समर सरप्राइज ऑफर में ऐसा क्या लेकर आये अंबानी जिसकी वजह से हुआ ये कमाल…

जियो अपने यूजर्स के लिए जो ऑफर लेकर आया उससे ज्यादा से ज्यादा लोग जियो के साथ जुड़े. 6 महीने के लिए जियो ने अपने यूजर्स के लिए सबकुछ फ्री कर दिया. जियो ने कम समय में ज्यादा से ज्यादा यूजर को अपने साथ जोड़ने का विश्व रिकॉर्ड भी बना लिया हैं. इस कड़ी में ही जियो ने 31 मार्च को फिर से समर सरप्राइज ऑफर लांच किया. जिसकी वजह से बचे हुए यूजर भी अपना नंबर जियो में पोर्ट करा रहे हैं.

जियो की वजह से पिछले हफ्ते मुकेश अंबानी  ने 7 दिनों के अंदर 15 हजार करोड़ रूपए कमा लिए. जिसकी वजह से मुकेश अंबानी विश्व के 24वें अमीर इंसान बन गए. इससे पहले 29 मार्च तक वो 26वें अमीर इंसान थे. ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के अनुसार 4 अप्रैल को मुकेश अंबानी की सम्पति 29.7 अरब डॉलर थी जो की इंडियन रुपये में 1.96 लाख करोड़ हो गई है.

इससे पहले मुकेश अंबानी के पास 27.4 अरब डॉलर सम्पति थी. उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व सीईओ स्टीव बॉमर को पीछे करके विश्व के 24वे अमीर व्यक्ति का स्थान प्राप्त किया. एक्सपर्ट की माने तो जियो की पेड सर्विसेज लांच होने के कारण जियो की इनकम तेजी से बढ़ी है. जिसके कारण रिलाइंस इंडस्ट्रीज के स्टोक्स में तेजी से उछाल आया. जियो की पेड सर्विसो में सबसे ज्यादा प्रभाव प्राइम मेम्बरशिप का रहा है. जिसके कारण जियो ने इतने कम समय में ज्यादा पैसे कमाये है.

 

कश्मीर के लिए पांच ट्रेन बिहार से चला दीजिये तो सारी धारायें सही से काम करेगी !!

ब्लॉग : आनंद कुमार ( यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) :- कई बार जो बातें हम आपस में करते हैं वो अनजान लोगों के बीच नहीं करते। सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से परहेज भी रखते हैं। बिहारियों की हालत ऐसी होती है कि हम अक्सर चुटकुले किसी संता-बंता, पप्पू-टीपू, या फजलु-अफ़जल पर भी नहीं सुनाते। हमारे चुटकुले भी हमपर ही होते हैं। जैसे अगर पूछा जाए की कश्मीर के आतंकवाद की समस्या का आसान इलाज क्या है ? तो जवाब होता है वहां के लिए बिहार से कुछ डायरेक्ट ट्रेन चलवा दो ! 

कश्मीर के लिए पांच ट्रेन चला दीजिये बिहार से तो वो भी सुधर जायेगा।

गौर कीजिये तो ये दिख भी जाएगा। सत्तर के दशक में कभी बंगाल राजनैतिक हत्याओं से पीड़ित हुआ करता था। बिहारी जाकर उसी दौर में वहां नौकरी करने लगे और धीरे धीरे मार काट ख़त्म। पूर्वोत्तर कई उल्फा जैसी उग्रवादी-आतंकी विचारधाराओं से ग्रस्त था। बिहारी वहां बसने लगे, वो भी ठीक हो चला। पंजाब आतंकवाद से ग्रस्त हुआ, बिहारी मजदूर वहां के खेतों में जाने लगे तो वो भी ठीक। दक्षिण में एल.टी.टी.इ. थी, बिहारी आज वहां होते हैं तो एल.टी.टी.ई. नहीं रही।

कश्मीर के लिए पांच ट्रेन चला दीजिये बिहार से तो वो भी सुधर जायेगा।

ये मेरा ही चुटकुला है या बेबसी पर मुस्कान वो तय करना जरा मुश्किल है। अकेले मुंबई में करीब 50 लाख बिहारी होते हैं। सभी मेट्रो और बड़ी जगहों को मिलायेंगे तो बिहार के तीन करोड़ से ऊपर लोग वहीँ प्रवासी के तौर पर मिल जायेंगे। जैसी की आम धारणा है वैसे बिहार कृषि प्रधान भी नहीं होता। बिहार की आबादी का 55-60% हिस्सा नौकरीपेशा है, काम करने वालों की लगभग 30-35 प्रतिशत की आबादी ही कृषि पर निर्भर है। ये तब है जब करीब 12% आबादी ही शहरी है, बाकी सब बिहार में ग्रामीण ही होते हैं। हिमांचल के पहाड़ी इलाकों के बाद ये सबसे कम शहरी आबादी वाला इलाका है। 80 प्रतिशत ग्रामीण आबादी और 35% कृषक, बाकी कहाँ नौकरी करते होंगे अंदाजा करना मुश्किल नहीं।

यानि जिस सर्विस इंडस्ट्री और नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग की यदा कदा, बड़ी बैठकों में चर्चा होती है उसके लिए बिहार में श्रम शक्ति उपलब्ध थी। हाँ, उसकी इंडस्ट्री कभी यहाँ नहीं आई, ये और बात है। अब कई स्वनामधन्य बुद्धिजीवी बताएँगे कि देखो इस से बाहर से पैसा बिहार आ रहा है और उस से बहार आएगी। लेकिन समस्या ये है कि इन कामगारों के बच्चों की शिक्षा के लिए बिहार में कोई व्यवस्था नहीं। परीक्षाएं समय पर नहीं होती इसलिए आप तीन साल में ग्रेजुएशन नहीं कर सकते तो बाहर पढ़ना मजबूरी है। इस तरह आया हुआ पैसा वापिस दिल्ली, कोटा, बंगलौर, भोपाल चला जाता है।

ये चीज़ें आसानी से कल के कार्यक्रम में मंच पर भी दिख गई होंगी। सिर्फ पटना शहर का ही इतिहास 2000 साल से ज्यादा का निकल आएगा। किस्मत से जब मंच पर से इसी शहर में “बिहार दिवस” के सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहे थे तो बिहार के कितने कलाकार दिखे ? हजारों साल का सांस्कृतिक इतिहास कहाँ गया ? मंच से नितीश बाबू को ये क्यों कहना पड़ता है कि बिहारियों के काम ना करने से दिल्ली बंद हो जायेगी, ये क्यों नहीं पूछते कि बिहारियों को दिल्ली जाकर नौकरी क्यों करनी पड़ती है ?

आपके भाषण में मेरी रूचि नहीं सुशासन बाबु। मुझे उस कॉइन कलेक्टर को देखना था जो इतिहास सचमुच संजो के रख रहा था और आपकी अकर्मण्यता के वजह से हाल में ही डूब गया। मुझे उन किसानों को देखना था जिनके प्रति हेक्टेयर धान और आलू की उपज को तो अपनी पीठ थपथपाने के लिए आप अपने प्रकाशनों में छापते है, लेकिन मंच पर बुला कर उन्हें सम्मानित करने में शायद आपके जातीय-सियासी आंकड़े गड़बड़ाने लगते हैं। मुझे उस लड़के को भी देखना था जो बिना लोभ लालच लोगों को किताब खरीदने के लिए प्रेरित करता, अनजान लोगों को पोस्टकार्ड लिख रहा होता है। मुझे उसे भी देखना था जो बच्चों को नशा मुक्त कर के शिक्षित करने का प्रयास आपके गांधी मैदान वाले मंच से थोड़ी ही दूर पर हर रोज़ करता है।

बाकी ये अनपढ़ जाहिलों को भी मंच पर से उतारिये जनाब। इनकी तस्वीर छपने पर जैसा बिहार दिखता है, वो तो बिलकुल भी मेरा चेहरा नहीं।

कम्युनिस्ट खेमे के इन इतिहासकारों ने भगत सिंह की इस तरह से की निर्मम हत्या…

भगत के मिट्टी की खुशबू हम सबके जेहन में रच-बस चुकी है, तुम्हारे षड्यंत्र अब सफल नहीं होंगे….

ब्लॉग : ( अभिजीत सिंह, यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) :- 1931, फरवरी-मार्च का महीना, सेन्ट्रल जेल, लाहौर के 14 नम्बर वार्ड में फाँसी की प्रतीक्षा कर रहे बंदियों में से एक ने अपनी माँ को एक पत्र लिखा। माँ ने बेटे का पत्र खोला तो उसमें लिखा था, माँ, मार्च की 23 तारीख को तेरे बेटे की शादी है, आशीर्वाद देने जरूर आना। माँ सोचने लगी जेल में तो लडकियाँ होती नहीं तो फिर ये पगला किससे प्यार कर बैठा, कहीं किसी जेलर की बेटी पर तो मेरे बेटे का दिल नहीं आ गया ? माँ से पूछे बिना बेटा शादी कर लेगा इस आशंका से पीड़ित माँ ने तस्दीक करने के लिये अपने छोटे भाई को भेजा, जा जरा देख के आ कि ये किस कुड़ी को दिल दे बैठा है। कैदी ने मिलने आने वाले को एक कागज पर कुछ लिख कर दिया और कहा, इसे माँ को दे देना और ध्यान रहे इसे और कोई न खोले। माँ ने बेटे का पत्र खोला तो लिखा था, मेरी होने वाले दुल्हन का नाम है “मौत”।

मौत को माशूका बना लेने वाले इस शख्स का नाम था भगत सिंह। ये वो नाम है जिसके सामने आते ही देशप्रेम और बलिदान मूर्त हो उठता है। भगत वो नाम है जिसकी राह रूप, यौवन और सौन्दर्य नहीं रोक सकी, भगत वो नाम है जिसने एक अत्यंत धनी परिवार से आये विवाह प्रस्ताव को ये कहते हुए ठुकरा दिया था कि मेरा विवाह तो अपने ध्येय के साथ हो चुका है अब दुबारा विवाह क्या करना, भगत वो नाम भी है जिसके लिये उसकी अपनी धार्मिक परंपरा के अनुपालन से अधिक महत्व भारत की आजादी का था। वो चाहता तो फांसी की सजा से बच सकता था पर उसने इसके लिये कोई कोशिश नहीं की, इसलिये नहीं की क्योंकि उसे पता था कि अपना बलिदान देकर वो तो सो जायेगा पर सारा भारत जाग उठेगा और फिरंगी हूकूमत की जड़ उखड़ जायेगी।

जिस हुतात्मा का सिर्फ जिक्र भर आज उसके बलिदान के 86 साल बाद भी युवकों में जोश भर देता है, तो जाहिर है कि वो लोग जिनकी विचारधारा का अवसान हो चुका है वो अगर भगत को अपने खेमे का साबित कर दें तो शायद उनकी मृत विचारधारा कुछ अवधि के लिये जी उठे। इसी सोच को लेकर कम्युनिस्टों ने बड़ी बेशर्मी से भगत सिंह के बलिदान का अपहरण कर लिया। विपिन चन्द्र, सुमित सरकार, इरफान हबीब, रोमिला थापर जैसे वाम-परस्त इतिहासकारों ने सैकड़ों लीटर स्याही ये साबित करने में उड़ेल दी थी कि भगत सिंह तो कम्युनिस्ट थे। भगत के “मैं नास्तिक क्यों हूँ” वाले लेख को बिना किसी आधार का ये लोग ले उड़े और उसे लेनिन के उस कथन से जोड़ दिया जिसमें उसने कहा था कि ‘नास्तिकता के बिना मार्क्सवाद की कल्पना संभव नहीं है और नास्तिकता मार्क्सवाद के बिना अपूर्ण तथा अस्थिर है’।

यानि इनके अनुसार भगत सिंह मनसा, वाचा, कर्मणा एक प्रखर मार्क्सवादी थे। भगत सिंह के प्रति ममत्व जगने के वजह ये भी है कि जिस लेनिन, स्टालिन, माओ-चाओ, पोल पोट वगैरह को वो यूथ-आइकॉन बना कर बेचते रहे थे उनके काले कारनामे और उनके नीतियों की विफलता दुनिया के सामने आने लगी थी और स्वभाव से राष्ट्रप्रेमी भारतीय युवा मानस के बीच उनको मार्क्सवादी आइकॉन के रूप में बेचना संभव नहीं रख गया था इसलिए इन्होने भगत सिंह को कम्युनिस्ट बना कर हाईजैक कर लिया।

इसलिये किसी व्यक्ति के मृत्यु के उपरांत उसकी विचारधारा को लेकर जलील करने का सबसे अधिक काम अगर किसी ने किया है तो वो यही लोग हैं जिन्होनें भगत सिंह जैसे हुतात्मा को कम्युनिस्ट घोषित करने का पाप किया। ऐसे में इस बात की तहकीक भी आवश्यक हो जाती है कि क्या कम्युनिस्टों के मन में हमेशा से भगत सिंह के प्रति आदर था या अपने राजनीतिक फायदे और अस्तित्व रक्षण के लिए उन्होंने उगला हुआ थूक निगल लिया ? भगत सिंह के प्रति कम्युनिस्ट आदर जानने के आवश्यक है कुछ कम्युनिस्टों की किताबों को पढ़ा जाए और भगत सिंह के संबंध में कुछ कम्युनिस्ट नेताओं की स्वीकारोक्तियों को सुना जाए।

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दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्ते होते हुए भी ऐसा क्या हुआ जो भारत को रूस के सामने रखनी पड़ी ये शर्त

मोदी जी के नेतृत्व में भारत अब मजबूती के साथ दुनिया के सामने अपनी बात रख रहा है। अब देश इतना मजबूत हो चुका है कि दुनिया का कोई भी देश अब भारत को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। पीएम मोदी ने अपनी दूरदर्शिता से जो कदम अपने कार्यकाल के शुरुवाती दिनों में उठाये थे उनका फायदा अब भारत के लोगों को मिल रहा है और भारत का मान बढ़ रहा है। 

भारत हमेशा से रूस का अच्छा मित्र रहा है और दोनों देश एक दूसरे के हितों की हमेशा चिंता करते हैं लेकिन रूस ने पिछली बार जब भारत के साथ एक सौदा किया था तो उस सौदे में किये गए वादे पर रूस ने पूरी तरह से अमल नहीं किया जिसकी वजह से भारत को नुकसान हुआ था. इसीलिए मोदी सरकार के प्रबल नेतृत्व में भारत ने अबकी बार रूस के सामने शर्त रख दी है.

अगले पेज पर जानें, क्या है वो सौदा जिसको लेकर अब भारत रूस के सामने रख रहा है शर्त

नीता अंबानी का विजय माल्या के साथ MMS हुआ लीक, दाव पर अम्बानी की इज्जत…

नीता अम्बानी का पेज 3 पार्टीज, आईपीएल के मैच या फिर कई फैशन शोज के दौरान उनका ग्लैमरस अवतार नजर आ चुका है। वे काफी लग्जरी लाइफ भी जीती हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे दिन की शुरुआत जापान के सबसे पुराने क्रॉकरी ब्रांड ‘नोरिटेक’ के कप में चाय पीकर करती हैं। नोरिटेक क्रॉकरी की ख़ास बात यह है कि इसमें सोने (गोल्ड) की बॉर्डर है और इसके 50 पीस के सेट की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए बताई जाती है।

नीता अंबानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उनके ग्रुप के स्कूल में एडमिशन शुरू होते हैं, तब वे अपना फोन स्विचऑफ कर देती हैं। ऐसा वे धीरूभाई अंबानी स्कूल में एडमिशन के लिए फोन पर होने वाली सिफारिशों से बचने के लिए करती हैं। नीता बताती हैं कि धीरूभाई अंबानी स्कूल की गिनती मुंबई के टॉप 10 स्कूलों में होती है और यहां एडमिशन के लिए परीक्षा देनी पड़ती है। मैं चाहती तो सबको एडमिशन दे सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता। हम एजुकेशन क्वालिटी पर फोकस करते हैं।

अगले पेज पर देखिये विडियो..

America के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अब इन भारतियों को America से भगाने की तैयारी कर रहे है!

अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने बाद भारतीय आईटी कंपनियों पर आउटसोर्सिंग को लेकर शिकंजा कसने की बात कही जा रही है। कहा जा रहा है कि इससे देश के आईटी सेक्टर को बड़ा नुकसान हो सकता है।

लेकिन इस नूकसान को लेकर भारतिय जनता को आईटी सेक्टर के लिए सहानूभूति दिखाने की कोइ जरूरत नही! क्या जरूरत थी भारतिय कंपनियों को अमरिका के लिए कुछ इस तरह के योगदान देने की?

विडियो में देखिये अमेरिका के लिए भारतियों ने क्या-क्या किया है ?

 

ये 5 स्‍टेप आपको बना सकते हैं अमीर, ज्‍यादा इनकम नहीं है जरूरी …

नई दिल्ली।   अमीर बनने के लिए लाखों में इनकम होना जरूरी नहीं है। सही प्‍लानिंग और अनुशासन से आप कम पैसे में भी अमीर बन सकते हैं। यानी आप हर माह एक निश्चित रकम की सेविंग कर  बड़ा फंड बना सकते हैं।
 बनाएं मंथली बजट
अमीर बनने के लिए जरूरी है कि आप मंथली बजट बनाएं। इससे आप के दिमाग में यह क्लियर रहेगा कि आपकी इनकम कितनी है और आपका खर्च कितना है। इसके अलावा आपको हर माह कितनी सेविंग करनी है यह भी क्लियर रहेगा। ऐसे में आप गैर जरूरी खर्च से बचे रहेंगे। लंबी अवधि में सेविंग के लिए यह आदत आपकी मदद करेगी।
आगे की स्‍लाइड में जानें जल्‍द निवेश शुरू करना क्‍यों है जरूरी 

घर में पड़े खराब लैपटॉप-TV को बेचें ऑनलाइन, मिलेंगे अच्छे दाम…

नई दिल्‍ली।घर में बेकार पड़े टीवी, लैपटॉप या फिर किसी भी इलेक्‍ट्रॉनिक सामान को आप अब आसानी से ऑनलाइन बेच सकते हैं। सिर्फ पुराना सामान ही नहीं, बल्कि खराब हो चुका और टूट चुके इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स को भी ऑनलाइन बेचा जा सकता है। आज लैपटॉप, स्‍मार्टफोन और टीवी जैसी इलेक्‍ट्रोनिक चीजें हर घर का अहम हिस्‍सा बन गए हैं। डिजिटल टेक्‍नोलॉजी जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है ई-वेस्‍ट। इस इलेक्‍ट्रॉनिक वेस्‍ट को कूड़ेदान में फेंकने की बजाय आप ऑनलाइन बेचकर अच्‍छे दाम हासिल कर सकते हैं।
घर में पड़े खराब लैपटॉप-TV को बेचें ऑनलाइन, मिलेंगे अच्छे दाम
ईस्‍क्रैपइंडिया के सीनियर ऑफिसर आशिफ मलिक ने Moneybhaskar को बताया कि कि ई-वेस्‍ट को बेचकर आप न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में योगदान देते हैं, बल्कि पुराने और बेकार पड़े सामान के लिए अच्‍छी कीमत भी हासिल करते हैं।
आगे हम आपको ऐसी ऑनलाइन कंपनियों के बारे में बता रहे हैं, जो आपके घर में पड़े ई-वेस्‍ट को खरीदते हैं।

पोस्ट ऑफिस, एयरटेल बैंक के साथ मिलेगा बिजनेस का मौका, ये है प्लान…

 

india postनई दिल्ली। आपके पास इंडिया पोस्ट पेमेंट और एयरटेल पेमेंट बैंक के साथ बिजनेस करने का मौका है। ये दोनो बैंक जल्द ही थर्ड पार्टी मॉडल के तहत कई सारी सर्विसेज शुरू करने वाले हैं। जो कि फ्रेंचाइजी के जरिए किए जाएंगे। ऐसे में आप अभी से तैयारी कर ले। जिससे इन कंपनियों के साथ बिजनेस करने के लिए तैयार हो सकें।
पेमेंट बैंक करेंगे पार्टनरशिप
इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक और एयरटेल पेमेंट बैंक को पेमेंट बैंक का लाइसेंस मिला हुआ है। इसके तहत ये बैंक एक लाख रुपए तक का डिपॉजिट ले सकते हैं। हालांकि यह लोन प्रोडक्ट सहित दूसरी कई सर्विसेज खुद नहीं शुरू कर सकते हैं। इसे देखते हुए ये बैंक अब थर्ड पार्टी मॉडल पर बिजनेस पार्टनर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। जिसके जरिए आपको इन बैंकों के साथ जुड़ने का मौका मिलेगा।
आगे की स्लाइड में पढ़िए किन शहरों में होगा फोकस
छोटे शहरों में होगा फोकस
दोनों बैंक छोटे शहरों में खास तौर से फोकस करेंगे। जहां पर वह कई ऐसी सर्विसेज अपने कस्टमर तक पहुंचाना चाहते हैं, जो वह डायरेक्ट नहीं दे सकते हैं। बैंक इसके तहत प्रमुख रुप से इन सर्विसेज के लिए बिजनेस पार्टनर को एसोसिएट करेंगे…
1.इन्श्योरेंस प्रोडक्ट
2. म्युचुअल फंड प्रोडक्ट
3. लोन प्रोडक्ट
4.पेंशन प्रोडक्ट
5. फॉरेक्स प्रोडक्ट
आगे की स्लाइड में पढ़िए एयरटेल पेमेंट बैंक का क्या है प्लान

आपके पास है 2 लाख रु तों शुरू करें ये बिजनेस, मोदी सरकार देगी 6 लाख की मदद…

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नई दिल्ली। अगर आपके पास 2 लाख रुपए हैं तो आप सरकार की मदद से कुछ ऐसे प्रोडक्ट का बिजनेस शुरू कर सकते हैं, जिनकी डिमांड मार्केट में हमेशा बनी रहती है। खास बात है कि यह बिजनेस शुरू करने में आपको सरकार की खास योजना के तहत 75 फीसदी तक फंड की मदद मिल जाएगी। छोटे और मझोले इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की योजना के तहत बिजनेस शुरू करने के लिए 6 लाख रुपए तक का लोन आसानी से हो जाएगा।
हम ऐसे ही एक पॉपुलर बिजनेस के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें शुरू करने के लिए आपके पास 2 लाख रुपए तक होना जरूरी है। सरकार ने जो बिजनेस की स्ट्रक्चरिंग की है, उस हिसाब से आपको सभी खर्च काटने के बाद सालाना 4.8 लाख रुपए यानी हर महीने 40 हजार रुपए तक प्रॉफिट हो सकता है। हालांकि बिजनेस शुरू करने में पूरा खर्च 7-8 लाख रुपए होगा, लेकिन 6 लाख रुपए तक की मदद सरकार की ओर से होगी।
अगली स्लाइड में, जानें ऐसे बिजनेस के बारे में