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phpThumलखनऊ. बिहार के सीतामढ़ी में भगवान श्रीराम और उनके भाई लक्ष्मण के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा लिखाने को लेकर बहस छिड़ गई है। मुकदमे कहा गया है कि मां जानकी (सीता) का कोई कसूर नहीं था, इसके बाद भी भगवान राम ने उन्हें जंगल में क्यों भेजा। बुद्धजीवियों और धर्मगुरूओं ने इस मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। सभी का कहना है कि ये मुकदमा या तो प्रचार के लिए किया गया है या उस व्यक्ति का धर्म और रामायण का पूर्ण ज्ञान नहीं है। कोर्ट से अपील की गई है कि इस तरह के मामलों पर संज्ञान ही न लिया जाए, वरना कल को कोई भी इतिहास के किसी पात्र को उठाकर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा देगा। इससे केवल कोर्ट का वक्त खराब होगा।

Red क्या भगवान श्री रामजी ने माता जानकी को छोड़ दिया था, जानिए पूरा सच….

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हिन्दुओं के लिए आस्था के प्रतीक हैं श्रीराम ; लखनऊ यूनिवर्सिटी में ज्योतिष विज्ञान के प्रोफेसर डाॅ. विपिन पाण्डेय ने कहा कि भगवान श्रीराम और कृष्ण हिन्दुओं के लिए आस्था के प्रतीक हैं। उनके द्वारा किए गए कार्यों को कानून के परिधि में बांधना उचित नहीं है। ये चीजे कानून से परे हैं। ये धर्म और अध्यात्म की बातें हैं, इन्हें बौद्धिक तर्क से बाहर रखना चाहिए। ये कार्य जिस व्यक्ति ने किया हैं, उसे धर्म और भगवान श्रीराम के बारे में पूर्ण ज्ञान नहीं है। उसे दंड देने की जगह उसे उनके बारे में बताना चाहिए।

Next पर पढ़े : अयोध्या में भी दर्ज नहीं होना चाहिए था मुकदमा…. 

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