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कैसे 'ब्राह्मण वोटबैंक' पर टिकी भाजपा यूपी में धोखा भी खा सकती है?

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नई दिल्ली : राजनीतिक पंडित मानते हैं कि देश में अगर सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ तो वह ब्राह्मण वोटबैंक के खिसकने से हुआ। एक वक़्त हुआ करता था जब देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में नारायण दत्त तिवारी, कमलापति त्रिपाठी, गोविंद वल्लभ पंत और श्रीपति मिश्रा सरीखे ब्राह्मण सीएम कांग्रेस ने दिए, लेकिन वर्तमान में कांग्रेस का यूपी में किसी भी जाति में जनाधार नहीं है। वैसे यूपी में ब्राह्मणों का वोटबैंक कभी प्रचण्ड तरीके से किसी एक पार्टी की तरफ रहा भी नहीं। यादवों का सपा से जुड़ाव और दलित वोटबैंक का मायावती से जैसे ही जुड़ाव गहरा हुआ वैसे ही ब्राह्मण वोटबैंक बीजेपी की तरफ खिंचता चला गया।

साल 2012 के विधानसभा चुनावों में ही एसपी और बीएसपी को 19 प्रतिशत ब्राह्मणों का वोट मिला। 400 से ज्यादा विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में 13 फीसदी ब्राह्मण आबादी कभी बसपा तो कभी सपा का समर्थन करती रही है। वहीँ साल 2002 से यूपी के ब्राह्मण वोटबैंक को देखें वह बीजेपी से कटता जा रहा है। शायद कारण भी यही है कि यूपी में बीजेपी ने दलितों में सेंध लगने के लिए केशव मौर्या को खड़ा किया ताकि बीजेपी से कटने वाले ब्राह्मण वोटबैंक की भरपाई की जा सके।

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