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यहां सिर्फ 21 सिख सैनिकों ने 10 हजार अफगानों को नाकों चने चबा दिए

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wikimedia

“सवा लाख से एक लडाऊं” गुरुगोविन्द सिंह जी का सबसे लोकप्रिय सवैया रहा है। व्यवहारिक तौर पर तो यह महज एक ‘रूपक’ के सिवाय कुछ भी समझा नहीं जाता, लेकिन मेजर बाना सिंह, कुलदीप सिंह चांदीपुरी, हवलदार ईशर सिंह जैसे असंख्य सिख वीरों ने अतुलित पराक्रम से अपने दसवें गुरु के इस प्रतीकात्मक ‘सवैये’ की असंभाव्यता को नकार संभव कर दिखाया है।

इतिहास के पन्नों में सुनहरी कलम से दर्ज 12 सितम्बर 1897 की उस “सरागढ़ी की जंग” को कौन भुला सकता है, जहां महज 21 सिख योद्धाओं ने अकेले ही हजारों की तादात में अफगानी फ़ौज को नाकों चने चबा दिए।

जी हां ! यह कोई कपोल कल्पित पराक्रम कथा नहीं, बल्कि असंभव सी प्रतीत होने वाली नितांत सत्य घटना है।

यहां सिर्फ 21 सिख सैनिकों ने 10 हजार अफगानों को नाकों चने चबा दिएsoposted

आज हम इतिहास की इस सबसे महान जंग पर प्रकाश डालेंगे, जिससे हमें एक बार फिर ‘राष्ट्र रक्षक’ सिखों के पराक्रम पर गर्व महसूस हो सके।

1. ‘सरागढ़ी’ पश्चिमोत्तर सीमांत (अब पाकिस्तान) में स्थित हिंदुकुश पर्वतमाला की समाना श्रृंखला पर स्थित एक छोटा सा गांव है। लगभग 119 पहले हुई एक जंग में सिख सैनिकों के अपरिमित शौर्य और साहस ने इस गांव को दुनिया के नक़्शे में एक महत्वपूर्ण स्थान के रूप में चिन्हित कर दिया।

 

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