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इन दिनों दिनों बाज़ार में खूब बथुए का साग आ रहा है।

  • बथुआ संस्कृत भाषा में वास्तुक और क्षारपत्र के नाम से जाना जाता है .
– इसमें क्षार होता है , इसलिए यह पथरी के रोग के लिए बहुत अच्छी औषधि है . इसके लिए इसका 10-15 ग्राम रस सवेरे शाम लिया जा सकता है .- यह कृमिनाशक मूत्रशोधक और बुद्धिवर्धक है .-किडनी की समस्या हो जोड़ों में दर्द या सूजन हो ; तो इसके बीजों का काढ़ा लिया जा सकता है . इसका साग भी लिया जा सकता है .

– सूजन है, तो इसके पत्तों का पुल्टिस गर्म करके बाँधा जा सकता है . यह वायुशामक होता है .

– Uric acid बढ़ा हुआ हो, arthritis की समस्या हो , कहीं पर सूजन हो लीवर की समस्या हो , आँतों में infections या सूजन हो तो इसका साग बहुत लाभकारी है . पीलिया होने पर बथुआ +गिलोय का रस 25-30 ml तक ले सकते हैं .

– गर्भवती महिलाओं को बथुआ नहीं खाना चाहिए .

– Periods रुके हुए हों और दर्द होता हो तो इसके 15-20 ग्राम बीजों का काढ़ा सौंठ मिलाकर दिन में दो तीन बार लें .

– Delivery के बाद infections न हों और uterus की गंदगी पूर्णतया निकल जाए ; इसके लिए 20-25 ग्राम बथुआ और 3-4 ग्राम अजवायन को ओटा कर पिलायें. या फिर बथुए के 10 ग्राम बीज +मेथी के बीज +गुड मिलाकर काढ़ा बनायें और 10-15 दिन तक पिलायें .

– एनीमिया होने पर इसके पत्तों के 25 ग्राम रस में पानी मिलाकर पिलायें .

– अगर लीवर की समस्या है , या शरीर में गांठें हो गई हैं तो , पूरे पौधे को सुखाकर 10 ग्राम पंचांग का काढ़ा पिलायें .

– White discharge के निदान के लिए इसके रस में पानी और मिश्री मिलाकर पीयें . यौनदुर्बलता हो तो 20 ग्राम बीजों का काढ़ा शहद के साथ लें . या फिर 5 ग्राम बीज सवेरे दूध के साथ लें .

– पेट के कीड़े नष्ट करने हों या रक्त शुद्ध करना हो तो इसके पत्तों के रस के साथ नीम के पत्तों का रस मिलाकर लें . शीतपित्त की परेशानी हो , तब भी इसका रस पीना लाभदायक रहता है . .

साभार : ग्रहणी

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