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फिर यह नगर वधू होती किसलिए थी? भारत का सांस्कृतिक पतन!

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आखिरी भाग तक जरूर पढे! आखिरी भाग में आपको एक विडियो भी देखने को मिलेगा….. 

अंग्रेजों ने हमें चारित्रिक रूप से, और नैतिक रूप से नीचा दिखाने के लिए, कमज़ोर बनाने के लिए, शराब के साथ एक काम और भी किया था। और उसमें भी हम भारतवासी काफी डूब गए हैं। और वह दूसरा काम यह था – भारत वासियों को वेश्यावृत्ति के रास्ते पर धकेलना। बहुत खराब काम यह अंग्रेजों ने किया था।

 

आपको सुनकर ताज्जुब होगा, कि 1760 के पहले हिंदुस्तान में कोई शराब नहीं पीता था, ऐसे ही, 1760 के पहले के जो दस्तावेज़ हैं, रिकॉर्ड हैं, वे बताते हैं कि इस देश में कोई वेश्याघर नहीं था, वेश्यालय नहीं था। पूरे हिन्दुस्तान में ! ये अँगरेज़ थे जिंहोंने सबसे पहला वेश्यालय खोल सन 1760 में प्लासी के युद्ध के बाद कलकत्ते में। कलकत्ता में एक बहुत बदनाम इलाका कहा जाता है, जिसको सरकार रेड लाइट एरिया कहती है, और उसका नाम है सोनागाची। यह सोनागाची का रेड लाइट एरिया है – आपको सुनकर बहुत अफ़सोस होगा, दुःख होगा – यह अंग्रेजों का बसाया हुआ है, और अंग्रेजों का बनाया हुआ है। सन 1760 से पहले देश की किसी भी गाँव में, किसी नगर में वेश्याघर नाम की कोई भी चीज़ नहीं हुआ करती थी। तो आप बोलेंगे – मुस्लिम शासकों के ज़माने में क्या होता था? जब मुग़ल सम्राट इस देश में होते थे, मुग़ल शासक इस देश में होते थे, मुस्लिम धर्म को मानने वाले शासक इस देश में होते थे, तब क्या होता था? मुस्लिम शासकों के ज़माने में, सात सौ साल तक इस देश में, एक भी वेश्यालय नहीं बना, एक भी वेश्याघर नहीं बना। कुछ एक-दो मुस्लिम शासलों ने, जो कि अपवाद माने जाते हैं, जिनको उनके धर्म वाले भी गालियाँ देते हैं, एक ग़लत काम शुरू किया था – माताओं, बहन, बेटियों को घरों में से उठा लेना और ज़बरदस्ती उनको एक महल में रखना, उस महल का नाम हरम होता था। उस हरम में, मुस्लिम शासक अपने आमोद-प्रमोद के लिए, समय गुजारने के लिए, माताओं, बहन, बेटियों का नाच वगैरह कराया करते थे। तो, यह कुछ मुस्लिम शासकों ने किया, लेकिन वेश्यालय और वेश्याघर इस हिंदुस्तान में कभी नहीं बना। 

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