loading...

12391925_704822589618150_1723317749762344669_n

loading...
आज, 21 दिसंबर सोमवार को मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है जिसका ब्रह्मपुराण में बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने आज ही के दिन अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। इसीलिए यह दिन गीता जयंती के नाम से प्रसिद्ध है।

यह एकादशी मोह का क्षय करने वाली है इसलिए इसे मोक्षदा एकादशी भी कहते हैं। इसके पीछे मूल भावना यह है कि मोक्षदा एकादशी के दिन मानवता को नई दिशा देने वाली गीता का उपदेश हुआ था। बाकी एकादशियों की ही तरह इस दिन भी प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर दिनभर उपवास रखना चाहिए और विष्णु भगवान की पूजा करनी चाहिए।

 21604_704913519609057_5804667744045588397_n

गीता ज्ञान का अद्भुत भंडार है। हम सब हर काम में तुरंत नतीजा चाहते हैं लेकिन भगवान ने कहा है कि धैर्य के बिना अज्ञान, दुख, मोह, क्रोध, काम और लोभ से निवृत्ति नहीं मिलेगी। गीता केवल ग्रंथ नहीं, कलियुग के पापों का क्षय करने का अद्भुत और अनुपम माध्यम है।

दुर्लभ मनुष्य जीवन हमें केवल भोग विलास के लिए नहीं मिला है, इसका कुछ अंश भक्ति और सेवा में भी लगाना चाहिए। गीता भक्तों के प्रति भगवान द्वारा प्रेम में गाया हुआ गीत है। अध्यात्म और धर्म की शुरुआत सत्य, दया और प्रेम के साथ ही संभव है। ये तीनों गुण होने पर ही धर्म फल-फूलता है। गीता केवल धर्म ग्रंथ नहीं बल्कि एक अनुपम जीवन ग्रंथ है। जीवन उत्थान के लिए इसका स्वाध्याय हर व्यक्ति को करना चाहिए।

CLICK ON NEXT BUTTON FOR NEXT SLIDE

loading...
शेयर करें