‘बाहुबली’ के बाद 600 करोड़ की ‘महाभारत’ से हिला बॉलीवुड, ये सितारे करेंगे कृष्ण और अर्जुन का रोल

कुछ फिल्में इतनी जबर्दस्त होती है कि वर्षों बाद भी हमारे जहन में उससे जुड़ी हुई बातें बस जाती है, जैसे फिल्म ‘शोले’ को ही लीजिए. शोले के डायलॉग अभी भी हिट है जिसका इस्तेमाल हम अपनी जिंदगी में अक्सर करते हैं। इसी तरह 90 के दशक में टीवी पर ‘महाभारत’ सीरियल आता है, जिसकी टीआरपी आसमान छूती थी। हालांकि, इसके बाद ‘महाभारत’ को कई प्रोडक्शन हाउस ने बनाया लेकिन जो धमाकेदार सफलता बीआर चोपड़ा की महाभारत को मिली वो किसी महाभारत को नहीं मिल पाई। टीवी सीरियल के बाद अब महाभारत फिल्म के रूप में आपके सामने होगी। इस फिल्म को पेश करेंगे बाहुबली के निर्देशक एस.एस राजमौली। ‘बाहुबली-2’ इसी साल 28 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म के रिलीज के बाद राजमौली महाभारत फिल्म पर काम शुरू करेंगे।

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गजब! दुनिया का इकलौता ऐसा पेड़ , जिसमेेंं लगते हैं 40 तरह के फल, कीमत सिर्फ इतनी

अभी तक आपने किसी पेड़ की अलग-अलग शाखाओं पर दो या तीन तरह के फल तो देखे होंगे। अगर आप से कहा जाए की एक पेड़ पर 40 तरह के फल लगते है तो शायद आप विश्वास नहीं करेंगे लेकिन ये सच है। अमरीका में एक ऐसा जादुई पेड़ है जिस पर 40 तरह के फल लगते हैं।


विज्ञान का चमत्कार
अमरीका के सेराक्यूज यूनिवर्सिटी में विजुअल आर्ट्स के प्रफेसर वॉन ऐकेन ने अद्भुत पौधा तैयार किया है। न्यूयॉर्क स्थित सीराक्यूस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और कलाकार सैम वैन आकेन इस तरह के पेड़ों को तैयार करने के लिए चिप ग्राफ्टिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इस पेड़ पर सतालू, खुबानी, बेर, चेरी और नेक्टराइन जैसे फल लगते है। प्रफेसर वॉन ऐकेन ने इस पेड़ का नाम ट्री ऑफ 40 रखा है।

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आईएसआईएस में शामिल होने से भारतीय मुस्लिम युवाओं को बचाने के लिए Ajit Doval कैसे करते है काम!

HOW TO SAVE Indian MUSLIM youth from joining ISIS : Ajit Doval

जनवरी 2005 में खुफिया ब्यूरो के प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त डोभाल, साल 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। मूलत: उत्‍तराखंड के पौडी गढ़वाल से आने वाले अजीत डोभाल ने अजमेर मिलिट्री स्‍कूल से पढ़ाई की है और आगरा विवि से अर्थशास्‍त्र में एमएम किया है। वे केरल कैडर से 1968 में आईपीएस अधिकारी के रूप में चुनकर आए हैं। कुछ साल वर्दी में बिताने के बाद, डोभाल ने 33 वर्ष से अधिक समय खुफिया अधिकारी के तौर पर बिताए और इस दौरान वह पूर्वोत्तर, जम्मू कश्मीर और पंजाब में तैनात रहे।

प्रधानमंत्री मोदी जी ने इन्हें सौंपी है पाकिस्तान और आतंकवादियों को सबक सिखाने की जिम्मेदारी। आतंकी और राष्ट्रविरोधी जिसे भेड़िया कहते है । जिसके बारे में कहा जाता है कि भगवान इस बंदे में दया नाम का पुर्जा लगाना भूल गया है । प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें महज 6 साल के करियर के बाद ही इंडियन पुलिस मेडल से सम्मानित किया था जबकि परंपरा के मुताबिक वो पुरस्कार कम से कम 17 साल की नौकरी के बाद ही मिलता था। यही नहीं राष्ट्रपति वेंकटरमन ने अजीत डोभाल को 1988 में कीर्तिचक्र से सम्मानित किया तो ये भी एक नई मिसाल बन गई।

अजीत डोभाल पहले ऐसे शख्स थे जिन्हें सेना में दिए जाने वाले कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था. अजीत डोभाल की कामयाबियों की लिस्ट में आतंक से जूझ रहे पंजाब और कश्मीर में कामयाब चुनाव कराना भी शामिल है. यही नहीं उन्होंने 6 साल पाकिस्तान में भी गुजारे हैं और चीन, बांग्लादेश की सीमा के उस पार मौजूद आतंकी संगठनों और घुसपैठियों की नाक में नकेल भी डाली है। अजीत डोभाल की पहचान सुरक्षा एजेंसियों के कामकाज पर उनकी पैनी नजर की वजह से बनी है। ऐसी ही साफ समझ की बदौलत अजीत डोभाल ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को संकट से उबारा था। 24 दिसंबर 1999 को एयर इंडिया की फ्लाइट आईसी 814 को आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया और उसे कांधार ले जाया गया। भारत सरकार एक बड़े संकट में फंस गई थी। ऐसे में संकटमोचक बनकर उभरे थे अजीत डोभाल।

अजीत उस वक्त वाजपेयी सरकार में एमएसी के मुखिया थे। आतंकवादियों और सरकार के बीच बातचीत में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और 176 यात्रियों की सकुशल वापसी का सेहरा डोभाल के सिर बंध गया था। अजीत डोभाल ने सीमापार पलने वाले आतंकवाद को करीब से देखा है और आज भी आतंकवाद के खिलाफ उनका रुख बेहद सख्त माना जाता है।

किसान को महीने में डेढ़ लाख की कमाई, खेती में अगर फायदा ना हो रहा हो तो अपना…..

खेती में अगर फायदा ना हो रहा हो तो अपना तरीका बदलो।

राजस्थान : किसान को अगर खेती में फायदा नहीं हो रहा हो तो आप अपना व्यवसाय नहीं बल्कि अपना तरीका बदल लो। फिर देखो किसान परिवार की किस्मत बदलते देर नहीं लगती। इस बात का ताजा उदाहरण है राजस्थान के सीकर जिले के खाचरियावास का किसान भगवान सहाय धायल।

कुएं में पाताल की राह पकड़ चुका भूजल स्तर धायल के सामने बड़ी समस्या था। 

किसान भगवान सहाय धायल को खेती से जीवन यापन करना मुश्किल हो पा रहा था, क्योंकि फसलों के लिए पानी की कमी पडऩे लगी थी। ऐसे में किसान भगवान सहाय धायल ने थाइलैण्ड से इजरायली बोर की पौध मंगवाकर खेत में झाडिय़ां लगा दी। नतीजा यह रहा कि कम समय और कम पानी में ही बम्पर पैदावार व कमाई होने लगी।

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