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सीधा लेट जाये पीठ के बल से.. कान में रुई के छोटे से बॉल बना के कान बंद कर देना | अब नजर नासिका पर रख देना और रुक-रुक के श्वास लेता रहें |

आँखों की पुतलियाँ ऊपर चढ़ा देना …शांभवी मुद्रा शिवजी की जैसी है| वो एकाग्रता में बड़ी मदद करती है | जिसको अधोमुलित नेत्र कहते है | आँखों की पुतली ऊपर चढ़ा देना … दृष्टि भ्रूमध्य में टिका लेना … जहाँ तीलक किया जाता है वहाँ | आँखे बंद होने लगेगी … कुछ लोग बंद करते है तो मनोराज होता है, दबा के बंद करता है सिर दुखता है | ये स्वाभाविक आँखे बंद होने लगेगी | बंद होने लगे तो होने दो |

शरीर को शव वत ढीला छोड़ दिया …. चित्त शांत हो रहा है ॐ शांति …. इंद्रिया संयमी हो रही है …. फिर क्या करें.. फिर कुंभक करें .. श्वास रोक दे … जितने देर रोक सकते है … फिर एकाक न छोड़े, रिदम से छोड़े …बाह्य कुंभक …अंतर कुंभक.. दोनों कुंभक हो सकते है | इससे नाडी शुद्ध तो होगी और नीचे के केन्द्रों में जो विकार पैदा होते है वो नीचे के केन्द्रों की यात्रा ऊपर आ जायेगी |

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