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विकास और लोगों के रहन-सहन ने आज भारत को इस कगार पर ला कर खड़ा किया है कि अगर आने वाले समय में देश को पीने का पानी विदेशों से खरीद कर मंगवाना पड़े, तो हैरान होने की ज़रूरत नहीं है. तेज़ी से गायब हो रहे भूमिगत जल की स्थिति पर गौर करें, तो साल 2050 तक प्रति व्यक्ति के लिए 3,120 लीटर पानी ही बचेगा. अब ज़रा सोचिए जहां एक दौर ऐसा था जब हमारे पास भूमिगत पानी की मात्रा बेहद अधिक थी. लेकिन इस कंकरीट नुमा विकास ने हमारी स्थिति को बद से बदतर बनाने का काम किया है. विकास किसे नहीं पसंद, लेकिन जो विकास आपकी मूलभूत अवश्कताओं को कुचलकर हो वो किस काम का. दिल्ली जैसे महानगरों में तो पानी के लिए पैसे खर्च ही करने पड़ेंगे. जहां पहले यहां पानी पीने के लिए जगह-जगह प्याऊ आसानी से मिल जाते है, वहीं अब यहां आपको 2 रुपये में मशीन का एक ग्लास ठंडा पानी मिल जाएगा.

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