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मित्रो बहुत सारे बुखार तेजी से भारत देश मे फैल रहे है ।। करोडो की संख्या मे लोग इससे प्रभावित हो रहे है। और लाखों लोग मर रहे है। हमेशा की तरह सरकार के हाथपर हाथ रखे तमशा देख रही है।

  1. 20 पत्ते तुलसी, नीम की गिलोई का सत् 5gm, सोंठ (सुखी अदरक) 10gm , 10 छोटी पीपर के टुकड़े, सब आपके घर मे आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
    सब एक जगह पर कूटने के बाद एक गिलास पानी में उबालकर काढ़ा बनाना है
    । ठन्डा होने के बाद दिन में सुबह, दोपहर और श्याम तीन बार पीना चाहिए।

नीम गिलोई – इसका जूस डेंगू रोग में श्वेत रक्त कणिकाए, प्लेटलेट्स कम होने पर तुरंत बढ़ाने में बहुत ज्यादा काम आता है।

  1. एक और अच्छी दवा है, एक पेड़ होता है उसे हिंदी में हारसिंगार कहते है, संस्कृत पे पारिजात कहते है, बंगला में शिउली कहते है,
    उस पेड़ पर छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और फुल की डंडी नारंगी रंग की होती है, और उसमे खुश्बू बहुत आती है, रात को फूल खिलते है और सुबह जमीन में गिर जाते है ।
    इस पेड़ के पांच पत्ते तोड़ के पत्थर में पिस के चटनी बनाइये और एक ग्लास पानी में इतना गरम करो के पानी आधा हो जाये फिर इसको ठंडा करके रोज सुबह खाली पेट पियो तो बीस बीस साल पुराना गठिया का दर्द इससे ठीक हो जाता है । और यही पत्ते को पिस के गरम पानी में डाल के पियो तो बुखार ठीक कर देता है और जो बुखार किसी दवा से ठीक नही होता वो इससे ठीक होता है जैसे चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, Encephalitis , ब्रेन मलेरिया, ये सभी ठीक होते है ।

इनके प्रयोग से आप रोगी की जान बचा सकते हैं।

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