहती। प्रकृति और मनुष्य के बीच सनातन धर्मियों ने कभी भेद नहीं माना, क्योंकि दोनों ही सजीव हैं, अतः प्रकृति और जीवों को अलग अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसलिए सनातन संस्कृति सदैव गौ, भूमि, नदी, तुलसी को माता मानती आई है, हम हिन्दू चन्द्रमा को मामा कहते आए हैं, पहाड़ों को हमने पूजा है, प्रकृति के हर अंग को हमने वस्तु नहीं माना पर अपना आत्मीय सम्बन्धी माना है। इससे यह सिद्ध हो गया कि हम जड़ प्रकृति को नहीं पूजते, हमारी मूर्तिपूजा की परम्परा भी चेतन तत्व की ही उपासना है। जैसे जैसे सनातन संस्कृति और वैदिक मणि मंजूषा की आभा हमारे सामने प्रकट होती है, हमारी बुद्धि चमत्कृत, और जीवन धन्य धन्य हो जाता है। इससे पहले श्राद्ध के पीछे का वैदिक विज्ञान पर एक पोस्ट किया था, वैदिक विज्ञान पर यह दूसरा पोस्ट है।

अफ़ज़ल के जीजा साले, अब बोलो किस पर ऐठेंगे! भैंसों के सारे मालिक अब गाय बाँध कर बैठेंगे

अबतक तो उम्मीद नहीं थी, यू पी के दिन बदलेंगे ।
गुंडे तस्कर और मवाली, अपनी राहें बदलेंगे ॥

लेकिन मोदी जी ने मोदी वाला, तेवर दिखा दिया ।
सबकी हाँ मिलते ही योगी जी को, सी एम बना दिया ॥

माथे पर चंदन टीका है, सूर्य तेज़ के स्वामी हैं ।
यू पी के दिल की सुन ली, मोदी जी अंतर्यामी हैं ॥

हाथी थककर बैठ गया है, और साइकल टूटी है ।
पूरा यू पी झूम रहा हैं , बस योगी की तूती है ॥

कई सियासी गठबंधन अब, भिखमंगे हो जाएँगे ।
माँ को डायन कहने वाले, सब नंगे हो जाएँगे ॥

यू पी के सब गुंडो सुनलो, ये पिस्टल वाला गाँधी हैं ।
योगी केवल नाम नहीं हैं, योगी ख़ुद में आँधी हैं ॥

जिन को घिन आती हो, भारत माँ को माता कहने में ।
जिनकी साँसे फूल रही हो, वन्दे मातरम कहने में ॥

उनको योगी, योगी वाली, भाषा में समझाएँगे ।
वक़्त पड़ा तो हिटलर वाले, तेवर भी अपनाएँगे ॥

हाँ, थोड़ा कड़वा तेवर हैं, कड़वी भाषा कहते हैं ।
लेकिन योगी राष्ट्रवाद को, गले लगाकर रहते हैं ॥

साम दाम और दंड भेद का, मंतर पढ़ना आता हैं ।
योगी जी को सीधी ऊँगली, टेढ़ी करना आता हैं ॥

अफ़ज़ल के जीजा साले, अब बोलो किस पर ऐठेंगे ।
भैंसों के सारे मालिक अब, गाय बाँध कर बैठेंगे ॥

वक़्त लेगेगा, लेकिन यू पी, पावन सी हो जाएगी ।
अब यू पी में हर दिन होली , रात दिवाली आएगी ॥

कवि ‘प्रभात परवाना’ की कविता, अब पूरा यू पी गाएगा ।
देशप्रेम और राष्ट्रवाद की, योगी अलख जगाएगा ॥

112 नेताओं ने दिया सामूहिक इस्‍तीफा, BSP में मची भसड़! खत्म होने के कगार पर पार्टी

यूपी विधानसभा मे बीएसपी की करारी हार के बाद अब बहुजन समाज पार्टी की राजनीतिक अस्‍तित्‍व पर खतरा मंडराने लगा है।

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लखनऊ : यूपी विधानसभा मे बीएसपी की करारी हार के बाद अब मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राजनीतिक अस्‍तित्‍व पर खतरा मंडराने लगा है। एक तरफ जहां पार्टी सुप्रीमो मायावती हार के इस गहरे सदमे से बाहर निकलने का प्रयास कर रही हैं वहीं पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं में व्‍याप्‍त असंतोष उन्‍हें घात पर घात दिया जा रहा है।

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बसपा के 112 नेताओं ने एक साथ इस्‍तिफा दे दिया। इस्‍तीफा देने की वजह हार के असल कारण तलाशने की बजाय ठीकरा EVM में गड़बड़ी और कार्यकर्ताओं पर फोड़ना करार दिया गया है। इस्‍तीफा देने वाले 112 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि मायावती पार्टी के संस्थापक कांशीराम के सिद्धातों के बजाय किसी और तरफ ही चल रही हैं।

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वहीं कार्यकर्ताओं ने बहन मायावती के उस ऐलान की भी आलोचना की है जिसमें कहा गया था कि हर माह 11 तारीख को काला दिवस मनाया जाएगा। पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि ”मायावती हार की असल वजह की तह तक जाने की बजाय मशीन में गड़बड़ी का आरोप लगा रही हैं।

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इसपर बसपा के पूर्व लोकसभा प्रभारी सुशील सिंह चंदेल का कहना है कि जो धरना-प्रदर्शन जनसमस्याओं के लिए होना चाहिए था वो अब ईवीएम के खिलाफ हो रहा है। मायावती ने जनादेश का अपमान किया है।

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योगी आदित्यनाथ के CM बनने का जश्न मना रहे हिंदुओं पर मुस्लिम समाज का हमला

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रिपोर्टर : (आनंद ) :- पूरे जनपद में हिन्दू संगठनों के हजारों कार्यकर्ताओं ने जैसे ही खबर सुनी कि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा हो गई है। तुरंत सभी ने गली मौहल्लों में एकत्रित होना शुरू कर दिया और ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचने लगे। कार्यकर्ताओं ने पटाखे जलाकर जहां दीपावली जैसा माहौल बना दिया वहीं मिठाइयां खिलाकर एक-दूसरे को बधाइयां दी। हिन्दू जागरण मंच के जिला अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनने पर हिन्दुत्व की जीत बताया और कहा कि इससे हिन्दू समाज को मजबूती मिलेगी।

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उत्तर पृदेश के यूवा उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश शंकर (बहजोई नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष) ने हिन्दू समाज की जीत बताते हुए कहा कि इससे हिन्दू समाज को नई दिशा और मजबूती मिलेगी। अब भारत हिन्दू राष्ट्र बनने की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। योगी आदित्यनाथ से हिन्दू समाज को बड़ी बड़ी आशाएं है जो अब पूरी होती दिख रही है।

तभी अचानक से संभल में योगी आदित्यनाथ जी के CM बनने की जीत का जश्न मना रहे हिंदुओं पर मुस्लिम समाज का आक्रामक हमला हो गया , कई हिंदू घायल, माहौल तनावपूर्ण।

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पहली चुनौती से स्वागत किया गया है योगी जी का। बाकी माहौल बिगाड़ने का काम लश्कर ए मीडिया कर ही रही है ।कई सारी बातें नापी जा रही हैं यहाँ । निर्णय क्षमता, निर्ममता और ऑफ कोर्स इसके द्वारा हिंदुओं को दबाने की कोशिश है ही । अगर प्रतिक्रिया होती है तो जहां जखीरे संचयित हैं वहाँ उद्रेक हो सकते हैं और मीडियाई लश्कर सज्ज है अपनी तरफ से विषवर्षा करने को ।

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सरकार हरकत में आती है तो कम्यूनल अतिरेक की उपाधि तुरंत और मुक्तहस्त बांटी जाएगी। ये नहीं विकास के हैशटैग ट्रेंड करवाए जाएँगे । एक सांप्रदायिक व्यक्ति का चुनाव कर के भारत को गर्त में धकेलने का दाग मोदी जी पर लगाया जाएगा । पक्ष के अंदर भी जो हितशत्रु हैं वे सक्रीय हो जाएँगे ।

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बस इतना ही कहना है कि चीन को मानवाधिकार आदि के लिए कितनी भी गालियां दी हैं अन्य देश के लोगो ने, उन देशों के कंपनियों ने उसके साथ बिज़नस करना नहीं छोड़ा । उनके ग्राहक जानते हैं कि जो उत्पाद वे खरीद रहे हैं वे चीन में बने हैं फिर भी खरीदना बंद नहीं करते ।

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अगर योगी जी के स्वागत में गैर BJP राज्यों में दंगे हुए और लश्कर ए मीडिया उसके लिए योगी जी की नियुक्ति को जिम्मेदार बताए तो आश्चर्य न कीजिएगा । रोहिङ्ग्याओं पर म्यानमार में हुए कथित अत्याचारों का अर्थ यह तो नहीं होता कि मुंबई में दंगे हों, लेकिन हुए थे । कार्टून डेन्मार्क में छपे थे , दंगे दुनियाभर हुए । क्या संबंध था ? बस अपनी शक्ति की दहशत कायम करनी थी, यही समझना चाहिए ।

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यह इनका पैटर्न होता है । लेकिन हम न इनकी विचारधारा समझना चाहते हैं और न ही इनकी रणनीति ।

तलाक की कुप्रथा खिलाफ बीजेपी व RSS के साथ हुईं 10 लाख मुस्लिम महिलाएं…

ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर संघ से जुड़े एक संगठन की पिटीशन पर दस लाख से ज्यादा मुस्लिम महिलाएं साइन कर चुकी हैं।

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रिपोर्ट : ( केशर देवी ) :- ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर संघ से जुड़े एक संगठन की पिटीशन पर दस लाख से ज्यादा मुस्लिम महिलाएं साइन कर चुकी हैं। यह काम आगे भी जारी है। मिली जानकारी के मुताबिक, यह पिटीशन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) द्वारा साइन करवाई जा रही है। इसपर देश भर के दस लाख से ज्यादा मुसलमान साइन कर चुके हैं। उनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं। MRM द्वारा जो पिटीशन साइन करवाई जा रही है उसमें कहा जा रहा है कि इसको धर्म से जोड़कर ना देखा जाए क्योंकि यह एक सामाजिक समस्या है।

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देश की लगभग 78 प्रतिशत मुसलमान महिलाएं पति की ओर से एकतरफा तलाक का शिकार होती हैं, इनमें 65.9 प्रतिशत मौखिक रूप से तलाक बोला जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में हाल में एक लेख में कहा कि 9० प्रतिशत मुसलमान महिलाएं चाहती हैं कि काजियों की पहचान के लिए कोई कानूनी प्रणाली हो। मुसलमान महिलाओं ने स्वयं तीन बार तलाक बोल कर विवाह तोडऩे को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

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MRM के नेशनल कोर्डिनेटर मोहम्मद अफजल ने इस बारे में बात करते हुए कहा, ‘बीजेपी की यूपी में हुई बड़ी जीत, देवबंद जैसे मुस्लिम बहुल इलाके में उनका जीत जाना यह दिखाता है कि मुस्लिम महिलओं की आवाज उनके साथ है। इससे साफ होता है कि मुस्लिम महिला बीजेपी के ट्रिपल तलाक पर लिए गए फैसले के साथ है।’

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मौलाना अबुल कलाम आजाद के परपोते फिरोज अहमद ने भी मोदी सरकार के इस कदम की प्रशंसा की थी। उन्होंने इसको मुसलमानों के प्रति नरेंद्र मोदी का सकारात्मक रवैया बताया था। बता दें कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक-बहुविवाह जैसे प्रथाओं के प्रति अपना विरोध जता चुकी है और इससे जड़ी दूसरी बड़ी बात यह है कि केंद्रीय कानून मंत्रालय अब अपना टीवी चैनल शुरू करने जा रहा है। इस चैनल पर तीन तलाक़, यूनिफार्म सिविल कोड जैसे टॉपिक पर परिचर्चाएं पेश की जाएँगी। लोगों में न्यायिक जागरूकता लाने के मकसद से इस चैनल को लाया जा रहा है। इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने छात्रों को 32 चैनल वाली ‘स्वयंप्रभा’ डीटीएच सेवा शुरू करने की बात कही थी।बीजेपी की इस पहल से मुस्लिम महिलाओं के अंदर एक नयी उम्मीद की किरण जागी है।

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बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने भारी जीत हासिल की है। उसे अपने दम पर 312 सीट मिली हैं। बीजेपी ने ऐसे इलाकों में भी जीत दर्ज की है जहां पर मुस्लिम जनसंख्या ज्यादा है। इसपर बीजेपी नेता लगातार इस बात को कहते रहे हैं कि सरकार ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर अपना जो पक्ष रखा उसकी वजह से अधिकतर मुस्लिम महिलाएं बीजेपी के साथ आ गईं।

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