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आये दिन पतंजलि के नये-नये प्रोडक्ट्स बाज़ार में आते जा रहे हैं। कंपनी का नाम सीधे-सीधे बाबा रामदेव से जुड़ जाता है लेकिन इस नाम के पीछे जिस व्यक्ति की मेहनत है, वो हैं आचार्य बालकृष्ण। आचार्य बालकृष्ण की उम्र 43 साल है और उनका काम करने का तरीका दूसरे लोगों के काफ़ी अलग है। आइये नज़र डालते हैं उनके काम करने के तरीके पर, जिसकी बदौलत पतंजलि आज एक नाम बन चुका है।

 

बालकृष्ण का जन्म ४ अगस्त १९७२ को हुआ। उनकी माँ का नाम सुमित्रा देवी और पिता का नाम जय वल्लभ था। उन्होंने संस्कृत में आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी-बूटियों के ज्ञान में निपुणता प्राप्त की और इसका प्रचार-प्रसार का कार्य करते रहे हैं| उनका जन्म दिवस पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट से जुड़े लोग ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में मनाते हैं। आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि योगपीठ के आयुर्वेद केंद्र के माध्यम से पारंपरिक आयुर्वेद पद्धति को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। बालकृष्ण ने आयुर्वेदिक औषधियों से सम्बंधित कई पुस्तकें भी लिखी है। बालकृष्ण ने रामदेव के साथ मिलकर हरिद्वार में आचार्यकुलम की स्थापना की। वह नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान से भी जुड़े हैं।

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