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नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी एक कवि, एक पत्रकार, राजनेता और फिर देश के प्रधानमंत्री! भारतीय राजनीति की उन चुनिंदा शख्सियतों में से एक जिनके विरोधी भी उनकी आलोचना नहीं करते। ये अटल के नेतृत्व का ही कमाल था, कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए ने 23 दलों के साथ मिलकर न सिर्फ सरकार बनाई और अपना कार्यकाल भी पूरा किया। अटल आज भले ही राजनीति से दूर हों, लेकिन लोग उन्हें आज भी उतने ही सम्मान और आदर के साथ याद करते हैं। आज वे 91 साल के हो गए हैं।
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अटल बिहारी वाजपेयी एक महान कवि, एक पत्रकार, राजनेता और देश के प्रधानमंत्री वो शख्सियत जिसकी विरोधी भी आलोचना नहीं करते थे। ग्वालियर में हुआ था जन्म…  

25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में शिंदे की छावनी की तंग गलियों में गिरिजाघर की घंटी ने जैसे ही क्रिसमस यानी 25 दिसंबर शुरू होने की घंटी बजाई तभी कमलसिंह के बाग में एक छोटे से घर में किलकारी सुनाई दी। ये किलकारी थी अटल बिहारी वाजपेयी की और ये घर था पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी का। मां कृष्णा की अटल सातवीं संतान थे। तीन बहनें, तीन भाई। अटल बिहारी वाजपेयी की संजीदगी को देखकर ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि उनका बचपन बेहद नटखट और शरारतों से भरा हुआ था। कमल सिंह के बाग की गलियों में अटल ने खेल खेले हैं। खेलों में जो सबसे ज्यादा पसंद था, वो था कंचे खेलना। बचपन से ही कवि सम्मेलन में जाकर कविताएं सुनना और नेताओं के भाषण सुनना और जब मौका मिले मेले में जाकर मौज मस्ती करना।

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आगे पढ़े > पत्रकार बनना चाहते थे अटल जी….. 

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