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CAVE

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उदयपुर. राजस्थान की भूमि सदा से ही महापुरुषों और वीरों की भूमि रही है। यह धरती हमेशा से ही अपने वीर सपूतों पर गर्व करती रही है। उन्हीं वीरों में से एक थे महाराणा प्रताप। हम आपको बता रहे है उस गुफा के बारे में बता रहा है जहां अकबर को धूल चटाने वाले वीर योद्धा महाराणा प्रताप ने घास की रोटियां खाकर कुछ दिन बिताए थे। यह वो प्रतापी विरासत है जिसे प्रताप ने अपना शस्त्रागार बनाया था। आईए जानते हैं इस गुफा की कहानी।

हम बात कर रहे हैं मेवाड़ की विरासतों में शुमार मायरा की गुफा के बारे में। प्रकृति ने इस दोहरी कंदरा को कुछ इस तरह गढ़ा है मानो शरीर में नसें। इस गुफा में प्रवेश के तीन रास्ते हैं, जो किसी भूल-भुलैया से कम नहीं। इसकी खासियत यह भी है कि बाहर से देखने में इसके रास्ते का द्वार किसी पत्थर के टीले की तरह दिखाई पड़ता है। लेकिन जैसे-जैसे हम अंदर जाते हैं रास्ता भी निकलता जाता हैं। यही कारण है कि यह अभी तक हर तरफ से सुरक्षित है। यही तो कारण था कि महाराणा प्रताप ने इसे अपना शस्त्रागार बनाया था।

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