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1857 से पहले भारत में अंग्रेजो की पुलिस नहीं थी । सेना हुआ करती थे | और अगर आप लोगो को पता हो 10 मई 1857 को भारत में क्रांति हो गई थी । उस समय के जो महान क्रन्तिकारी थे, उनका नाम था । नाना साहब, तात्याँ टोपे, मंगल पांडे आदि…. इन्होने 7 लाख 32 हजार युवको की फ़ौज बनाई थी | और 10 मई 1857 को क्रांति करने का दिन चुना | उन्होंने 1 ही दिन में 2 लाख 50 हजार अंग्रेजो को काट डाला था इस भाय से अंग्रेज भाग खड़े हुए | उसके लगभग 1 साल बाद अंग्रेजो ने भारत के कुछ गद्दार राजाओ के साथ मिल फ़िर से वपिस आने की योजना बनाई । जिसमे (कैपट्न अमरिंद्र सिहं ज़ो पंजाब के कांग्रेस की सीट पर मुख्य मत्रीं का चुनाव लड़्ते है जो काफ़ी बार मुख्य मत्रीं भी रह चुके हैं॥) उसके दादा पटियाला के नवाब के साथ मिल कर 1857 के क्रांतिकारियों का क़त्ल करवाया और दुबारा भारत में अंग्रेजों को घुसाया गया !

अंग्रेजो ने दुबारा जब भारत में प्रवेश किया तो सोचा की कही दुबारा क्रांति ना हो जाये! इसके लिए उन्होने इंडियन पुलिस एक्ट (INDIAN POLICE ACT) और हम पर अत्याचार करने के लिए 34,735 (चौंतीस हज़ार सात सो पेंतीस) कानून बनाये गए! जिसमे की पुलिस के हाथ में लाठी और डंडे हथियार सौंप दिए गए और ये सभी अधिकार उन्हें मिल गए, की के अंग्रेजो की पुलिस क्रांतिकारियों पर जितने चाहे मर्जी डडें मारे । लाठियो से पिटे कोई कुछ नहीं कर सकता और अगर किसी क्रन्तिकारी ने अपने बचाव के लिये उसकी लाठी पकड़्ने की कोशिश मात्र भी की तो क्रांतिकारियों पर मुकदमा चलेगा |

बात उस समय की है की जब इन कानूनों को बढ़ावा देने के लिए SIMON COMMISSION भारत आ रहा था और उसका बहिष्कार करने के लिए क्रांतिकारी लाला लाजपत राय जी आन्दोलन कर रहे थे वो शांतिपूर्वक तरीके से आन्दोलन कर रहे थे तभी एक अंग्रेज अधिकारी जिसका नाम J.P. Saunders (जे.पी. सॉन्डर्स) था उसने लाला जी पर लाठियां बरसानी शुरू कर दी और जानबूझकर उसने लाला जी के सर पे लाठियां मारी 1 लाठी मारी 2 मारी 3 मारी 4 मारी 5, 10 ऐसे करते करते उस दुष्ट ने लाला जी के सिर पर 14 लाठियां मारी जिनव उनका सिर फट गया व खून बहने लगा ! और बाद में उनकी मृत्यु हो गई !

अब कानून के हिसाब से सॉन्डर्स क़ो सज़ा मिलनी चाहिए इसके लिये भगत सिहं ने पुलिस में शिकायत दर्ज की। मामला अदालत तक गया वहां भगत सिहं ने सफ़ाई दी । लाठिया कमर के नीचे तक मारी जा सकती लेकिन लाला जी के सर पर लाठियां क्यों मारी गयी? जिससे उनकी मौत हुई, अदालात ने उनका तर्क नहीं माना और अदालत ने कहा सॉन्डर्स ने जो किया वो तो कानून में हैं ! उसने कोई कानून नहीं तोड़ा! इसलिये उसको बरी किया जाता है! और सॉन्डर्स बरी हो गया भगत सिहं को गुस्सा आया उसने कहा जिस अंग्रेजी न्याय व्यवस्था ने लाला जी को इन्साफ़ नहीं दिया और सॉन्डर्स को छोड़ दिया उसको सज़ा मैं दूंगा और सॉन्डर्स को वहीं पहुंचाउंगा जहाँ इसने लाला जी को पहुँचाया है । और कुछ दिन बाद भगत सिहं ने सॉन्डर्स को गोली से उड़ा दिया ।

आगे पढ़े – आज क्या हो रहा है ?

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