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आपने असहिष्णुता शब्द तो सुना ही होगा, अरे हाँ वही जिसमें कुछ लेखकों, इतिहासकारों, वैज्ञानिकों और कलाकारों ने अपने अवार्ड को वापस कर दिया था l 2015 में मानों अवार्ड वापसी का दौर ही चल पड़ा था, जिसे देखो वो मोदी सरकार की नीतियों से छुब्ध होकर अपने सम्मान को लौटाए जा रहा था l कहा जाता है कि उन दिनों बिहार चुनाव नजदीक थे और इसी के चलते ये सुनियोजित कार्यक्रम था, हालाँकि ये सच है या नही लेकिन सुना तो यही गया था l वैसे अगर आप देखें तो चुनाव के ख़त्म होते ही अवार्ड वापसी का मुद्दा ही ख़त्म हो गया था, लेकिन अब लगता है कि अवार्ड वापसी का मुद्दा एक बार फिर से लौटने वाला है l मोदी की विचारधारा से नाराज अब इस शख्स ने मोदी से अवार्ड को लेने से मना कर दिया है l उन्होंने कहा है कि मोदी की जिस तरीके की विचारधारा है, मैं उसके साथ ऐसे जीवित नही रह सकता l वैसे कहा तो ये भी जा रहा है कि उत्तर प्रदेश चुनाव नजदीक है और ऐसे में तरीके के मुद्दे फिर से वापस आ सकते हैं l अब मीडिया जगत से जुड़े एक पत्रकार ने भी मोदी से अवार्ड लेने से मना कर दिया और उनके विचारधारा का विरोध करते हुए कहा कि नही चाहिए मोदी से अवार्ड l

आगे पढ़िए…कौन है ये शख्स जिसने मोदी से अवार्ड लेने से मना कर दिया !

 

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