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dr swami

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विश्व में केवल सनातनी ही थे जिन्होंने युद्ध भूमि में अपने आदर्शों को नहीं छोड़ा! वे केवल सनातनी योद्धा ही थे, जिन्होंने अपनी जान पर बन आने पर, अथवा, शत्रुओं पर विजय पाने के पश्चात भी अपने उसूल नहीं तोड़े।

हाँ, हमें स्वयं के न्योयोचित्त होने पर गर्व है! लेकिन, हमेशा परंपरा और नीतिओं का बोझ ढोकर हमें क्या मिला? लाखों हिन्दुओं की मौत,  हिन्दुओं का सामाजिक विभाजन, अनेक राज्यों पर विदेशी आक्रांताओं का अधिकार, और जबरन धर्मान्तरण!

संस्कृत में एक कहावत है जिसे, समय के साथ हम हिन्दू भूल बैठे हैं!
वह कहावत है ‘शठे शाठ्यम समाचरेत’ – अर्थात – “दुष्ट से दुष्टता का व्यवहार किया जाना चाहिए!” – यही नीतिसंगत है!

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स्रोतhindutva
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