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नई दिल्ली –  चीन के अड़ियल रुख के चलते न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की एंट्री खटाई में पड़ने के बाद से सोशल मीडिया में चाइनीज सामान पर बैन की मांग जोरों पर है। कुछ संगठन इसे लेकर देशभर में प्रदर्शन भी कर रहे हैं। हालांकि, जानकारों खासकर चाइना से ट्रेड करने वालों को इसकी दूर-दूर तक कोई संभावना नजर नहीं आती। एक तो देसी उत्पादन उस लेवल का नहीं है, जो सस्ते चीनी उत्पादों की भारी मांग और खपत की जगह ले सके, दूसरे चीन से आयात में बड़ी हिस्सेदारी सेमी-फिनिश्ड गुड्स और उपकरणों की भी है जिनपर रोक से ज्यादातर इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो जाएंगे। अलबत्ता, ई-कॉमर्स के चलते अब चाइनीज उत्पादों की सप्लाई और बढ़ने के आसार हैं।

फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल ऐंड मीडियम एंटरप्राइजेज (फिस्मे) के जनरल सेक्रटरी अनिल भारद्वाज ने बताया, ‘न तो डब्ल्यूटीओ कानून इसकी इजाजत देते हैं और न ही भारत सरकार ऐसा करेगी। जो चीज हमारे यहां बनती ही नहीं, उसकी सीधी सप्लाई रोककर उसे दूसरे रास्तों से मंगाना समझदारी नहीं होगी। ऐसा हुआ तो एलईडी बल्ब से लेकर टीवी और दूसरे कई इलेक्ट्रॉनिक सामान चार से पांच गुना महंगे हो जाएंगे।’ उन्होंने बताया कि फिलहाल चीन से सालाना 61 अरब डॉलर का सामान आता है, जो साल दर साल बढ़ता आ रहा है। अब जब ई-कॉमर्स कंपनियां सीधे चीन से माल लाने के विकल्प तलाश रही हैं और सरकार भी इस दिशा में बढ़ती दिख रही है, ऐसे बैन के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।’

सदर बाजार में चाइनीज इम्पोर्टर और सुपर मार्केट ईवू में अरसे तक काम कर चुके पवन कुमार कहते हैं, ‘इस तरह के बैन से चीन की माली सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके कुल एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 5 पर्सेंट से भी कम है। उस पर से यहां आने वाला ज्यादातर माल अच्छी क्वॉलिटी का नहीं होता। कीमत के लिहाज से भारतीय उत्पाद उनका भी मुकाबला नहीं कर पा रहे, ऐसे में वह चीन से नहीं तो किसी और रास्ते से भारत आएगा।’

दिल्ली में चाइनीज गुड्स के सैकड़ों इम्पोर्टर अब अपनी दुकान बंद कर फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, ऐमजॉन, पेटीएम और दूसरे ई-टेलर्स को सप्लाई करने लगे हैं। इससे उनका वॉल्युम और मार्जिन दोनों बढ़ा है। फ्लिपकार्ट के सप्लायर विभव जैन कहते हैं, ‘अभी ई-टेलर सीधे चीन से सामान नहीं मंगा सकते, वे स्थानीय इम्पोर्टर्स के जरिए बिक्री कर रहे हैं। चूंकि सरकार ई-कॉमर्स में एफडीआई नॉर्म्स को लचीला बना रही है, ऐसे में जल्द ही ये कंपनियां सीधे इम्पोर्ट और बिक्री कर सकेंगी। ऐसे में चाइनीज माल का आवक बढ़ने के ही आसार हैं।’ ट्रेडर्स का यह भी कहना है कि सरकार ने खिलौने, डेयरी प्रॉडक्ट्स, पटाखे सहित कई चाइनीज चीजों पर पाबंदी लगा रखी है, इसके बावजूद ये सामान चोरी-छिपे आते रहे हैं।

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