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(गांधीजी की शहादत (30 जनवरी, 1950) की कहानी, चश्मदीद गवाह केडी मदान की जुबानी)
उस दिन राजधानी में सूरज नहीं निकला था। कोहरे और जाड़े के कारण सड़कों पर ज्यादा लोग नहीं थे। रोज की तरह केडी मदान उस दिन भी 5, अलबुकर रोड ( अब 5, तीस जनवरी मार्ग) स्थित बिड़ला हाउस में अपनी रिकॉर्डिंग मशीनों के साथ पहुंच गए थे। समय रहा होगा शाम के चार-साढ़े चार बजे। उन्हें बापू की प्रार्थना सभा की रिकॉर्डिंग करनी होती थी। वह आकाशवाणी से जुड़े थे। बिड़ला हाउस में प्रार्थना सभा का सिलसिला सितंबर, 1947 से शुरू हुआ था और तभी से मदान रिकॉर्डिंग के लिए आने लगे थे।

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5.10 से 5.17 के बीच : करीब 90 साल के हो गए मदान के जेहन में उस शाम की यादें अब भी ताजा हैं। बिड़ला हाउस में टहलते हुए वह उस स्थान की तरफ इशारा करते हैं जहां बापू की हत्या हुई थी। मदान बताते हैं- ‘गांधी जी जब बिड़ला हाउस से प्रार्थना सभा में शामिल होने निकले, तब मेरी मेरी घड़ी के हिसाब से 5.16 का वक्त था… हालांकि कहा जाता है कि 5.17 पर उन पर गोली चली… तो मैं समझता हूं कि 5.10 पर ही निकले होंगे … उस दिन बापू से मिलने सरदार पटेल आए थे, कुछ जरूरी बात करने के लिए…. आम तौर पर बापू 5.10 पर प्रार्थना के लिए आ जाते थे। लेकिन उस दिन कुछ देर हो गई थी … तो उन्होंने सरदार पटेल को खुद ही कहा कि आप जाइए, मेरी प्रार्थना का वक्त हो गया है … मुझे जाना है। वो 5.10 पर निकले होंगे…।’

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