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पटना : सुप्रीम कोर्ट में हिंदी में लिखी याचिका स्वीकार नहीं की जाती, लेकिन बिहार के एक वकील ने इस परंपरा का विरोध किया। उन्होंने अपनी याचिका हिंदी में दायर की तथा अपनी दलीलों से इसे स्वीकार करवा लिया। अब वे वहां हिंदी में ही बहस करेंगे।13-1431540654-supremecourtindiaबिहार के एक वकील के कड़े विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को हिन्दी में लिखी याचिका स्वीकार करनी ही पड़ी। याचिका पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता ब्रह्मदेव प्रसाद ने दायर की है। वे पटना हाईकोर्ट में हिन्दी में लिखी याचिका ही दायर करते हैं और हिन्दी में ही बहस भी करते हैं। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में हिन्दी में लिखी याचिका को स्वीकार कराना चुनौती थी।

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